Krishi Jagran

Krishi Jagran

Krishi Jagran is an acclaimed Audio channel from Krishi Jagran media group, to support the farming sector. We provide online detailed information on Agriculture, post-harvest management, livestock, farm mechanization, and crop advisory, etc. Apart from this Krishi Jagran also provides all recent updates of the agriculture sector, events, and market prices.

  1. 03/09/2021

    खेती के लिए 3 लाख रुपए तक कर्ज पर नहीं देना होगा कोई ब्याज, जानें किसानों को और क्या मिला?

    महाराष्ट्र की उद्धव सरकार द्वारा बजट (2021-22) पेश किया जा चुका है. इस बजट की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण के साथ हुई, तो वहीं वित्त मंत्री अजित पवार ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए कई बड़े ऐलान किए. इस बजट में राज्य के किसानों को बड़ी राहत दी गई है. खास बात यह है कि अब किसानों को खेती के लिए 3 लाख रुपए तक कर्ज पर कोई ब्याज नहीं देना होगा. महाराष्ट्र बजट 2021-22 में किसानों के लिए बड़े ऐलान • अगर किसान 3 लाख रुपए तक फसल कर्ज समय पर वापस करते हैं, तो ब्याज सरकार भरेगी. • बजट में कृषि, पशुपालन, दुग्ध व्यवसाय और मत्स्य व्यवसाय के लिए 3 हजार 274 करोड़ रुपए का प्रावधान है • कृषि उत्पन्न बाजार समिति के लिए 2 हजार करोड़ रूपए की योजना बनाई गई है. जिसके द्वारा सुधार किया जाएगा. • किसानों को बकाया बिजली बिल में 33 प्रतिशत की छूट दी जाएगी, साथ ही बची राशि में से 50 प्रतिशत मार्च 2022 तक भरने पर बची हुई 50 प्रतिशत राशि माफ की जाएगी. • किसानों को कृषि पंप बिजली के लिए महावितरण कंपनी को हर साल 1 हजार 500 करोड़ रुपए का प्रावधान है • किसानों को 44 लाख 37 हजार मूल बकाया रकम का 66 प्रतिशत यानी 30 हजार 411 करोड़ रुपए माफ होगा. • अगले 3 सालों में राज्य के 4 कृषि विश्व विद्यालयों को रिसर्च के लिए 600 करोड़ रुपए का प्रावधान है. • शरद पवार ग्राम समृद्धि योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में गाय भैंस के लिए पक्की पशुशाला, कुक्कुट पालन शेड और कंपोस्टिंग के लिए अनुदान की योजना बनाई गई है. • कृषि उपज के लिए बाजार और मूल्य श्रृंखला के निर्माण के लिए 2 हजार 100 करोड़ रुपए की बालासाहेब ठाकरे कृषि व्यवसाय व ग्रामीण परिवर्तन परियोजना बनाई गई है.

    2 min
  2. 03/09/2021

    9 लाख किसानों के लिए है बुरी खबर, रद्द हो गए इनके फसल बीमा क्लेम, इसलिए रखें इन बातों का ध्यान

    आमतौर पर ऐसा देखा गया है कि प्राकृतिक आपदाओं का शिकार होकर किसानों की फसलें बर्बाद हो जाती है, जिसकी वजह से किसान इस नुकसान को बर्दाश नहीं कर पाते और मौत को गले लगा लेते हैं. इन्हीं सब घटनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने फसल बीमा योजना की शुरूआत की है. इस योजना का ध्येय आप समझ गए होंगे, जैसे कि इसके नाम से ही प्रतीत हो रहा है. दरअसल, इस योजना के तहत किसानों के फसलों का बीमा कराया जाता है और किसी भी प्रकार का नुकसान होने पर बीमा कंपनी किसानों को हर्जाना देती हैं, लेकिन हम आपको जो खबर बताने जा रहे हैं. वो दरअसल ये नहीं है. खबर तो यह है कि केंद्र सरकार की तऱफ से 9 लाख लोगों का बीमा क्लेम रद्द कर दिया गया है. केंद्रीय कृषि मंत्रालय के मुताबिक, केंद्र सरकार की तरफ से 9,28 और 870 क्लेम को रद्द कर दिया गया है. लिहाजा, अगर आपने भी फसल बीमा योजना के तहत पंजीकृत करवाया है, तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा. आपने अगर इन जरूरी बातों का ध्यान नहीं रखा, तो आप भी इस जमात में शामिल हो सकते हैं, लिहाजा कहीं आपका भी इस जमात में नाम शामिल न हो जाए. इसलिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा. इन बातों का रखें ध्यान ओलावृष्टि, भू-स्खलन, अतिवृष्टि, बादल फटने, प्राकृतिक आग जैसी स्थिति में नुकसान की गणना बीमित खेती के आधार पर की जाती है, इसलिए किसानों को अपनी फसलों को हुए नुकसान की जानकारी फौरन बीमा कंपनी को देनी चाहिए. अगर आपने फसलों का बीमा करवाने के दौरान कुछ बातों का ध्यान नहीं रखा, तो फिर आप इस बीमा का लाभ नहीं उठा पाएंगे. उदारहण के लिए अगर आप दावों की सूचना देर से देते हैं, तो संभवत: आपको अपनी फसलों का हर्जाना नहीं मिल पाएगा. क्लेम करने के लिए किसान को बीमा कंपनी या फिर कृषि विभाग के अधिकारी से संपर्क करना होगा. बता दें कि अगर आप इन बातों का ध्यान नहीं रखते तो संभव है कि आप फसल बीमा योजना के लाभ से वंचित रह सकते हैं.

    2 min
  3. 03/09/2021

    सूअर पालन है बड़े लाभ का कारोबार, कम समय में हो जाएगी अच्छी आमदनी

    अगर आप अमीर बनने का प्लान बना रहे हैं और एक अच्छे बिजनेस की तलाश में हैं, तो फिर यकीन मानिए, सूअर पालन आपके लिए एक अच्छा बिजनेस साबित हो सकता है. क्यों चौंक गए न...अब आपके जेहन में यह सवाल उठा रहा होगा कि आखिर कोई सूअर पालन करके चंद समय में ही कैसे धनकुबेर बन सकता है? जी हां...आपका यह सोचना मुनासिब है, लेकिन अगर आपने हमारी इस रिपोर्ट में दी गई अहम जानकारियों को अपने जीवन में लागू कर लिया है, तो यकीन मानिए आपको दुनिया की कोई भी ताकत धनकुबेर बनने से नहीं रोक सकती कुछ धारणाएं, जो अब हो रही हैं गलत आपको बता दें कि कल तक हमारे समाज में सूअर पालन को लेकर कुछ धारणाएं थी, जो अब समय के साथ- साथ ध्वस्त होती जा रही है. सूअर पालन के संदर्भ में शुरू से यही कहा गया है कि यह कारोबार महज छोटी जाति के लोगों द्वारा किया जाता है, लेकिन अब ऐसा नहीं है. अब तो यह लोगों की आर्थिक उन्नति का जरिया बन चुका है. कम पूंजी में ज्यादा मुनाफा: अर्थ के लिहाज से सूअर पालन का कारोबार बेहद फायदेमंद माना जाता है, वो इसलिए क्योंकि सूअर पालन करने के लिए आपको ज्यादा पूंजी की आवश्यकता नहीं होती. राष्ट्रीय शूकर अनुसंधान केंद्र के मुताबिक, आप तकरीबन 50 हजार रूपए की पूंजी से यह कारोबार शुरू कर सकते हैं. वहीं, अगर इसके एवज में कमाने वाले मुनाफे की बात करें, तो वो भी बहुत शानदार है. क्योंकि, सूअर पालन के कारोबार के संचालन में भी बहुत कम पूंजी की आवशयकता होती है. सूअर पालन करने में आपको ज्यादा धन की जरूरत नहीं पड़ेगी. क्योंकि, सूअर अपशिष्ट पदार्थ खाकर ही अपना पेट भर लेते है, लेकिन अन्य जानवर को पालने में ऐसा नहीं होता है. तीव्र वृद्धि : साथ ही सूअर पालन का सबसे बड़ा लाभ यह भी है कि सूअर के बच्चे कम अवधि में ही विकसित हो जाते हैं. इनके अंदर वृद्धि करने की अद्भुत क्षमता होती है. अन्य जानवरों में वृद्धि होने में बहुत ज्यादा समय लगता है, लेकिन सूअर पालन बहुत ही कम समय में वृद्धि करने लग जाते हैं. वहीं, एक सूअर का बच्चा महज 7 से 8 महीने में प्रजनन क्षमता को विकसित कर लेता है. प्रजनन क्षमता: वहीं, उनके प्रजनन क्षमता की बात करें, तो विशेषज्ञों के मुताबिक, एक मादा सूअर महज 114 से 115 दिनों में तकरीबन 6 से 7 बच्चे को जन्म दे देती हैं, जो कि एक कारोबारी के लिए अर्थ के लिहाज से बहुत लाभदायक है. अत्याधिक मात्रा में मांस: सूअर में अत्याधिक मात्रा में मांस प्राप्त होता है. समान्यत: अगर सूअर का वजन 100 किलोग्राम है, तो आप उससे 60 से 70 किलो मांस प्राप्त कर सकते हैं. लिहाजा, बतौर मांस विक्रेता भी आप सूअर पालन कर अच्छा खासा मुनाफा कमा सकते हैं. सूअर पालन करते समय रखें इन बातों का ध्यान अगर आप सूअर पालन करने जा रहे हैं, तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा जैसे आप  एक साफ और सुरक्षित जगह का चयन कर लें. ध्यान रहे कि आप जिस जगह का चुनाव करने जा रहे हैं, वहां लोगों का ज्यादा आना-जाना न हो. कोशिश करें कि आपको ग्रामीण इलाके में जगह मिल जाए, चूंकि इन इलाकों में मजदूर सस्ती दर पर मिल जाते हैं. सूअर की कुछ प्रमुख नस्लें लार्ज वाइट लार्कशायर, मिडल वाइट लार्कशायर, लैंडरस, हैंपशायर, स्वदेशी किस्म और एचएक्स 1 इसी के साथ अधिक जानकारी के लिए आप राष्ट्रीय सूकर अनुसंधान केंद्र के टोल फ्री नंबर 1800 180 1551 पर संपर्क कर सकते हैं।

    4 min
  4. 02/27/2021

    आखिर क्यों सरकार वापस नहीं ले रही है कृषि कानून? कृषि मंत्री ने बताई ये बड़ी वजह

    मौजूदा वक्त में कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन अपने शबाब पर है, लेकिन सरकार का तो रूख साफ है कि इन कानून को किसी भी कीमत पर वापस नहीं लिया जाएगा। उधर, किसानों ने भी साफ कर दिया है कि जब तक इन कानूनों को वापस नहीं लिया जाएगा, तब तक हमारा यह आंदोलन यथावत जारी रहेगा। इसे लेकर तरह-तरह की प्रतक्रियाएं सामने आ रही है। एक ओर जहां कुछ लोग किसानों के पक्ष में आकर सरकार के इन कानूनों की आलोचना कर रहे हैं, तो वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो इन कानूनें का पक्ष लेते हुए इस आंदोलन की आलोचना कर रहे हैं। इस बीच अब केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने तीन दिवसीय पूसा मेले के दौरान देशभर से आए किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी सरकार किसानों की उन्नति करने की दिशा में प्रयासरत है। हमारा लक्ष्य किसानों को पल्लवित करना है। वहीं, मौजूदा वक्त में जारी कृषि कानून के संदर्भ में अपना बयान जारी करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह कानून किसानों के हित में है। इस कानून के माध्यम से किसानों के विकास को एक नई रफ्तार मिंलेगी। यह आज की तारीख में किसानों की जरूरत है। किसानों की जरूरत है यह कानून केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज की तारीख में यह कानून किसानों की जरूरत बन चुकी है। अगर समय रहते हमने किसानों की इस जरूरत को पूरा नहीं किया तो हमारे किसान पीछे चले जाएंगे। उन्होंने अन्य देशों का हवाला देते हुए कहा कि दूसरे देशो में समय-समय किसानों को विकसित करने की दिशा में नए कानून लाए जाते रहें हैं, जिनका उनको विकसित करने की दिशा में अहम किरदार रहा है। अगर वे भी इस तरह विरोध करते, तो आज वे विकसित नहीं होते। उन्होंने कहा कि किसानों को विकसित करने की दिशा में यह कानून यकीनन बेहद अहम किरदार अदा करेंगे। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, कुछ लोगों के गुमराह करने की वजह से किसान इन कानून का विरोध कर रहे हैं। पूसा मेले को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि आज की तारीख में तकरीबन 86 फीसद किसानों के पास दो हेक्टेयर से कम की भूमि है। लिहाजा, किसी बड़े निवेश के अभाव में दुर्दिन जीवन जीने को बाध्य है। निवेश न होने की वजह से किसानों को कोई फायदा हो नहीं पाता है, और उनकी खेती डूब जाती है, जिसके चलते उन्हें सही लाभ नहीं मिल पाता है। नतीजा यह होता है कि अंत में किसान खेती- बाड़ी से परित्याग कर शहरों का रूख करते हैं, जिससे किसानों का पलायन शुरू हो जाता है। अगर किसानों के पलायन का यह सिलसिला यूं ही जारी रहा तो फिर वो दिन दूर नहीं जब इंसानी वजूद पर संकट के बादल मंडराने लग जाएंगे। लिहाजा, केंद्र सरकार द्वारा लाए गए यह कानून किसानों के लिए हितकारी साबित हो सकते हैं।

    3 min

About

Krishi Jagran is an acclaimed Audio channel from Krishi Jagran media group, to support the farming sector. We provide online detailed information on Agriculture, post-harvest management, livestock, farm mechanization, and crop advisory, etc. Apart from this Krishi Jagran also provides all recent updates of the agriculture sector, events, and market prices.