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Humanity is facing multiple challenges. Religious disharmony. Communal violence. Various Differences between humanity creating disharmony. Unscientific Social systems.

What is the Solution?

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Tushar Cosmic

"Critical Thinking" is the only Solution for saving Humanity Kuhu Sufi

    • Self Help

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    एक कोरोना विक्टिम को मेरी राय

    एक कोरोना विक्टिम को मेरी राय

    एक कोरोना विक्टिम को मेरी राय

    • 4 min
    सरकारी नौकर को औकात में कैसे रखा जाए

    सरकारी नौकर को औकात में कैसे रखा जाए

    सरकारी नौकर को औकात में कैसे रखा जाए

    • 10 min
    फर्क शास्त्रार्थ और डिबेट में

    फर्क शास्त्रार्थ और डिबेट में

    हमारे यहाँ कभी डिबेट को ठीक से न समझ गया, न इज़्ज़त दी गई. हम ने अगर किया भी तो शास्त्रार्थ किया जो कि डिबेट बिल्कुल नहीं हैं. क्या फर्क है औऱ इस फर्क को समझने से क्या फायदा है, गौर से सुनिए, पूरा सुनिए

    • 3 min
    चूतिया इंसान और सयानी कुदरत

    चूतिया इंसान और सयानी कुदरत

    इंसान मूर्ख है। स्याना बनने के चक्कर में ओवर स्मार्ट हो गया और सब गड़बड़ कर दिया। नाश कर दिया, सत्यानाश कर दिया।

    • 7 min
    "मादरचोद" की गाली से "मदर डे" की बधाई से आगे तक-मेरा नज़रिया

    "मादरचोद" की गाली से "मदर डे" की बधाई से आगे तक-मेरा नज़रिया

    मादर चोद यह तकिया कलाम है हमारा.

    लेकिन आप फिर भी मदर-डे की बधाई लीजिये. अब आगे चलते हैं. मेरा मानना है कि भविष्य में माँ-बाप का रोल जैसा आज है वैसा बिलकुल नहीं होना चाहिए.

    औलाद पैदा करने का हक़ जन्म-सिद्ध (birth राईट, पैदईशी हक़) न हो के, earned राईट होना चाहिए. आज हर किसी को हमने औलाद पैदा करने का अधिकार दे रखा है. और जितनी मर्जी औलाद पैदा करने का हक़ दे रखा है. कई बार तो साफ़ दिख रहा होता है कि यह बच्चा स्वस्थ जीवन नहीं जी पायेगा फिर भी माँ बाप की जिद्द पर उसे इस दुनिया में लाया जाता है और वो बेचारा सारी उम्र नरक भोगता रहता है. दिख रहा होता है कि पैरेंट अभी आर्थिक रूप से खुद का वज़न नहीं झेल सकते, लेकिन उनको बच्चे पैदा करने देते हैं हम. फूटपाथ पर जीवन घसीटने वाले को औलाद पैदा करने देते हैं हम.

    न, न यह सब नही चलेगा आगे. अब डिटेल में सुनिए

    पहली बात. आपने जैसे किसी पशु की नस्ल सुधारनी हो तो बेस्ट मेल फेमेल लिए जाते हैं. उनका संगम होता है और उनके बच्चे होते हैं. सेम हियर. स्वस्थ तीव्र-बुद्धि बच्चे होने चाहियें बस. उसके लिए हरेक को बच्चा पैदा करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती. पेरेंट्स की मेंडिकल कुंडली मिलाई जानी चाहिए, देखना चाहिए कि इनके बच्चे स्वस्थ होंगे भी नहीं। आज काफी-कुछ पता किया जा सकता है। कई मेल-फीमेल के बच्चे कभी स्वस्थ नहीं हो सकते, वो चाहे खुद स्वस्थ हों तब भी, इनसे बच्चे पैदा नहीं होने चाहिए । बहन-भाई और मा-बेटे बाप-बेटी में बच्चे नाजायज क्यों है सारी दुनिया में. चूँकि बच्चे स्वस्थ नहीं होते उनके. ठीक वैसे ही.

    दूसरी बात. जब तक एक लेवल तक कमाने न लगे कोई पेरेंट्स, तब तक उनको बच्चा पैदा करने का हक़ ही नहीं होना चाहिए। कुछ तो निश्चित हो बच्चे का आर्थिक वज़न समाज पर नहीं पड़ेगा।

    तीसरी बात और सबसे खतरनाक बात. वो बा

    • 5 min
    सरकार को सरक सरक सरकाता- सरकारी नौकर

    सरकार को सरक सरक सरकाता- सरकारी नौकर

    ये जो हर ऐरा-गैरा नत्थू-खैरा सरकारी नौकरी पाने को मरा जाता है, वो इसलिए नहीं कि उसे कोई पब्लिक की सेवा करने का कीड़ा काट गया है, वो मात्र इसलिए कि उसे पता है कि सरकारी नौकरी कोई नौकरी नहीं होती बल्कि सरकार का जवाई बनना होता है, जिसकी पब्लिक ने सारी उम्र नौकरी करनी होती है ....

    • 15 min

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