Pratidin Ek Kavita

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कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

  1. Pani Aur Dhoop | Subhadra Kumari Chauhan

    1D AGO

    Pani Aur Dhoop | Subhadra Kumari Chauhan

    पानी और धूप । सुभद्राकुमारी चौहान अभी अभी थी धूप, बरसने लगा कहाँ से यह पानी किसने फोड़ घड़े बादल के की है इतनी शैतानी। सूरज ने क्‍यों बंद कर लिया अपने घर का दरवाजा़ उसकी माँ ने भी क्‍या उसको बुला लिया कहकर आजा। ज़ोर-ज़ोर से गरज रहे हैं बादल हैं किसके काका किसको डाँट रहे हैं, किसने कहना नहीं सुना माँ का। बिजली के आँगन में अम्‍माँ चलती है कितनी तलवार कैसी चमक रही है फिर भी क्‍यों खाली जाते हैं वार। क्‍या अब तक तलवार चलाना माँ वे सीख नहीं पाए इसीलिए क्‍या आज सीखने आसमान पर हैं आए। एक बार भी माँ यदि मुझको बिजली के घर जाने दो उसके बच्‍चों को तलवार चलाना सिखला आने दो। खुश होकर तब बिजली देगी मुझे चमकती सी तलवार तब माँ कर न कोई सकेगा अपने ऊपर अत्‍याचार। पुलिसमैन अपने काका को फिर न पकड़ने आएँगे देखेंगे तलवार दूर से ही वे सब डर जाएँगे। अगर चाहती हो माँ काका जाएँ अब न जेलखाना तो फिर बिजली के घर मुझको तुम जल्‍दी से पहुँचाना। काका जेल न जाएँगे अब तूझे मँगा दूँगी तलवार पर बिजली के घर जाने का अब मत करना कभी विचार।

    3 min
  2. Jisko Bachpan Me Dekha | Madhav Kaushik

    3D AGO

    Jisko Bachpan Me Dekha | Madhav Kaushik

    जिसको बचपन में देखा । माधव कौशिक जिसको बचपन में देखा वो पनघट पोखर ढूंढूंगा। अगली बार गाँव में जाकर फिर अपना घर ढूंढूंगा। ऐसा लगता है टाँगे ही टाँगे हैं अब लोगों की, मुझको मौका मिला तो सबके कटे हुए सर ढूंढूंगा। शहरों की शैतानी आँतें लीले गईं हर चीज़ मगर, दिल की बच्चों जैसी ज़िद के तितली के पर ढूंढूंगा। बुरे दिनों ने सिख लायी है जीने की तरकीब नई, जो कुछ चौराहे पर खोया घर के अन्दर ढूंढूंगा। तुम मेरे चेहरे पर लिखना इन्द्रधनुष उम्मीदों के, मैं तेरी सूनी आँखों में नीला अम्बर ढूंढूंगा। हो सकता है मुझे देखकर फिर छिप जाए जँगल में, मैं अपनी खोई फितरत को भेस बदलकर ढूंढूंगा। अगली बार गाँव में जाकर फिर अपना घर ढूंढूंगा।

    4 min
  3. Bees Baras Baad | Satyam Tiwari

    5D AGO

    Bees Baras Baad | Satyam Tiwari

    बीस बरस बाद ।  सत्यम तिवारी  जो जहाँ है वहाँ नहीं मिलेगा मरीचिकाएं अब एक पुरानी सदा हैं  और उठे हुए हाथ हवा में गिर जाते हैं तय करना मुश्किल है ऐसे में मनुष्य की गति शुरू ही होता है जिसका कालखंड बीस बरस पूर्व बर्फ़ के टुकड़े-सा चला है मेरा प्यार और दूर है तुम्हारा हाथ इतना दूर  वास्तुनिष्ठ सत्य जितना वास्तु से चश्मा आँख से पानी का कि हाथों हाथ लिया जाएगा फौरी सुझाव  और साक्ष्यों के अभाव में मिलेगी माफ़ी निर्देशक छूटे हुए दृश्य से पल्ला झाड़ेगा  निर्माता अनाकर्षक किरदार पर डालेगा पर्दा तीन बार दिन में लोटे से जल देगा और रुकने के आग्रह पर चल देगा देवता ऐसे आएगा कविता में जैसे दुर्घटना का साक्ष्य छुपाने को बिल्ली उलट दिशा में दौड़ेने लगेगा तुम्हारा अंतःकरण।

    2 min
  4. Political And Physical Maps Of India | Priyankshi Mohan

    FEB 12

    Political And Physical Maps Of India | Priyankshi Mohan

    पॉलिटिकल एंड फिज़ीकल मैप्स ऑफ इंडिया।  प्रियंक्षी मोहन  अखबार के पीछे से भेदती हैं पिता की आँखें एक समय के बाद माँ के हाथ की बनी गर्म, फूली हुई रोटियां भी फफोले सी नज़र आती है नकारेपन में इतना घूम लिया है शहर कि प्रेम करने के लिए तो मिल जाता है एक कोना मिल ही जाता है  पर, "क्या करते हो बेटा?" जैसे सवालों से छुपने के लिए दूर दूर तक कोई जगह नज़र नहीं आती है "दरवाज़े बाई तरफ खुलेंगे" हर रोज़  सुन सुनकर भी पता नहीं चलता कि आखिर जाना किस तरफ है राशन की दुकान में जैसे ताखों से झांकते हैं चूहे उसी तरह बाप के दिलाए हुए महंगे कपड़ों की खाली जेबों से  बटुए झांकते है भाइयों पर ज़िम्मा है बहनों को ब्याहने का और बहनों को होने वाले पतियों की बहनों का दहेज़ बनवाने का    हम उलझे थे सदा और उलझे ही रहेंगे ऊन के गोलों की तरह हम देश बदलने का जज़्बा रखने वाले युवा एक दिन दिखते ही देखते पॉलिटिकल और फिज़ीकल मैप्स ऑफ इंडिया में बदल ही जाते हैं

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कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।