Pus Ki Raat

मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य के महान लेखकों में से एक हैं, जिन्होंने अपनी कहानियों के माध्यम से समाज के गंभीर मुद्दों को उजागर किया। उनकी लेखनी में जीवन की सच्चाई और मानवीय संवेदनाएँ झलकती हैं। "पूस की रात" उनकी एक ऐसी कहानी है, जो एक गरीब किसान, हल्कू, की संघर्ष और साहस को दर्शाती है। प्रेमचंद ने इस कहानी के माध्यम से यह दर्शाया है कि कैसे कठोर परिश्रम के बावजूद किसान हमेशा अभावों और कठिनाइयों से घिरा रहता है। हल्कू दिन-रात मेहनत करता है, फिर भी उसके पास पर्याप्त संसाधन नहीं होते। कर्ज के बोझ तले दबा हुआ हल्कू यह अनुभव करता है कि उसकी मेहनत का कोई मूल्य नहीं है। तो आइये सुनते हैं पूस की रात की कहानी और जानते हैं कि आखिर हल्कू ने वो रात कैसे काटी। अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ: https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

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Épisodes

  1. ÉPISODE 3 • ABONNÉS UNIQUEMENT

    आत्मसमर्पण

    हल्कू ठंड से लड़ने के बाद अंततः हार मानकर अलाव के पास वापस लौट आता है। खेतों में जानवरों का झुंड उसकी मेहनत से तैयार फसल को बर्बाद कर रहा है, लेकिन ठंड इतनी प्रबल है कि हल्कू को उनका सामना करने की हिम्मत नहीं होती। जबरा अपनी पूरी कोशिश करता है जानवरों को भगाने की, लेकिन हल्कू के शरीर और मन दोनों ने ठंड के आगे समर्पण कर दिया है। अंत में, वह राख के पास ही सो जाता है। सुबह जब उसकी पत्नी मुन्नी आकर उससे खेत की बर्बादी का कारण पुछती है तो हल्कू अपना जवाब देता है। तो आइये सुनते हैं मुंशी प्रेमचंद की इस कहानी का आखिरी भाग। अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ: https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

    5 min

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À propos

मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य के महान लेखकों में से एक हैं, जिन्होंने अपनी कहानियों के माध्यम से समाज के गंभीर मुद्दों को उजागर किया। उनकी लेखनी में जीवन की सच्चाई और मानवीय संवेदनाएँ झलकती हैं। "पूस की रात" उनकी एक ऐसी कहानी है, जो एक गरीब किसान, हल्कू, की संघर्ष और साहस को दर्शाती है। प्रेमचंद ने इस कहानी के माध्यम से यह दर्शाया है कि कैसे कठोर परिश्रम के बावजूद किसान हमेशा अभावों और कठिनाइयों से घिरा रहता है। हल्कू दिन-रात मेहनत करता है, फिर भी उसके पास पर्याप्त संसाधन नहीं होते। कर्ज के बोझ तले दबा हुआ हल्कू यह अनुभव करता है कि उसकी मेहनत का कोई मूल्य नहीं है। तो आइये सुनते हैं पूस की रात की कहानी और जानते हैं कि आखिर हल्कू ने वो रात कैसे काटी। अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ: https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

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