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कुछ बातें अपनी कुछ तुम्हारी... चलो आओ कुछ किस्से बुन ले

Na Kahani na kavita Vedant Patil

    • Fictie

कुछ बातें अपनी कुछ तुम्हारी... चलो आओ कुछ किस्से बुन ले

    Sannata Poem by Bhavani Prasad Mishra (Recited by Ved)

    Sannata Poem by Bhavani Prasad Mishra (Recited by Ved)

    One of my all-time favourite poems. Stay tuned to listen to more such poems. 

    • 4 min.
    Tum Aawaz Ho by Ved

    Tum Aawaz Ho by Ved

    ये लिखते लिखते कुछ बातें थी जेहन में और उनमें से सबसे ज्यादा जो बात मेरे दिमाग में घर कर गई, वो थी इंतज़ार। इसी के आसपास कुछ लिखा है, उन सब के लिए जो प्रेम कहानियों से परे है। वो रिश्ते जो आज भी इस आस में है कि तुम लौट आओगे किसी दिन, आँगन, कमरे, दरवाज़े सब तुम्हारा इंतज़ार कर रहे है।  तुम आवज़ हो लौट आओ   -वेद

    • 1 min.
    ये तस्वीर कितनी पुरानी है? || Ye Tasveer Kitni Purani Hai (Recited By Ved)

    ये तस्वीर कितनी पुरानी है? || Ye Tasveer Kitni Purani Hai (Recited By Ved)

    Somewhere between poetry and story.  Written and performed by:- Vedant Patil

    • 1 min.
    कुछ और बहुत कुछ के बीच (Recited By Ved)

    कुछ और बहुत कुछ के बीच (Recited By Ved)

    Just one more addition. 

    • 2 min.
    दो कप चाय -१

    दो कप चाय -१

    किस्से, चाय और तुम

    • 2 min.

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