Sambandh Ka Ke Ki

Himanshu Bhagat

A conversation on books, conducted in Hindi.

  1. एपिसोड 44: 'गोलवलकर' − धीरेन्द्र झा

    JAN 20

    एपिसोड 44: 'गोलवलकर' − धीरेन्द्र झा

    भारत को आज़ादी मिलने के तीन हफ्ते बाद, ४ सितम्बर १९४७ को, दिल्ली में दंगे शुरू हो गए। शहर के करोल बाग़ इलाके में एक हाई-स्कूल में छात्र परीक्षा दे रहे थे। इसी समय स्कूल में एक भीड़ घुस गई और उसने परीक्षा देते हुए मुसलमान छात्रों का क़त्ल कर दिया। तीन दिनों में दिल्ली के ८,००० से १०,००० मुसलमान निवासी मारे गए। इसके एक महीने बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर ने शहर के तीन इलाकों के हिन्दुओं को विशेष मुबारकबाद दी − करोल बाग़, सब्ज़ीमंडी, और पहाड़गंज। ये वही इलाके थे जहाँ मुसलामानों को सबसे ज़्यादा क्षति पहुँची थी। सुनिए एक चर्चा गोलवलकर की जीवनी के लेखक धीरेन्द्र झा के साथ, उनकी किताब पर। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) 'गोलवलकर' अमेज़न पर⁠धीरेन्द्र झा की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर  (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

    1h 33m
  2. एपिसोड 43: 'पुलिसिंग एंड वायलेंस इन इंडिया' − जिनी लोकनीता व डीना हीथ

    12/24/2025

    एपिसोड 43: 'पुलिसिंग एंड वायलेंस इन इंडिया' − जिनी लोकनीता व डीना हीथ

    जब अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड नाम के एक निहत्थे अश्वेत व्यक्ति की एक गोरे पुलिसकर्मी ने हत्या कर दी तब इस निर्मम हत्या के विरोध में हज़ारों अमेरिकी नागरिक सड़क पर उतर आये। देखते-देखते 'ब्लैक लाइव्स मैटर' के नाम से ये विरोध पुरे विश्व में फ़ैल गया। वहीं भारतीय पुलिस द्वारा हिंसा का प्रयोग और संदिग्ध अपराधियों को यातना देना, उनकी हत्या कर देना आम है। मगर इस हकीक़त से यहाँ की आवाम को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है। क्या कारण है भारत में व्यापक पुलिस हिंसा का? क्या हल है इसका? ‘पुलिसिंग एंड वायलेंस इन इंडिया’ में विशेषज्ञ अपने लेखों में पुलिसी हिंसा के अलग-अलग पहलुओं पर प्रकाश डालते हैं। किताब का संपादन किया है जिनी लोकनिता और डीना हीथ ने। सुनिए किताब पर एक चर्चा, डॉ जिनी लोकनीता के साथ। इंस्टाग्राम पर जिनी लोकनिताएक्स (ट्विटर) पर जिनी लोकनिता ‘पुलिसिंग एंड वायलेंस इन इंडिया’ अमेज़न पर अब्दुल वाहिद शेख की 'बेगुनाह क़ैदी' अमेज़न पर ('सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

    1h 11m
  3. एपिसोड 42: 'एवरीडे रीडिंग' − आकृति मंधवानी

    12/05/2025

    एपिसोड 42: 'एवरीडे रीडिंग' − आकृति मंधवानी

    आज़ादी के ठीक बाद, १९५० व १९६० के दशक में छपने वाली लोकप्रिय हिंदी पत्रिकाओं में से दो थीं -- 'सरिता' और 'धर्मयुग'। क्या था रिश्ता और क्या असर रहा इन पत्रिकाओं का -- और साथ-साथ, हिन्द पॉकेट बुक्स की बहुत किफायती दरों वाली किताबों का -- अपने उत्तर-भारतिय हिंदी-भाषी मध्यम-वर्गिय पाठकों पर, इसका आकलन और विश्लेषण आपको मिलेगा डॉ आकृति मंधवानी की किताब 'एवरीडे रीडिंग' में। और साथ ही साथ मिलेगा, परेश नाथ, दिना नाथ मल्होत्रा, और धर्मवीर भारती जैसे दिग्गज प्रकाशक और संपादक के हिंदी भाषा के प्रसार और विकास में योगदान की कहानी। सुनिए डॉ मंधवानी के साथ एक चर्चा उनकी रोचक किताब 'एवरीडे रीडिंग' पर। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) इंस्टाग्राम पर आकृति मंधवानी एक्स (ट्विटर) पर आकृति मंधवानी 'एवरीडे रीडिंग' अमेज़न पर ('सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

    1h 8m
  4. एपिसोड 41: 'आदिवासी ऑर वनवासी' − कमल नयन चौबे

    11/20/2025

    एपिसोड 41: 'आदिवासी ऑर वनवासी' − कमल नयन चौबे

    ईसाई मिशनरियों द्वारा भारत के आदिवासियों के बीच ईसाई धर्म के प्रसार को रोकने के लिये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने १९५२ में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण की स्थापना की। वनवासी कल्याण आश्रम ने आदिवासियों के बीच हिन्दू धर्म व संस्कृति के प्रचार और समाज सेवा के राह को अपनाया। समय के साथ, वनवासी कल्याण आश्रम ने सत्तारूढ़ ताकतों द्वारा आदिवसीययों के शोषण के खिलाफ भी आवाज़ उठाई। मगर जैसा डॉ कमल नयन चौबे अपनी किताब 'आदिवासी ऑर वनवासी' में दिखलाते हैं, वनवासी कल्याण आश्रम ने कभी भी खुलकर आदिवासियों के हक़ की लड़ाई का समर्थन नहीं किया और न ही इस संघर्ष में उनका साथ दिया। सुनिए किताब पर एक चर्चा डॉ चौबे के साथ। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) फेसबुक पर डॉ कमल नयन चौबे  'परख विथ कमल नयन चौबे' – ‘यु ट्युब’ चैनल'आदिवासी ऑर वनवासी' अमेज़न पर डॉ चौबे की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर  (सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

    1h 11m
  5. एपिसोड 40: 'राइटर, रेबेल, सोल्जर, लवर − द मेनी लाईव्स ऑफ़ अज्ञेय' − अक्षय मुकुल

    10/14/2025

    एपिसोड 40: 'राइटर, रेबेल, सोल्जर, लवर − द मेनी लाईव्स ऑफ़ अज्ञेय' − अक्षय मुकुल

    कई लोगों का मानना है कि प्रेमचंद के 'गोदान' के बाद हिंदी साहित्य का सर्वोच्च उपन्यास है, सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' की कृति 'शेखर : एक जीवनी'। सच्चिदानंद वात्स्यायन को 'अज्ञेय' उपनाम स्वयं प्रेमचंद ने दिया था और, आगे चल के, फणीश्वर नाथ रेणु ने एक लेख में उनको − 'अलख, अचल, अगम, अगोचर, अजब, अकेला, अज्ञेय' कहा था। अपने जीवन काल में अज्ञेय ने कविताएं, उपन्यास, लघु-कहानियाँ, निबंध, यात्रा-वृतांत, और अख़बार व पत्रिकाओं के लिए अनेक आलेख लिखे। अज्ञेय को हिंदी साहित्य में आधुनिकतावाद यानी 'मॉडर्निज़्म' का जनक माना जाता है। अक्षय मुकुल की लिखी हुई, अज्ञेय की जीवनी का शीर्षक है 'राइटर, रेबेल, सोल्जर, लवर' यानी, लेखक, बाग़ी, सैनिक, और प्रेमी। ये बहुप्रशंसित जीवनी अज्ञेय के जीवन के हर एक पहलु पर प्रकाश डालती है। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) 'राइटर, रेबेल, सोल्जर, लवर' अमेज़न पर  अक्षय मुकुल की अन्य किताबें अमेज़न परएक्स (ट्विटर) पर अक्षय मुकुल  अज्ञेय की अन्य किताबें अमेज़न पर (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

    1h 44m
  6. एपिसोड 39: 'बस्ती एंड दरबार – अ सिटी इन स्टोरीज' − रक्षंदा जलील

    10/01/2025

    एपिसोड 39: 'बस्ती एंड दरबार – अ सिटी इन स्टोरीज' − रक्षंदा जलील

    क़रीब एक हज़ार साल से, दिल्ली हिन्द-उपमहाद्वीप के बड़े हिस्सों पर शासन करने वाले अलग-अलग साम्राज्यों की राजधानी रही है। रक्षंदा जलील अपने आप को पक्की दिल्ली-वाली मानती हैं और वे संपादक हैं 'बस्ती एंड दरबार – अ सिटी इन स्टोरीज' की। इस किताब में ३२ कहानियाँ हैं – जो, या तो लघु कथाएँ हैं या उपन्यास का अंश हैं। इन कहानियाँ को पढ़ के हम वाक़िफ़ होते हैं सन 1857 से लेकर आज तक की दिल्ली के अच्छे-बुरे, मीठे-वीभत्स पहलुओं से। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर), और फेसबुक पर डॉ रक्षंदा जलील'बस्ती एंड दरबार – अ सिटी इन स्टोरीज' अमेज़न परएपिसोड 12: 'उर्दू – द बेस्ट स्टोरीज़ ऑफ़ आवर टाइम्स' − रक्षंदा जलील'उर्दू – द बेस्ट स्टोरीज़ ऑफ़ आवर टाइम्स' अमेज़न पर रक्षंदा जलील द्वारा लिखी गईं अन्य पुस्तकें अमेज़न पर (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

    1h 1m
  7. एपिसोड 38: 'आवर राइस टेस्ट्स ऑफ़ स्प्रिंग' − अनुमेहा यादव

    09/08/2025

    एपिसोड 38: 'आवर राइस टेस्ट्स ऑफ़ स्प्रिंग' − अनुमेहा यादव

    आज़ादी के बाद, १९५० और १९६० के दशकों में, भारत को अपनी आबादी को भुखमरी से बचाने के लिए अक्सर अमरीकी अनाज पर निर्भर होना पड़ता था। फिर 'हरित क्रांति' यानी 'ग्रीन रेवोलुशन' के बदौलत, वर्ष १९७१ तक भारत अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर बन गया। ये संभव हुआ, नए किस्म के उपजाऊ अनाज, सिंचाई व्यवस्था में बढ़ोत्तरी, और रासायनिक खाद व कीटनाशक दवाइयों के व्यापक इस्तेमाल से। लेकिन आत्मानिर्भरता के लिए देश को कीमत अदा करनी पड़ी। क्या असर हुआ है नई खेती प्रणाली का छोटानागपुर प्रान्त के आदिवासी गाँवों में? चित्रों समेत, एक सरल कहानी द्वारा इसका वर्णन किया है अनुमेहा यादव ने अपनी पुस्तक 'आवर राइस टेस्ट्स ऑफ़ स्प्रिंग' में, जो बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए लिखी गयी है। (आप⁠ शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) एक्स (ट्विटर) पर अनुमेहा यादव वर्डप्रेस पर अनुमेहा के ब्लॉग 'आवर राइस टेस्ट्स ऑफ़ स्प्रिंग' अमेज़न परछोटानागपुर क्षेत्र में धान के देसी बीजों के पुनः प्रयोग पर 'द वायर' में अनुमेहा का आलेख  कृषि वैज्ञानिक डॉ अनुपम पॉल के साथ धानके बीजों के संरक्षण पर 'द वायर' में अनुमेहा का इंटरव्यू 'प्लास्टिक' 'फोर्टीफाईड' चावल का आदिवासी क्षेत्रों में वितरण पर 'द वायर' में अनुमेहा की फिल्म कृत्रिम चावल के राशन द्वारा वितरण पर 'द हिन्दू' के साथ अनुमेहा का पॉडकास्ट (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

    1 hr
  8. एपिसोड 37: 'शौमित्रो चटर्जी एंड हिज़ वर्ल्ड' − संघमित्रा चक्रवर्ती

    08/14/2025

    एपिसोड 37: 'शौमित्रो चटर्जी एंड हिज़ वर्ल्ड' − संघमित्रा चक्रवर्ती

    फिल्म जगत की एक मशहूर 'एक्टर-डायरेक्टर' जोड़ी थी, सत्यजीत रे और शौमित्रो चटर्जी की। शौमित्रो ने रे की २८ फिल्मों में से १४ में मुख्य किरदार निभाया। इन १४ फिल्मों के अलावा शौमित्रो ने और भी बहुत कुछ किया। अपने ६० साल के करियर में उन्होंने पुरे ३०० फिल्मों में काम किया। साथ-साथ, वे एक 'थिएटर-एक्टर', नाटककार, लेखक, कवि, संपादक, और चित्रकार भी थे। जनवरी 2020 में शौमित्रो ८५ साल के हो गये और उस साल उनकी सात फिल्में रिलीज़ हुई थीं। उसी वर्ष, शौमित्रो का देहांत हो गया। उनकी जीवनी 'शौमित्रो चटर्जी एंड हिज़ वर्ल्ड' में संघमित्रा चक्रवर्ती लिखती हैं कि सत्यजीत रे के गुज़र जाने के बाद बंगाल के पास सिर्फ शौमित्रो ही बचे थे। सुनिए संघमित्रा के साथ उनके इस कथन और शौमित्रो चटर्जी के जीवन के अन्य पहलुओं पर एक चर्चा। (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।) इंस्टाग्राम पर संघमित्रा चक्रवर्ती एक्स (ट्विटर) पर संघमित्रा चक्रवर्ती  फेसबुक पर संघमित्रा चक्रवर्ती  'शौमित्रो चटर्जी एंड हिज़ वर्ल्ड' अमेज़न पर संघमित्रा चक्रवर्ती का अपना वेबसाइट   (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

    1h 23m

About

A conversation on books, conducted in Hindi.