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कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

  1. Usne Kaha | Shiv Kumar Gandhi

    1 day ago

    Usne Kaha | Shiv Kumar Gandhi

    उसने कहा ।  शिव कुमार गांधी उसने कहा मुझसे ले चलो अपने शहर जो कहोगे वही करूँगा फिर पकड़ाई चाय जो गैस के चूल्हे पर बनी थी मैंने कहा मज़ाक़ में - जगह बदल लेते हैं हम और फिर वैसे भी शहर ख़ुद ही तो आ रहा है तुम तक उसने कहा वहाँ छत पर बैठना शाम में अच्छा लगता है रोशनियों बीच और फिर हवा तो आती ही है एक कारख़ाने में काम करता था उसका भतीजा जिसके साथ किसी छत पर बैठा था वह एक दिन इस शहर में रोशनियों बीच और उस दिन भी हवा तो आई ही थी तालाब किनारे चाँद को देखता लेटा हुआ शाम में मैं ख़ुद कितने दिन काट लूँगा यहाँ तालाब अभी भरा है फिर ख़ाली होगा और फिर भरेगा और ख़ाली होगा अगली बार पता नहीं भरे कि नहीं और मैं कहूँगा किसी से ले चलो अब तो मुझे अपने साथ जो कहोगे वह कर ही लूँगा!

    3 min
  2. Kya Kiya | Sushma Kumari

    3 days ago

    Kya Kiya | Sushma Kumari

    क्या किया।  सुषमा कुमारी घोर अँधेरे में जब 'मुक्तिबोध' के शब्द गूंजते हैं कानों में - 'कहो इस जीवन में क्या किया? किसी मेमने की तरह घबराई, मैं भागने लगती हूँ उल्टी दिशा में! बहुत-बहुत भाग कर फिर पहुँचती हूँ वहीं! न बचने की हालत में बहुत-बहुत सोचती हूँ, और पाती हूँ। अँधेरी खदानों में खोदती रही जीवन। उम्मीदों की अनाज से, भरती रही बच्चों का पेट! मजदूरी की झुकी हुई पीठ पर बोझा उठाया। कतरनों को चुन कर गढ़े बहुत-बहत सपनें। बहुत-बहुत लड़ी बहुत-बहुत दुःखों के बीच खड़ी रही पलाश की तरह! जहाँ-जहाँ मुरझा जाना था मुझे  वहीं-वहीं तो खिली! खाली हाँथो में सहेजे रखा हमेशा अपने पूर्वजों की मुट्ठी भर जिजीविषा!

    2 min

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कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

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