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Research and Analysis of the day's top stories with Ravish Kumar.

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Research and Analysis of the day's top stories with Ravish Kumar.

    रवीश कुमार का प्राइम टाइम : आर्यन खान की जमानत और कानून के सवाल

    रवीश कुमार का प्राइम टाइम : आर्यन खान की जमानत और कानून के सवाल

    बीस हजार करोड़ का 3000 किलोग्राम ड्रग्स पकड़ा गया उसे लेकर कितना कम कवरेज हुआ, छह ग्राम चरस पकड़ा गया उसे लेकर जो कवरेज हो रहा है, पता चलता है कि बीस हजार करोड़ से ज्यादा शाहरुख खान की कितनी वैल्यू है और उस जनता की कितनी कम वैल्यू हो गई है जो आराम से 117 रुपया पेट्रोल भरा रही है, जो कभी 65 रुपया लीटर होने पर आंदोलन करती थी.

    • 22 min
    रवीश कुमार का प्राइम टाइम : प्रदर्शनों को कुचलने की दुनिया भर में तैयारी

    रवीश कुमार का प्राइम टाइम : प्रदर्शनों को कुचलने की दुनिया भर में तैयारी

    जनता कहां प्रदर्शन करेगी, क्या उस शहर में प्रदर्शन नहीं होगा जहां कोई मैदान या बड़ा पार्क नहीं होगा और होगा तो सरकार नहीं देगी. भारत में प्रदर्शन शुरू नहीं होता कि बंद कराने की बात होने लगती है. अब अमेरिका में भी प्रदर्शन करने के अधिकारों के खिलाफ कानून बनने लगे हैं.

    • 22 min
    रवीश कुमार का प्राइम टाइम : किसान आंदोलन -कोर्ट में सुनवाई, सरकार कहां गई?

    रवीश कुमार का प्राइम टाइम : किसान आंदोलन -कोर्ट में सुनवाई, सरकार कहां गई?

    जिस देश में आजादी की लड़ाई का आंदोलन 1857 से 1947 तक अलग-अलग रूप में चला हो, उस देश के सुप्रीम कोर्ट में शाहीन बाग धरने के बाद किसानों के धरने को लेकर चल रही बहस में अजीब-अजीब किस्म के सवाल उठ रहे हैं, कि आंदोलन कब तक चलेगा? क्यों चल रहा है?

    • 22 min
    रवीश कुमार का प्राइम टाइम : क्या कोई जानता है कश्मीर में क्या हो रहा है?

    रवीश कुमार का प्राइम टाइम : क्या कोई जानता है कश्मीर में क्या हो रहा है?

    जम्मू कश्मीर में क्या हो रहा है, यह जानना होगा तो आप किसी न किसी से पूछेंगे. सेना और पुलिस के बयान से किसी घटना की जानकारी मिलती है लेकिन राजनीतिक तौर पर कश्मीर के भीतर क्या हो रहा है इसकी आवाज़ तो उन्हीं से आएगी जिनकी जवाबदेही है. इतना कुछ हो रहा है फिर भी कश्मीर पर कोई विस्तृत प्रेस कांफ्रेंस नहीं है. इसके अलावा बाकी के पारंपरिक रास्ते या तो बंद हो चुके हैं या कमज़ोर कर दिए गए हैं जैसे राजनीतिक दल, नागरिक संगठन, NGO और मीडिया. 5 अगस्त 2019 को धारा 370 की समाप्ति के बाद इन सभी की हालत पर आप ग़ौर कर लेंगे तो पता चलेगा कि कश्मीर पर जानने के लिए आपके पास गोदी मीडिया ही है जो कि ख़ुद नहीं जानता कि वहां क्या हो रहा है. धारा 370 की समाप्ति के दो साल से भी अधिक समय हो चुके हैं, न तो राज्य की बहाली हुई है और न ही राजनीतिक प्रक्रिया को लेकर ठोस पहल.

    • 25 min
    रवीश कुमार का प्राइम टाइम : पेट्रोल की मार के मुद्दे को उचित स्थान कब देगी सरकार

    रवीश कुमार का प्राइम टाइम : पेट्रोल की मार के मुद्दे को उचित स्थान कब देगी सरकार

    बहुत जरूरी है कि हम उस उचित स्थान को तय कर दें जिसके न मिलने पर आए दिन राजनीति होती है. तय किया जाना चाहिए कि उचित स्थान का क्या मतलब है और ये कहां पर होता है. इतिहास के जिस मुद्दे को इतिहास की कक्षा में उचित स्थान मिलना चाहिए उसे लेकर टीवी पर चर्चा है और वर्तमान के जिस मुद्दे को मीडिया में उचित स्थान मिलना चाहिए उसके लिए कोई स्थान नहीं है. आम लोगों के लिए पेट्रोल और डीजल के दाम उनकी चिन्ता रेखाओं में पहली हेडलाइन की तरह मौजूद है लेकिन अखबारों और चैनलों के समाचारों में पेट्रोल और डीजल के दाम संक्षिप्त खबरों के कॉलम और स्पीड न्यूज के हवाले कर दिए गए हैं.

    • 23 min
    प्राइम टाइमः सिंघु बॉर्डर पर हत्या का असर किसान आंदोलन पर पड़ेगा?

    प्राइम टाइमः सिंघु बॉर्डर पर हत्या का असर किसान आंदोलन पर पड़ेगा?

    हरियाणा दिल्‍ली सीमा, सिंघु बॉर्डर पर किसानों के प्रदर्शन स्‍थल पर एक शख्‍स की निर्ममता से हत्‍या के मामले के आरोपी निहंगों के दल के एक सदस्‍य ने समर्पण कर दिया है. प्रदर्शन स्‍थल पर शुक्रवार सुबह एक शख्‍स का शव पाया गया था जिसकी कलाई और पैर को निर्ममता से काट दिया गया था. अब सवाल यह उठता है कि क्या इसका असर किसान आंदोलन पर पड़ेगा?

    • 20 min

Customer Reviews

4.7 out of 5
30 Ratings

30 Ratings

Telugu_Abbai ,

Ravish is a gift

Do yourself a favor and start following reportage and analysis by Ravish Kumar. And you’ll be better for it.

Othenon ,

Stop with the shouting matches

I am looking to get news of Covid and some on the ground reports that was the hallmark of this podcast in the past.

More than half of each of the recent episodes is a shouting match between the host and some one from the central government. Totally uninformative and doesn’t serve the public one bit.

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