KIDS AUDIO STORIES

Get exclusive content, ad free

CHF 5.00/M. oder CHF 40.00/J. nach Probeabo

Namak Ka Droga

मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य के महान लेखकों में से एक हैं, जिन्होंने अपनी कहानियों के माध्यम से समाज के गंभीर मुद्दों को उजागर किया। उनकी लेखनी में जीवन की सच्चाई और मानवीय संवेदनाएँ झलकती हैं। "नमक का दारोगा" उनकी एक ऐसी कहानी है, जो इसके मुख्य किरदार की ईमानदारी को दर्शाती है। पिता की आस और समाज के दबाव और ज़ोर के बावजूद, यह व्यक्ति सही ग़लत के बीच का फर्क नहीं भूलता और एक ऐसी दुनिया में रहते हुए भी, जहां गलत को पूजा जाए और सही को धिक्कार मिले, वह अपने उसूलों को सबसे ऊपर रखता है। तो आइये सुनते हैं नमक के दारोगा, मुंशी वंशीधर की ईमानदारी की कहानी। अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ: https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

Folgen

  1. FOLGE 1

    वंशीधर की कर्तव्य परीक्षा

    वंशीधर, नमक विभाग के ईमानदार दारोगा के रूप में नियुक्त होते हैं, जहाँ घूसखोरी और भ्रष्टाचार व्याप्त है। एक रात, जब उन्हें नदी पर गाड़ियों की आवाज़ सुनाई देती है, तो वे सतर्क हो जाते हैं। जांच करने पर, उन्हें पता चलता है कि प्रतिष्ठित जमींदार पंडित अलोपीदीन की गाड़ियों में नमक की तस्करी हो रही है। अब वंशीधर के सामने अपनी ईमानदारी साबित करने की चुनौती खड़ी होती है। तो आइये सुनते हैं मुंशी प्रेमचंद की इस कहानी का पहला भाग! अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ: https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

    5 Min.
  2. FOLGE 2 • NUR ABONNENT:INNEN

    धन और धर्म का संग्राम

    पंडित अलोपीदीन अपने सजीले रथ पर सवार होकर, स्वाभिमान के साथ दारोगा वंशीधर के सामने पहुंचे। वंशीधर ने उनके ऐश्वर्य और घूस के प्रलोभनों को ठुकराते हुए, अपनी ईमानदारी पर अडिग रहकर, उन्हें हिरासत में लेने का आदेश दिया। पंडितजी ने धन का सहारा लेने की पूरी कोशिश की, परंतु वंशीधर की अटल ईमानदारी के आगे उनका प्रयास विफल हो गया। अंततः पंडित जी निराश होकर मूर्छित हो गए, और समाज में उनकी निंदा की जाने लगी। तो आइये सुनते हैं मुंशी प्रेमचंद की इस कहानी का दूसरा भाग! अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ: https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

    5 Min.
  3. FOLGE 3 • NUR ABONNENT:INNEN

    कर्तव्य की कीमत

    वंशीधर को अपनी ईमानदारी के कारण मुअत्तली का सामना करना पड़ा और वह शोक से व्यथित घर लौटे। उनके बूढ़े पिता ने उन्हें समझाया था पर वंशीधर ने उनकी एक न सुनी थी और अब उन्हें कुछ पछतावा भी हो रहा था। परिवार में सभी नाराज़ थे—पिता ने क्रोध में कठोर बातें कही, माँ दुखी थीं, और पत्नी ने भी कई दिनों तक उनसे बात नहीं की। वंशीधर को अपने फैसले की भारी कीमत चुकानी पड़ी, और उनका जीवन कटु अनुभवों से भर गया। तो आइये सुनते हैं मुंशी प्रेमचंद की इस कहानी का तीसरा भाग! अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ: https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

    5 Min.
  4. FOLGE 4 • NUR ABONNENT:INNEN

    ईमानदारी का इनाम

    एक सप्ताह बाद, सांध्य के समय वंशीधर के बूढ़े पिता राम नाम की माला जप रहे थे। तभी पंडित अलोपीदीन का रथ आ कर उनके घर के आगे रुका। सबने सोचा की पंडित अलोपीदीन वंशीधरको नीचा दिखने के लिए ही वहाँ आए होंगे। पर उन्होंने वंशीधर से आकर कुछ ऐसा कहा कि जिसे सुनकर न तो वंशीधर को अपने कानों पर यकीन हुआ न ही वह खुद को पंडित अलोपीदीन की दरखास्त स्वीकार करने के काबिल समझ पा रहे थे। तो आइये सुनते हैं मुंशी प्रेमचंद की इस कहानी का आखिरी भाग! अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ: https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

    5 Min.

Sendungen mit Abo-Vorteilen

KIDS AUDIO STORIES

Get exclusive content, ad free

CHF 5.00/M. oder CHF 40.00/J. nach Probeabo

Info

मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य के महान लेखकों में से एक हैं, जिन्होंने अपनी कहानियों के माध्यम से समाज के गंभीर मुद्दों को उजागर किया। उनकी लेखनी में जीवन की सच्चाई और मानवीय संवेदनाएँ झलकती हैं। "नमक का दारोगा" उनकी एक ऐसी कहानी है, जो इसके मुख्य किरदार की ईमानदारी को दर्शाती है। पिता की आस और समाज के दबाव और ज़ोर के बावजूद, यह व्यक्ति सही ग़लत के बीच का फर्क नहीं भूलता और एक ऐसी दुनिया में रहते हुए भी, जहां गलत को पूजा जाए और सही को धिक्कार मिले, वह अपने उसूलों को सबसे ऊपर रखता है। तो आइये सुनते हैं नमक के दारोगा, मुंशी वंशीधर की ईमानदारी की कहानी। अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ: https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

Mehr von Chimes - Indian Stories