Sambandh Ka Ke Ki

Himanshu Bhagat

A conversation on books, conducted in Hindi.

  1. एपिसोड 48: 'हिंदी हार्टलैंड − अ स्टडी' − ग़ज़ाला वहाब

    May 20

    एपिसोड 48: 'हिंदी हार्टलैंड − अ स्टडी' − ग़ज़ाला वहाब

    उत्तर और मध्य भारत के एक बड़े हिस्से को अंग्रेज़ी में 'हिंदी हार्टलैंड' कहते हैं। यहाँ के अधिकांश वासी हिंदी बोलते हैं और भारत की संस्कृति, इतिहास और राजनीति में इस क्षेत्र का भारी प्रभाव रहा है। आज़ाद भारत के सात राज्य हिंदी पट्टी में स्थित हैं − उत्तर-प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, और राजस्थान। इन राज्यों में गरीबी, पिछड़ापन, और बहुसंख्यक-धार्मिक-कट्टरता सबसे चरम पर है। अपनी किताब 'हिंदी हार्टलैंड − अ स्टडी' में ग़ज़ाला वहाब ने इन विषयों पर विस्तार से चर्चा की है। उन्होंने दिल्ली सल्तनत, मुग़ल साम्राज्य, अंग्रेजी शासन, आज़ादी की लड़ाई, और आज़ाद भारत में इस क्षेत्र के राजनितिक इतिहास के साथ अन्य कई विषयों का आख्यान व विश्लेषण दिया है। सुनिए किताब पर एक चर्चा, ग़ज़ाला वहाब के साथ। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) इंस्टाग्राम पर ग़ज़ाला वहाब एक्स (ट्विटर) पर ग़ज़ाला वहाब लिंक्ड इन पर ग़ज़ाला वहाब  'हिंदी हार्टलैंड − अ स्टडी' अमेज़न परग़ज़ाला वहाब की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर  एपिसोड 8: 'द ब्रोकन स्क्रिप्ट' – स्वप्ना लिडल (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

    1h 24m
  2. एपिसोड 47: 'गांधी − द एन्ड ऑफ़ नॉन-वायलेंस' − मानष फ़िराक़ भट्टाचार्जी

    Apr 26

    एपिसोड 47: 'गांधी − द एन्ड ऑफ़ नॉन-वायलेंस' − मानष फ़िराक़ भट्टाचार्जी

    भारत के आज़ादी के दो साल पहले से ही देश के बँटवारे की सम्भावना बढ़ने लगी और सांप्रदायिक तनाव फैलने लगा। अगस्त १९४६ से देश में हिन्दू-मुस्लिम दंगे छिड़ गए। महात्मा गांधी बंगाल (कलकत्ता व नोआखाली), बिहार, और दिल्ली जा के शांति के लिए सत्याग्रह करने लगे। अपने जीवन के आखिरी पंद्रह महीनों में गांधी शांति का सन्देश ले के पैदल गाँव-गाँव गए। मानष फ़िराक़ भट्टाचार्जी की किताब, 'गांधी − द एन्ड ऑफ़ नॉन-वायलेंस' उनके जीवन के इस दौर का एक गहरा अध्यन है। किताब में गांधी की यात्रा-कार्यक्रम, दिनचर्या, राजनैतिक गतिविधियों, उनके करीबी सहयोगियों, और उनके विवादित यौन-प्रयोग के अलावा, उनकी विडम्बनाओं, दर्द और बेबसी का विवरण है। और इसके साथ है, जन-संहार के सन्दर्भ में अहिंसा, सत्याग्रह, शांति, क्षमा, सर्व-धर्म-संभव जैसे गांधीवादी मूल्यों की जाँच। सुनिए किताब पर एक चर्चा मानष के साथ। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) इंस्टाग्राम पर मानष फ़िराक़ भट्टाचार्जी एक्स (ट्विटर) पर मानष फ़िराक़ भट्टाचार्जी फेसबुक पर मानष फ़िराक़ भट्टाचार्जी 'गांधी− द एन्ड ऑफ़ नॉन-वायलेंस' अमेज़न पर (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

    1h 6m
  3. एपिसोड 46: 'उमर ख़ालिद एंड हिज़ वर्ल्ड' − शुद्धब्रता सेनगुप्ता

    Mar 23

    एपिसोड 46: 'उमर ख़ालिद एंड हिज़ वर्ल्ड' − शुद्धब्रता सेनगुप्ता

    जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र उमर ख़ालिद को साल २०१६ में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। आने वाले सालों में, उमर बहुसंख्यकवादी हिंदुत्व, बेलगाम पूंजीवाद, और सत्तारूढ़ ताक़तों के निर्भीक और बेबाक आलोचक के रूप में उभरे। सी.ए.ए.−एन.आर.सी. क़ानून-विरोधी शाहहीन बाघ आंदोलन का उमर ने खुलकर समर्थन किया। सितम्बर २०२० में आतंक-विरोधी यू.ए.पी.ए. क़ानून के तहत, २०२० के दिल्ली दंगो को भड़काने की साज़िश रचने के लिए उमर को गिरफ्तार कर लिया गया। आज तक इस केस पर मुक़दमा शुरू नहीं हुआ है और पिछले साढ़े-पाँच साल से उमर जेल में बंद हैं। सुनिए 'उमर ख़ालिद एंड हिज़ वर्ल्ड' यानी 'उमर ख़ालिद और उसकी दुनिया' किताब के संपादक और उमर के मित्र, शुद्धब्रता सेनगुप्ता, के साथ किताब पर एक चर्चा। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) इंस्टाग्राम पर शुद्धब्रता सेनगुप्ताफेसबुक पर शुद्धब्रता सेनगुप्ता'उमर ख़ालिद एंड हिज़ वर्ल्ड' अमेज़न पर (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

    1h 35m
  4. एपिसोड 45: 'द आइडेंटिटी प्रोजेक्ट − द अनमेकिंग ऑफ़ अ डेमोक्रेसी' − राहुल भाटिया

    Mar 5

    एपिसोड 45: 'द आइडेंटिटी प्रोजेक्ट − द अनमेकिंग ऑफ़ अ डेमोक्रेसी' − राहुल भाटिया

    वर्ष २०१३-१४ में पत्रकार राहुल भाटिया ने पाया कि उनके प्रियजन बदल गए हैं। उनकी सोच, उनकी भाषा में बदलाव आ गया है − समाज में एक धर्मविशेष लोगों के प्रति। यह देख के राहुल कुछ हतप्रभ, कुछ परेशान हुए, और इसी परेशानी से उबरने के लिए उन्होंने लिखा है, 'द आइडेंटिटी प्रोजेक्ट'। इस किताब का पहला भाग हिंदुत्व और हिन्दू राष्ट्रवाद का अध्यन है − आज के भारत में उनके दुष्प्रभाव का, उनके जड़ों, और उनके उद्भव का। किताब का दूसरा भाग भी एक अध्यन है − आधार या 'युनीक आइडेंटिटी प्रोजेक्ट' का। कैसे एक केंद्रीय गृह मंत्री के मन में आया विचार, प्रशासकों, विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, व वकीलों के गंभीर आपत्तियों के बावजूद, हक़ीक़त बन गया। कौन से कड़ी इन दोनों भागों को जोड़ती है, सुनिए राहुल के साथ इस चर्चा में। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) 'द आइडेंटिटी प्रोजेक्ट' अमेज़न पर एपिसोड 44: 'गोलवलकर' − धीरेन्द्र झा(सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

    1h 4m
  5. एपिसोड 44: 'गोलवलकर' − धीरेन्द्र झा

    Jan 20

    एपिसोड 44: 'गोलवलकर' − धीरेन्द्र झा

    भारत को आज़ादी मिलने के तीन हफ्ते बाद, ४ सितम्बर १९४७ को, दिल्ली में दंगे शुरू हो गए। शहर के करोल बाग़ इलाके में एक हाई-स्कूल में छात्र परीक्षा दे रहे थे। इसी समय स्कूल में एक भीड़ घुस गई और उसने परीक्षा देते हुए मुसलमान छात्रों का क़त्ल कर दिया। तीन दिनों में दिल्ली के ८,००० से १०,००० मुसलमान निवासी मारे गए। इसके एक महीने बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर ने शहर के तीन इलाकों के हिन्दुओं को विशेष मुबारकबाद दी − करोल बाग़, सब्ज़ीमंडी, और पहाड़गंज। ये वही इलाके थे जहाँ मुसलामानों को सबसे ज़्यादा क्षति पहुँची थी। सुनिए एक चर्चा गोलवलकर की जीवनी के लेखक धीरेन्द्र झा के साथ, उनकी किताब पर। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) 'गोलवलकर' अमेज़न पर⁠धीरेन्द्र झा की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर  (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

    1h 33m
  6. एपिसोड 43: 'पुलिसिंग एंड वायलेंस इन इंडिया' − जिनी लोकनीता व डीना हीथ

    12/24/2025

    एपिसोड 43: 'पुलिसिंग एंड वायलेंस इन इंडिया' − जिनी लोकनीता व डीना हीथ

    जब अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड नाम के एक निहत्थे अश्वेत व्यक्ति की एक गोरे पुलिसकर्मी ने हत्या कर दी तब इस निर्मम हत्या के विरोध में हज़ारों अमेरिकी नागरिक सड़क पर उतर आये। देखते-देखते 'ब्लैक लाइव्स मैटर' के नाम से ये विरोध पुरे विश्व में फ़ैल गया। वहीं भारतीय पुलिस द्वारा हिंसा का प्रयोग और संदिग्ध अपराधियों को यातना देना, उनकी हत्या कर देना आम है। मगर इस हकीक़त से यहाँ की आवाम को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है। क्या कारण है भारत में व्यापक पुलिस हिंसा का? क्या हल है इसका? ‘पुलिसिंग एंड वायलेंस इन इंडिया’ में विशेषज्ञ अपने लेखों में पुलिसी हिंसा के अलग-अलग पहलुओं पर प्रकाश डालते हैं। किताब का संपादन किया है जिनी लोकनिता और डीना हीथ ने। सुनिए किताब पर एक चर्चा, डॉ जिनी लोकनीता के साथ। इंस्टाग्राम पर जिनी लोकनिताएक्स (ट्विटर) पर जिनी लोकनिता ‘पुलिसिंग एंड वायलेंस इन इंडिया’ अमेज़न पर अब्दुल वाहिद शेख की 'बेगुनाह क़ैदी' अमेज़न पर ('सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

    1h 11m
  7. एपिसोड 42: 'एवरीडे रीडिंग' − आकृति मंधवानी

    12/05/2025

    एपिसोड 42: 'एवरीडे रीडिंग' − आकृति मंधवानी

    आज़ादी के ठीक बाद, १९५० व १९६० के दशक में छपने वाली लोकप्रिय हिंदी पत्रिकाओं में से दो थीं -- 'सरिता' और 'धर्मयुग'। क्या था रिश्ता और क्या असर रहा इन पत्रिकाओं का -- और साथ-साथ, हिन्द पॉकेट बुक्स की बहुत किफायती दरों वाली किताबों का -- अपने उत्तर-भारतिय हिंदी-भाषी मध्यम-वर्गिय पाठकों पर, इसका आकलन और विश्लेषण आपको मिलेगा डॉ आकृति मंधवानी की किताब 'एवरीडे रीडिंग' में। और साथ ही साथ मिलेगा, परेश नाथ, दिना नाथ मल्होत्रा, और धर्मवीर भारती जैसे दिग्गज प्रकाशक और संपादक के हिंदी भाषा के प्रसार और विकास में योगदान की कहानी। सुनिए डॉ मंधवानी के साथ एक चर्चा उनकी रोचक किताब 'एवरीडे रीडिंग' पर। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) इंस्टाग्राम पर आकृति मंधवानी एक्स (ट्विटर) पर आकृति मंधवानी 'एवरीडे रीडिंग' अमेज़न पर ('सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

    1h 8m
  8. एपिसोड 41: 'आदिवासी ऑर वनवासी' − कमल नयन चौबे

    11/20/2025

    एपिसोड 41: 'आदिवासी ऑर वनवासी' − कमल नयन चौबे

    ईसाई मिशनरियों द्वारा भारत के आदिवासियों के बीच ईसाई धर्म के प्रसार को रोकने के लिये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने १९५२ में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण की स्थापना की। वनवासी कल्याण आश्रम ने आदिवासियों के बीच हिन्दू धर्म व संस्कृति के प्रचार और समाज सेवा के राह को अपनाया। समय के साथ, वनवासी कल्याण आश्रम ने सत्तारूढ़ ताकतों द्वारा आदिवसीययों के शोषण के खिलाफ भी आवाज़ उठाई। मगर जैसा डॉ कमल नयन चौबे अपनी किताब 'आदिवासी ऑर वनवासी' में दिखलाते हैं, वनवासी कल्याण आश्रम ने कभी भी खुलकर आदिवासियों के हक़ की लड़ाई का समर्थन नहीं किया और न ही इस संघर्ष में उनका साथ दिया। सुनिए किताब पर एक चर्चा डॉ चौबे के साथ। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) फेसबुक पर डॉ कमल नयन चौबे  'परख विथ कमल नयन चौबे' – ‘यु ट्युब’ चैनल'आदिवासी ऑर वनवासी' अमेज़न पर डॉ चौबे की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर  (सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

    1h 11m

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