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सुनिए दिन की बड़ी खबर क्विंट हिंदी के Big Story पॉडकास्ट में

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सुनिए दिन की बड़ी खबर क्विंट हिंदी के Big Story पॉडकास्ट में

    सोशल मीडिया कंपनियों के लिए कैसे बन जाते हैं हम एक 'प्रोडक्ट'

    सोशल मीडिया कंपनियों के लिए कैसे बन जाते हैं हम एक 'प्रोडक्ट'

    'द सोशल डिलेमा' डेढ़ घंटे का एक डोक्यू-ड्रामा है जिसे देखते-देखते आपको उन सवालों का भी जवाब मिल सकता है जो आपने कभी शायद पूछे भी न हों या फिर उनके बारे में कभी खयाल तक न आया हो. मसलन फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हम 'फ्री' में अकाउंट बना तो लेते हैं, लेकिन लेकिन हमें ये अंदाजा भी नहीं लगता कि हमारा 'सो-कॉल्ड फ्री अकाउंट' ही वो करेंसी है जिसकी इन कम्पनीज को जरूरत है. और इसी वजह से हम इनके लिए केवल यूजर नहीं बल्कि एक प्रोडक्ट हैं. इस फिल्म में फेसबुक और उबर में काम करने वाला एक पूर्व कर्मचारी भी कहता है कि सोशल मीडिया पर यूजर दरअसल कम्पनीज के लिए 'लैब रैट' होते हैं.

    आखिर ये कैसा एक्सपेरिमेंट चल रहा है जिसका हमें पता नहीं चल पा रहा? आखिर किस तरह हम से ये बात छुपाई जाती है कि हम इस यूनिवर्सल साइबर एक्टिविटी में फ्यूल का काम कर रहे हैं? इसमें कोई एथिक्स हैं भी या नहीं? आखिर इससे कैसे बचें, और हमें कौन बचाएगा? इन में से कुछ सवालों के जवाब जो दिए जा सकते हैं वो आज बिग स्टोरी में समझेंगे ऑल्ट न्यूज़ फैक्ट चेकिंग वेबसाइट के सम्पादक, प्रतीक सिन्हा से. और साथ ही बात करेंगे जसप्रीत बिंद्रा से जो बड़ी कम्पनीज को डिजिटल और टेक्नोलॉजी के मामलों में सलाह देते हैं.

    रिपोर्ट: फ़बेहा सय्यद
    गेस्ट: प्रतीक सिन्हा, फैक्ट चेकिंग वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ के सम्पादक; जसप्रीत बिंद्रा, डिजिटल और टेक्नोलॉजी मामलों के विशेषज्ञ
    इनपुट्स: सायरस जॉन
    असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई
    म्यूजिक: बिग बैंग फज

    • 14 min
    सरकार के 3 अध्यादेशों का विरोध- किसानों का क्या फायदा, क्या नुकसान

    सरकार के 3 अध्यादेशों का विरोध- किसानों का क्या फायदा, क्या नुकसान

    किसानों को लेकर केंद्र सरकार के तीन ऐसे अध्यादेश लाई है, जिनसे देशभर के हजारों किसान गुस्से में हैं. केंद्र के इन कानूनों का विरोध तेज हो चुका है और किसान सड़कों पर उतरने लगे हैं. इस विरोध ने एक बार फिर किसान आंदोलन का रूप ले लिया है. मानसून सत्र शुरू होने से कई हफ्ते पहले केंद्र सरकार की तरफ से कृषि क्षेत्र से जुड़े कुछ अध्यादेश लाए गए. जिन्हें बिल के तौर पर पेश कर इस सत्र में ही पास कराने की योजना है. लेकिन हरियाणा से लेकर पंजाब तक और अन्य राज्यों के किसान इसे किसान विरोधी बता रहे हैं और उग्र प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं.

    किसानों का कहना है कि इस तरह के कानून लाकर सरकार मंडी ख़त्म करना चाहती है, msp और फार्म स्टॉक की लिमिट ख़त्म करना चाहती है ताकि बड़ी कंपनियां एग्रीकल्चर सेक्टर में आ पाएं और किसान से कम दामों में फसल खरीदकर  जितना चाहें उतना अपने पास जमा करें और बाद में अपने हिसाब से महंगा करके बेचें।

    तो आज इन तीन ऑर्डिनन्सेस के बारे में जानेंगे और साथ ही बात करेंगे प्याज के निर्यात पर लगे बैन की. बताएंगे कि कैसे निर्यात पर लगी इस रोक ने प्याज किसानों को सड़क पर लगाकर खड़ा कर दिया है.

    रिपोर्ट: फ़बेहा सय्यद
    गेस्ट: देविंदर शर्मा, कृषि विशेषज्ञ; राकेश टिकैट, भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता; जी. चंद्रशेखर, कृषि एक्सपर्ट
    इनपुट्स: वैभव पालिनिटकर और रौनक कुकड़े
    असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई
    म्यूजिक: बिग बैंग फज

    • 17 min
    कोरोना खतरे के बीच खुलेंगे स्कूल, सुरक्षा और शिक्षा दोनों जरूरी

    कोरोना खतरे के बीच खुलेंगे स्कूल, सुरक्षा और शिक्षा दोनों जरूरी

    लंबे लॉकडाउन के बाद और कोरोना के खतरे के बीच अब पहली बार स्कूल खुलने जा रहे हैं, लेकिन सिर्फ 9वीं से लेकर 12वीं तक के बच्चों के लिए ये विकल्प दिया गया है. इसमें भी अगर बच्चों के पेरेंट्स उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं तो वो अपने बच्चों को घर पर ही रख सकते हैं. कहा गया है कि बच्चे टीचर्स से कंसल्ट करने के लिए स्कूल जा सकते हैं. यानी जिन टॉपिक्स पर डाउट है, उन्हें स्कूल जाकर टीचर से पूछ सकते हैं. लेकिन स्कूल खोले जाने को लेकर स्कूल प्रशासन आखिर किस हद तक तैयार है, खासतौर पर सरकारी स्कूल, जहां पर बच्चों को ज्यादा खतरा हो सकता है. साथ ही ये भी सवाल है कि जब भारत में कोरोना अपने पीक पर है और एक दिन में 90 हजार से भी ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं तो क्या अभी स्कूल खोलना सही है? इसी सब पर आज इस पॉडकास्ट में बात करेंगे.

    रिपोर्ट: फ़बेहा सय्यद
    असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई
    म्यूजिक: बिग बैंग फज

    • 10 min
    यूपी में SSF को खास पावर, क्यों पड़ी स्पेशल फोर्स की जरूरत?

    यूपी में SSF को खास पावर, क्यों पड़ी स्पेशल फोर्स की जरूरत?

    उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक ऐसा नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसे लेकर अब बहस शुरू हो चुकी है. इसके मुताबिक अब यूपी में एक स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स का गठन किया गया है, जिसके पास कुछ स्पेशल पावर होंगी. यानी इस फोर्स को किसी को भी गिरफ्तार करने के लिए वारंट की जरूरत नहीं होगी. साथ ही बिना सर्च वारंट के तलाशी भी ले सकती है. लेकिन अब इसे यूपी में अपराध के कम करने के अलावा सरकार के एक हथियार के तौर पर देखा जा रहा है. लोग इसके गलत इस्तेमाल की भी आशंका जता रहे हैं.

    अब सवाल ये है कि ऐसा क्या हुआ कि UP सरकार को स्पेशल फोर्सेज एक्ट लागू करने की जरूरत पड़ गई? इससे क्या खतरे हो सकते हैं? और विपक्षी नेताओं का इस पर क्या कहना है, इस सब पर ही आज इस पॉडकास्ट में बात करेंगे. पॉडकास्ट में सुनिए लॉयर, रिया घोष को और साथ ही सुनिए समाजवादी के स्पोकेसपर्सन घनश्याम तिवारी को भी.

    रिपोर्ट: फ़बेहा सय्यद
    गेस्ट: वकील रिया घोष और घनश्याम तिवारी, स्पोकेसपर्सन समाजवादी पार्टी
    असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई
    म्यूजिक: बिग बैंग फज

    • 13 min
    दिल्ली हिंसा- आरोपियों के साथ पुलिस की चार्जशीट भी 'कटघरे' में क्यों?

    दिल्ली हिंसा- आरोपियों के साथ पुलिस की चार्जशीट भी 'कटघरे' में क्यों?

    इस साल फरवरी में हुई दिल्ली हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस अब लगातार चार्जशीट दायर कर रही है. पिछले दिनों इन्हीं चार्जशीट को लेकर कई गिरफ्तारियां भी हुईं. लेकिन अब दिल्ली पुलिस की एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट में कुछ ऐसे बड़े नामों का जिक्र किया गया है, जिनमें ज्यादातर एक्टिविस्ट हैं. साथ ही दिल्ली पुलिस ने इसी मामले में JNU के पूर्व छात्र और एक्टिविस्ट उमर खालिद को भी UAPA के तहत गिरफ्तार कर लिया है.

    दिल्ली हिंसा की जांच में सीपीएम नेता सीताराम येचुरी, स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव (https://hindi.thequint.com/news/india/delhi-violence-fir-50-chargesheet-names-yogendra-yadav-jafrabad-speech) , इकनॉमिस्ट जयती घोष समेत कई बड़े नाम हैं. लेकिन पुलिस की इन चार्जशीट्स में कई ऐसी चीजें भी हैं, जो एक दूसरे से मेल नहीं खाती हैं. जिन तारीखों में ट्रंप के दौरे के वक्त दंगे फैलाने की साजिश का जिक्र किया गया है, उन तारीखों तक तो ट्रंप के दौरा का ऐलान भी नहीं हुआ था. इस पूरे मामले पर आज इस पॉडकास्ट में नज़र डालेंगे। साथ ही पॉडकास्ट में सुनिए क्विंट के पोलिटिकल एडिटर, आदित्य मेनन से जो बता रहे हैं कि कैसे दिल्ली हिंसा मामले में पुलिस की जांच और गिरफ्तारियां हमें एल्गार परिषद् मामले (https://hindi.thequint.com/news/india/podcast-how-are-the-raids-at-hany-babus-house-and-bhima-koregaon-related) की याद दिलाता है.

    रिपोर्ट: फ़बेहा सय्यद
    गेस्ट: आदित्य मेनन, पोलिटिकल एडिटर, क्विंट
    वॉइस ओवर: वैभव पालिनिटकर
    असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई
    म्यूजिक: बिग बैंग फज

    • 13 min
    रूस में भारत-चीन के बीच बातचीत के मायने, किसका पलड़ा भारी

    रूस में भारत-चीन के बीच बातचीत के मायने, किसका पलड़ा भारी

    पिछले करीब चार महीने से भारत और चीन के बीच तनाव की खबरें हम सभी सुनते आ रहे हैं. चीन की तरफ से लगातार सीमा पर हो रही घुसपैठ का भारतीय जवान डटकर सामना कर रहे हैं. लेकिन इसी बीच रूस में होने वाली एससीओ बैठक के दौरान पहले भारत चीन के रक्षामंत्रियों और उसके बाद विदेश मंत्रियों की मुलाकात हुई. रूस के मॉस्को में हुई इन मुलाकातों को लेकर अब बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि क्या अब रूस दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करने का काम कर रहा है? क्या वाकई रूस इस स्थिति में है कि वो दोनों देशों के बीच बिगड़ते रिश्तों को सुधार सके? ये समझने के लिए एक लार्जर पिक्चर देखनी होगी, जिस में रूस, चीन और रूस और भारत के बीच के रिश्तों पर एक नज़र डालनी जरूरी है.

    मास्को में हुए 5-पॉइंट के जॉइंट सटटेमनेट का क्या मतलब है? इसे किस तरह समझ सकते हैं? और रूस के सम्बन्ध भारत, और चीन के साथ कैसे रहे हैं? इस के बारे में जानिए जियोपॉलिटिक्स एक्सपर्ट और पूर्व डिप्लोमेट, विष्णु प्रकाश से.

    रिपोर्ट: फ़बेहा सय्यद
    गेस्ट: विष्णु प्रकाश, जियोपॉलिटिक्स एक्सपर्ट और पूर्व डिप्लोमेट
    वॉइस ओवर: वैभव पालिनिटकर
    असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई
    म्यूजिक: बिग बैंग फज 

    • 9 min

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