अंदर की आवाज़

अंदर की आवाज़ (ANDAR KI AAWAJ)

Good Evening everyone Myself Parth Mittal, founder of the writing community अंदर की आवाज़ On behalf of my whole family of AKA , I am pleased to tell you all that now we are going to entertain you all with our poetry and other talents Do listen us and have a great time

  1. AN AMAZING WRITEUP BY SHREYASI RATH | BAZM AE SUKHAN | AKA WRITERS

    02/17/2021

    AN AMAZING WRITEUP BY SHREYASI RATH | BAZM AE SUKHAN | AKA WRITERS

    Hey there! This is Shreyasi Rath, an imperfect writer of 14 years old. She hails from Sambalpur, Odisha. Currently, a pupil of class 9th. She is a crazy lover of her pen and overthinking. She made her bond with pen when she was 9 years old. She have 50+ rewards related literature and contributed in 20 anthologies. She is a voluble extrovert and a open-hearted girl with a complicated heart. WRITEUP: आप हमे दिखे यह पहले नहीं कातिब, हमने कइयों को मोहब्बत में शायर बनते देखा है! आपको इस इश्क़ के अंधेपन में आधी रात हमने, आपको उल्लू की तरह उजागर घूमते देखा है! यूँ आते जाते हज़ारों मिले हमसे, और उन्हें खुद खुदको प्यार का मास्टर बताते देखा है! आपके इस झूठे और अंधे ऐतबार वाले प्यार का, चुपचाप कोने में हमने सफर गुजरते देखा है! पहले तो समझाया भी था हमने आपको पर आज, आपके प्यार को दर से सिफ़र बनते देखा है! यूँ अंदर से मत टूटो ना हम संभाल रहे हैं आपको, रोइए मत हमने आज तक आपके खुशी के पर उड़ते देखा है! हमने आज तक किसीसे मोहब्बत नहीं की, पर पहला प्यार कोई पूछे तो अपनी माँ को देखा है! ब्रम्हा,विष्णु,महेश,खुदा,जीसस 33 कोटी भी कम, आखिर हमने अपनी माँ में अपना परमात्मा देखा है! उसके मुलायम हाथों का मुसलसल प्यार, उसके ममता को ही हमने अफ़ज़ल महिमा देखा है! अश्क पोंछने के लिए उसके पल्लू से बेहतर कुछ नहीं, उसके अंदर झाँकने पर मुकम्मल होता गरिमा देखा है! जिंदगी के साथ जीते हैं पर कभी अंधेरा नहीं देखा, हमे दिखता भी कैसे माँ को हमने उमा जो देखा है! और यहाँ का इतफ़ाक़ तो देखिए जनाब, कि उसके लिए जितने भी शब्द पिरोए सबमें माँ देखा है! बचपन से हमे हमारे कलम और पनपते ख्यालातों ने ऐसे बाँधा, की हमने दीवाने की तरह खुदको खुदसे उल्फ़त करते देखा है! कोई और हमे खुदको खुदसे दूर न करे इसलिए हमने, हमेशा अपनी दिल की हिफाज़त करते देखा है! गलत क्या सही का ठीक अंदाज़ा नहीं लगा पाते, इसलिए खुदसे सब समझने को शिकायत करते देखा है! हर सुबह शाम जब सबके लिए दुआ माँगते हैं तब, अंदर ही अंदर खुदके लिए इबादत करते देखा है! मालूम है यह प्यार कभी टूटेगा नहीं, शायद इसलिए नदी में चलते सफ़ीने की तरह खुदको फ़रागत चलते देखा है! कोई भी रिश्ता हो पर प्यार से कुछ जरूरी होता है, उस जरूरत को पूरा करने के लिए अपने दिल में अपने लिए भी इज़्ज़त देखा है! ©Shreyasi Rath

    3 min

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