Shiv Puran Katha in Hindi

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शिव पुराण सभी पुराणों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण व सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली पुराणों में से एक है। भगवान शिव के विविध रूपों, अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का विशद् वर्णन किया गया है।इसमें शिव के कल्याणकारी स्वरूप का तात्त्विक विवेचन, रहस्य, महिमा और उपासना का विस्तृत वर्णन है। शिव पुराण में शिव को पंचदेवों में प्रधान अनादि सिद्ध परमेश्वर के रूप में स्वीकार किया गया है। शिव-महिमा, लीला-कथाओं के अतिरिक्त इसमें पूजा-पद्धति, अनेक ज्ञानप्रद आख्यान और शिक्षाप्रद कथाओं का सुन्दर संयोजन है। इसमें भगवान शिव के भव्यतम व्यक्तित्व का गुणगान किया गया है। शिव- जो स्वयंभू हैं, शाश्वत हैं,

  1. पार्वती जी का क्रोध और शिव का प्रकट होना | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 27

    13H AGO

    पार्वती जी का क्रोध और शिव का प्रकट होना | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 27

    शिव पुराण के सत्ताईसवें अध्याय में देवी पार्वती के अद्भुत धैर्य, भक्ति और भगवान शिव के प्रति अटूट प्रेम का वर्णन मिलता है। इस अध्याय में पार्वती जी एक ब्राह्मण के रूप में आए भगवान शिव की परीक्षा के दौरान उनके अपमान को सहन नहीं करतीं और क्रोध में उन्हें फटकारती हैं। इसी क्षण भगवान शिव अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट होते हैं और पार्वती जी की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी पत्नी स्वीकार करने का वचन देते हैं। यह अध्याय हमें सिखाता है: सच्ची भक्ति क्या होती हैभगवान की परीक्षा और भक्त की दृढ़ताशिव-पार्वती मिलन का दिव्य रहस्य📖 इस वीडियो में आपको मिलेगा:✔️ पूरा अध्याय सरल हिंदी में✔️ गहरा आध्यात्मिक अर्थ✔️ भक्ति और धैर्य का संदेश 🙏 वीडियो पसंद आए तो LIKE, SHARE और SUBSCRIBE जरूर करें।

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  2. शिवजी ने ली पार्वती की तपस्या की परीक्षा | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 25

    MAR 30

    शिवजी ने ली पार्वती की तपस्या की परीक्षा | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 25

    शिव पुराण के पच्चीसवें अध्याय में भगवान शिव स्वयं ब्राह्मण रूप धारण कर देवी पार्वती की कठोर तपस्या की परीक्षा लेने आते हैं। पार्वती जी अपने पूर्व जन्म (सती) का स्मरण करती हैं और बताती हैं कि वे केवल भगवान शिव को ही पति रूप में प्राप्त करना चाहती हैं। तीन हजार वर्षों की कठोर तपस्या के बाद भी जब शिवजी प्रकट नहीं होते, तो पार्वती अग्नि में प्रवेश करने का निश्चय करती हैं। किंतु उनकी तपस्या की शक्ति से अग्नि भी ठंडी हो जाती है। तब शिवजी उनकी निष्ठा और दृढ़ संकल्प की परीक्षा लेते हैं। यह अध्याय भक्ति, धैर्य, तपस्या और अटूट प्रेम का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। 📌 इस वीडियो में जानिए: शिवजी ने ब्राह्मण रूप क्यों धारण किया? पार्वती ने अग्नि में प्रवेश क्यों किया? तपस्या की सच्ची परीक्षा क्या होती है? शिव-पार्वती मिलन का आध्यात्मिक महत्व 🙏 यदि आपको शिव पुराण की यह कथा पसंद आए तो वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करें।

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  3. देवताओं का शिवजी के पास जाना | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 22

    MAR 9

    देवताओं का शिवजी के पास जाना | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 22

    शिव पुराण के बाईसवें अध्याय में देवताओं पर आए संकट का वर्णन मिलता है। तारकासुर के अत्याचार से परेशान होकर सभी देवता भगवान शिव की शरण में जाते हैं। भगवान विष्णु, ब्रह्मा और अन्य देवताओं के साथ मिलकर शिवजी से प्रार्थना की जाती है कि वे पार्वती जी से विवाह करें ताकि उनके पुत्र द्वारा तारकासुर का वध हो सके। यह अध्याय भक्ति, श्रद्धा और ईश्वर की शरणागति का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है। 📌 इस वीडियो में जानिए: तारकासुर कौन था? देवता क्यों भयभीत हुए? शिवजी ने क्या उत्तर दिया? शिव विवाह का रहस्य क्या है? 🙏 वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करें।

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  4. पार्वती की तपस्या - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 21

    MAR 1

    पार्वती की तपस्या - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 21

    शिव पुराण का इक्कीसवां अध्याय देवी पार्वती की अद्भुत, कठोर और अलौकिक तपस्या का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत करता है। भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के संकल्प के साथ पार्वती सांसारिक सुखों का त्याग कर गंगोत्री तीर्थ में घोर तपस्या आरंभ करती हैं। वे पंचाक्षर मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का निरंतर जप करती हैं। फलाहार से प्रारंभ होकर पत्तों के त्याग और अंततः निराहार साधना तक उनकी तपस्या बढ़ती जाती है। भोजन त्याग देने के कारण देवताओं द्वारा उन्हें ‘अपर्णा’ नाम दिया जाता है। तीन हजार वर्षों तक की गई यह तपस्या न केवल ऋषि-मुनियों के लिए आश्चर्यजनक थी, बल्कि संपूर्ण प्रकृति को भी पवित्र और दिव्य बना देती है। यह अध्याय भक्ति, संयम, धैर्य और शिव-प्राप्ति के लिए आत्मसमर्पण का दिव्य संदेश देता है।

    6 min
  5. शिवजी के वियोग में पार्वती का शोक और तपस्या का आरंभ - शिव पुराण | श्रीरुद्र संहिता -अध्याय 20

    FEB 22

    शिवजी के वियोग में पार्वती का शोक और तपस्या का आरंभ - शिव पुराण | श्रीरुद्र संहिता -अध्याय 20

    शिव पुराण का बीसवां अध्याय देवी पार्वती के गहन शोक, विरह और आत्मचिंतन का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन प्रस्तुत करता है। कामदेव के भस्म होने के बाद पार्वती का हृदय शिव-वियोग से व्याकुल हो उठता है। यह अध्याय बताता है कि किस प्रकार देवी पार्वती सांसारिक सुखों से विरक्त होकर भगवान शिव को पुनः प्राप्त करने हेतु कठोर तपस्या का संकल्प लेती हैं।इस अध्याय में भक्ति, वैराग्य, आत्मसंयम और तप की महिमा का विस्तार से वर्णन है, जो साधकों को यह सिखाता है कि अहंकार के त्याग और शुद्ध भक्ति से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है। बीसवां अध्याय शिव-भक्तों के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन और प्रेरणा का स्रोत है।

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शिव पुराण सभी पुराणों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण व सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली पुराणों में से एक है। भगवान शिव के विविध रूपों, अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का विशद् वर्णन किया गया है।इसमें शिव के कल्याणकारी स्वरूप का तात्त्विक विवेचन, रहस्य, महिमा और उपासना का विस्तृत वर्णन है। शिव पुराण में शिव को पंचदेवों में प्रधान अनादि सिद्ध परमेश्वर के रूप में स्वीकार किया गया है। शिव-महिमा, लीला-कथाओं के अतिरिक्त इसमें पूजा-पद्धति, अनेक ज्ञानप्रद आख्यान और शिक्षाप्रद कथाओं का सुन्दर संयोजन है। इसमें भगवान शिव के भव्यतम व्यक्तित्व का गुणगान किया गया है। शिव- जो स्वयंभू हैं, शाश्वत हैं,

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