27 episodes

Padhaku Nitin is a casual and long conversation-based podcast where Aaj Tak Radio host Nitin talks to experts and discuss a wide range of topics like history, war, politics, policy, ideologies, cinema, travelling, sports, nature and everything that is interesting. A single episode of the show can be as enriching as reading four books. As we say in the podcast,Chaar kitaabe padhne jitna gyaan milega Padhaku Nitin mein.

कब कोई हक़ीक़त से मिथक बन जाता है? क्यों कोई कहानी सदियाँ पार करके हमारे सिरहाने आ बैठती है? कुछ नाम तो इंसानों की कलेक्टिव मेमोरी का हमेशा के लिए हिस्सा बन जाते हैं लेकिन पूरी की पूरी सभ्यता चुपचाप कैसे मिट जाती है?

भाषा के ग्रामर से मिले कब, क्यों, कैसे, कहां, किसने ऐसे शब्द हैं जो सेंटेंस में जुड़ जाएँ तो सवाल पैदा करते हैं और सवालों के बारे में आइंस्टीन ने कहा था- The important thing is not to stop questioning. पढ़ाकू नितिन ऐसा ही पॉडकास्ट है जिसमें किसी टॉपिक का रेशा रेशा खुलने तक हम सवाल पूछने से थकते नहीं.

Padhaku Nitin Aaj Tak Radio

    • History
    • 4.9 • 28 Ratings

Padhaku Nitin is a casual and long conversation-based podcast where Aaj Tak Radio host Nitin talks to experts and discuss a wide range of topics like history, war, politics, policy, ideologies, cinema, travelling, sports, nature and everything that is interesting. A single episode of the show can be as enriching as reading four books. As we say in the podcast,Chaar kitaabe padhne jitna gyaan milega Padhaku Nitin mein.

कब कोई हक़ीक़त से मिथक बन जाता है? क्यों कोई कहानी सदियाँ पार करके हमारे सिरहाने आ बैठती है? कुछ नाम तो इंसानों की कलेक्टिव मेमोरी का हमेशा के लिए हिस्सा बन जाते हैं लेकिन पूरी की पूरी सभ्यता चुपचाप कैसे मिट जाती है?

भाषा के ग्रामर से मिले कब, क्यों, कैसे, कहां, किसने ऐसे शब्द हैं जो सेंटेंस में जुड़ जाएँ तो सवाल पैदा करते हैं और सवालों के बारे में आइंस्टीन ने कहा था- The important thing is not to stop questioning. पढ़ाकू नितिन ऐसा ही पॉडकास्ट है जिसमें किसी टॉपिक का रेशा रेशा खुलने तक हम सवाल पूछने से थकते नहीं.

    कश्मीर के झगड़े और नेताजी सुभाषचंद्र बोस पर ऐसे खुलासे आपने सुने नहीं होंगे: पढ़ाकू नितिन, Ep 27

    कश्मीर के झगड़े और नेताजी सुभाषचंद्र बोस पर ऐसे खुलासे आपने सुने नहीं होंगे: पढ़ाकू नितिन, Ep 27

    कश्मीर के झगड़े की वो कहानी सुनिए जो आपने शर्तिया कहीं सुनी नहीं होगी. ये भी जानिए कि सोवियत और ब्रिटेन के झगड़े में अविभाजित भारत के साथ खेल कैसे हो गया. और ये भी कि दूसरे विश्वयुद्ध के बाद नेताजी सुभाष कहां थे. इस बार 'पढ़ाकू नितिन' में नितिन ठाकुर के साथ खुलासों की बैठकी कर रहे हैं “डार्क सीक्रेट्स” के लेखक इक़बाल चंद मल्होत्रा.

    • 1 hr 15 min
    नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी की ज़िंदगी के अनसुने क़िस्से: पढ़ाकू नितिन, Ep 26

    नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी की ज़िंदगी के अनसुने क़िस्से: पढ़ाकू नितिन, Ep 26

    क्या आपको मालूम है नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की पहली लड़ाई जाति के खिलाफ थी? और उस लड़ाई में उन्हें अपना उपनाम छोड़ देना पड़ा. ऐसा बहुत कुछ है जो हम 'बचपन बचाओ आंदोलन' के संस्थापक कैलाश सत्यार्थी के बारे में नहीं जानते. पढ़ाकू नितिन की बैठकी में इस बार शामिल हुए हैं कैलाश जी. पूरा पॉडकास्ट सुनिए क्योंकि यहां उन्होंने बचपन, संघर्ष, कामयाबी, सपनों, मोहब्बत पर हर बात बड़ी बेबाकी से कही है.

    • 1 hr 9 min
    सारे काम पुलिस को सौंपकर सरकारों ने गड़बड़ कर दी?: पढ़ाकू नितिन, Ep 25

    सारे काम पुलिस को सौंपकर सरकारों ने गड़बड़ कर दी?: पढ़ाकू नितिन, Ep 25

    पुलिस वालों पर करप्शन, कस्टडी में हत्या, एनकाउंटर से लेकर जाने कौन कौन से आरोप लगते रहते हैं. फिर भी ना सरकारों का और ना पब्लिक का काम पुलिस के बिना चलता है. इस बार 'पढ़ाकू नितिन' की बैठकी में नितिन ठाकुर के साथ शामिल हुए इंदौर ATS के एसपी रुपेश कुमार द्विवेदी. उनसे सुनिए पुलिस वालों की चुनौतियां और परेशानियां.

    इस Podcast में सुनिए:

    - अंग्रेज़ों के ज़माने से अब तक कितनी बदली पुलिस?

    - पुलिस में सुधार की ज़रूरत है तो सुधारते क्यों नहीं?

    - पुलिस में करप्शन की प्रॉब्लम इतनी तगड़ी क्यों है?

    - पुलिसवालों को मनोवैज्ञानिक ट्रेनिंग देनी चाहिए?

    - पुलिस कस्टडी में मौत के मामले इतने बढ़ क्यों गए? 

    - सारे काम पुलिस को ही सौंपकर सरकार ने गड़बड़ी कर दी है?

    - स्मार्ट शहर और स्मार्ट अपराधी हैं पर पुलिस कब स्मार्ट बनेगी?

    - क्या एनकाउंटर सियासी दबावों के चलते होते हैं?

    - अपराधों की रोकथाम के नाम पर प्राइवेसी उल्लंघन होने लगा है?

    - एक आदर्श पुलिसवाला कैसा होता है?

    • 1 hr 5 min
    Malgudi Days, Byomkesh Bakshi वाला दौर पसंद है तो दूरदर्शन के ये अनसुने क़िस्से ज़रूर सुनिए: पढ़ाकू नितिन, Ep 24

    Malgudi Days, Byomkesh Bakshi वाला दौर पसंद है तो दूरदर्शन के ये अनसुने क़िस्से ज़रूर सुनिए: पढ़ाकू नितिन, Ep 24

    आप अगर उसी जनरेशन के हैं जो नब्बे के दशक में होश संभाल रही थी तो शक्तिमान, ब्योमकेश बख्शी, मालगुडी डेज़ को भूले थोड़े ही होंगे. कभी आपके दिल में सवाल भी उठा होगा कि कौन लोग हैं जो ऐसे दिलकश प्रोग्राम बना रहे हैं. आज पढ़ाकू नितिन की बैठकी में नितिन ठाकुर के साथ हैं प्रो अरूप चटर्जी जिनका नब्बे के दशक की एडवरटाइज़िंग पर ज़बरदस्त शोध है और साथ में राजशेखर व्यास जिन्होंने चालीस साल तक दूरदर्शन की यात्रा को ना सिर्फ जिया बल्कि उसे दिशा दी. तो आज की मज़ेदार बैठकी में ऐसे अनसुने क़िस्सों का आनंद लीजिए जो आपको उसी दौर में ले जाएंगे.

    इस पॉडकास्ट में सुनिए:

    - दूरदर्शन के यादगार सीरियल्स के पीछे की कहानियां
    - डीडी मेट्रो ने कैसे डीडी वन को टक्कर दी?
    - कैसे बनाया जाता था सनडे को स्पेशल?
    - सरकारी कैद से बाहर कैसे निकला था दूरदर्शन?
    - जब टीवी शो पर सवालों से हो जाती थी मंत्रियों की छुट्टी
    - राजीव गांधी ने क्यों दी थी दूरदर्शन को छूट?
    - सुषमा स्वराज ने दूरदर्शन को क्या दिया?
    - क्यों नहीं लौट पा रहा दूरदर्शन का पुराना दौर?

    • 1 hr 43 min
    जन्म से मिले जेंडर के साथ मिसफिट महसूस हो तो क्या करें?: पढ़ाकू नितिन, Ep 23

    जन्म से मिले जेंडर के साथ मिसफिट महसूस हो तो क्या करें?: पढ़ाकू नितिन, Ep 23

    गे-लेस्बियन्स के बारे में क्या जानते हैं आप? किसी ट्रांसजेंडर्स से कभी कोई बात की है? कभी कोई किन्नर दोस्त बना है आपका? अगर सभी बातों का जवाब निगेटिव है तो ये ‘पढ़ाकू नितिन’ पॉडकास्ट आपके लिए ही है. LGBTQ समुदाय हमेशा से हमारे आसपास रहा है लेकिन हम अजीब ढंग से अनजान बने रहते हैं. वजह है संकोच, पूर्वाग्रह, डर या उपेक्षा का भाव. इस बार नितिन ठाकुर की बैठकी ट्रांसजेंडर फीमेल रुद्राणी छेत्री के साथ जमी. रुद्राणी के खाते में संघर्ष से लेकर उपलब्धियों तक बहुत कुछ है. फिल्में, मॉडलिंग एजेंसी और मित्र ट्रस्ट उनमें से कुछ हैं. इस पॉडकास्ट में उनसे LGBTQ कम्युनिटी के बारे में ढेरों ढेर बातें हुई हैं और उन्होंने ये भी बताया कि कब उन्हें लगा कि अब लुकछिप कर काम नहीं चलेगा, बल्कि आगे बढ़कर कुछ करना होगा.

    इस पॉडकास्ट में सुनिए:

    - इतिहास में मज़बूत दिखनेवाले किन्नर मुख्यधारा से दूर कब हो गए?
    - LGBTQI शब्द का मतलब क्या होता है?
    - LGBTQ को लेकर समाज समझदार क्यों नहीं हुआ?
    - किसी ट्रांसजेंडर के संघर्ष में क्या- क्या शामिल है?
    - ‘थर्ड जेंडर’ शब्द खुद में क्यों पिछड़ा है?
    - क्या आरक्षण से ट्रांसजेंडर्स को हक मिलेंगे?
    - LGBTQ के लिए कितना हुआ, कितना बाकी है?
    - जन्म से मिले जेंडर के साथ मिसफिट महसूस हो तो क्या करें?
    - LGBTQ के लिए आप क्या कर सकते हैं?
    - जिन्हें लगता है ये बीमारी है उनके लिए क्या जवाब है?

    • 58 min
    किताबों के सैकड़ों पन्नों से अपने काम की चीज़ कैसे निकाली जाए? : पढ़ाकू नितिन, Ep 22

    किताबों के सैकड़ों पन्नों से अपने काम की चीज़ कैसे निकाली जाए? : पढ़ाकू नितिन, Ep 22

    किताबें तो करोड़ों हैं लेकिन पढ़ने के लिए चुनी कौन सी जाए? कब कौन सी पढ़नी चाहिए? ढेर में अपने लिए कौन सी बेस्ट रहेगी? किताबों के रसिया लोग इन सवालों से भले न जूझते हों मगर बहुतों के मन में ऊहापोह बनी रहती है. फिर वो जहां-तहां सजेशन और रिकमेंडेशन खोजते हैं. आज के पढ़ाकू नितिन की बैठकी में लेखक, घुमक्कड़, कलाकार, पढ़ाकू जे सुशील अमेरिका से जुड़े हैं. फिलहाल तो साहित्य में पीएचडी भी कर रहे हैं. नितिन ठाकुर के साथ जमी इस बैठकी में उन्होंने देसी से लेकर विदेशी किताबों पर जो रंग जमाया है वो सुनकर आनंद लीजिए.

    • 1 hr 54 min

Customer Reviews

4.9 out of 5
28 Ratings

28 Ratings

anujthakur21 ,

Excellent podcast by Nitin Thakur

Great narration

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