Sci-fi Talk

Neha S Bhatt

Information and knowledge about the space technology and science development.

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  1. India Aditya L-1 Mission

    09/02/2023

    India Aditya L-1 Mission

    आदित्य एल-1 सूर्य मिशन:- भारत के पहले सूर्य मिशन आदित्य एल-1 स्पेसक्राफ्ट को सूर्य की स्टडी के लिए भेजा गया है.. श्री हरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से 2 सितंबर 2023 को सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर आदित्य एल1 को PSLV-XL रॉकेट से लॉन्च किया...फिर PSLV-XL रॉकेट ने 63 मिनट बाद आदित्य एल-1 को धरती के लोअर ऑर्बिट में छोड़ दिया..दोनों अलग हो गए..जिसके बाद आदित्य एल-1 की 125 दिन का यात्रा शुरू हो गई..धरती के लोअर ऑर्बिट के बाद 16 दिन आदित्य एल-1 धरती के चारों तरफ पांच ऑर्बिट मैन्यूवर करके सीधे धरती की गुरुत्वाकर्षण वाले क्षेत्र यानी स्फेयर ऑफ इंफ्लूएंस (SOI) से बाहर जाएगा...इस फेज में चुनौतियां होती हैं..और इससे बाहर निकलने का मतलब ये है कि आदित्य एल1 का आधा मिशन पूरा..इसके बाद शुरु होगी क्रूज फेज स्टेज और आदित्य एल1 हैलो ऑर्बिट में एंट्री करके यहीं पर सूर्य से एक निश्चित दूरी एल-1 यानि लैंगरेज़ प्वाइंट पर स्थापित होगा..लैंगरेज प्वाइंट वो जगह है जहां अंतरिक्ष में पृथ्वी और सूरज की ग्रैविटी आपस में टकराती है..पृथ्वी की ग्रैविटी खत्म होते ही सूरज की ग्रैविटी शुरु हो जाती है..धरती और सूरज के बीच पांच लैगरेंज प्वाइंट है..जिनमें से एक एल-1 जिसकी दूरी धरती से 15 लाख किलोमीटर है वहां पर आदित्य एल-1 स्थापित होकर सूर्य का अध्ययन करेगा..आदित्य एल-1 का वजन 1480 किलोग्राम है..इसमें 7 पेलोड यानि उपकरण हैं जो सूर्य के फोटोस्फीयर, क्रोमोस्फीयर और कोरोना यानि सूरज की बाहरी सतह की जांच करेंगे..आदित्य एल-1 अगले 5 साल तक काम करेगा..इस दौरान सूरज की किरणें अंतरिक्ष की गतिविधियों को कैसे प्रभावित करती हैं इसका अध्ययन करेगा..इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और मैंग्नेटिक फील्ड के आयन पार्टिकल्स की भी स्टडी करेगा...सूर्य कैसे मौसम को प्रभावित कर सकता है इसका डेटा भेजेगा...

    3 min
  2. 08/23/2023

    India Chandrayan-3 on moon

    नमस्कार दोस्तों...भारत के लिए गौरवशाली क्षण है...23 अगस्त 2023 की तारीख दुनिया के इतिहास में भारत के नाम दर्ज हो गई है...भारत ने चंद्रमा पर कदम रखकर इतिहास रच दिया है...भारत के चंद्रयान-3 ने सफलतापूर्वक चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग की और इस उपलब्धि को हासिल करने वाला भारत चौथा देश बन गया है...चांद पर इससे पहले अमेरिका, रूस, चीन ने ही कदम रखा है...भारत की ये उपलब्धि इसलिए भी ज्यादा बड़ी है क्योंकि चंद्रयान-3 चंद्रमा के साउथ पोल पर उतरा है....भारत दुनिया का पहला देश है जिसने चंद्रमा के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिग कराई है...चंद्रयान-3 के तीन पार्ट हैं...पहला विक्रम लैंडर, दूसरा प्रज्ञान रोवर और तीसरा ऑर्बिटर...चंद्रयान-3 मिशन में लैंडर और रोवर को ही भेजा गया है...जबकि ऑर्बिटर चंद्रयान-2 मिशन का ही अभी काम कर रहा है...23 अगस्त को भारतीय समय के मुताबिक शाम करीब 5 बजकर 44 मिनट पर चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर को चंद्रमा की सतह पर उतारने की प्रक्रिया शुरू की गई...रफ ब्रेकिंग फेज में विक्रम लैंडर को चंद्रमा की सतह से 25 किलोमीटर की ऊंचाई से 7.4 किमी की ऊंचाई तक लाया गया....उसकी स्पीड कम की गई...फिर फाइन ब्रेकिंग और डिसेंट फेज में विक्रम लैंडर को धीरे-धीरे चंद्रमा के साउथ पोल पर उतारा गया....चंद्रमा पर अभी सूर्योदय है...और वहां का एक दिन धरती के 14 दिन के बराबर होता है...जिस साउथ पोल पर चंद्रयान-3 उतरा है...वहां सूरज की किरणें तिरछी पड़ती हैं और ज्यादातर हिस्से पर अंधेरा रहता है...इसलिए भी चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग भारत की बड़ी उपलब्धि है...विक्रम लैंडर से निकलकर प्रज्ञान रोवर चंद्रमा की सतह पर चलेगा 14 दिन तक प्रयोग करेगा....लैंडर और रोवर दोनों में उपकरण और कैमरे लगे हैं...रोवर जहां चंद्रमा की सतह की जानकारी जुटाएगा....पानी, मिट्टी और चट्टानों के मटीरियल्स की जांच करेगा...वहीं विक्रम लैंडर चंद्रमा की सिस्मिक और एटमॉस्फेयर की एक्टिविटी जांचेगा...चंद्रमा पर क्योंकि भारत के चंद्रयान-1 ने ही पानी का पता लगाया था...इसलिए अब चंद्रयान-3 वहां पानी और जीवन की संभावनाएं तलाशेगा...भारत के चंद्रयान-3 मिशन की कुल लागत 615 करोड़ रूपये है और इसरो के वैज्ञानिकों ने इतनी कम लागत में चंद्रयान-3 को चांद पर उतारकर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है....

    3 min

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