एंटिफ्रैजीलिएंट OS: डेली नॉवशिफ्ट ट्रांसमिशन्स

Dr Abhimanyou Raathore

हर सुबह, गहन ध्यान के बाद, Dr. Abhimanyou Raathore — एक अनुभवी क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, फंक्शनल मेडिसिन प्रैक्टिशनर, और Antifragilient OS के निर्माता — एक ऊर्जा-समृद्ध ट्रांसमिशन साझा करते हैं, जो आंतरिक और बाहरी रूपांतरण के लिए समर्पित है। इन ट्रांसमिशन्स की जड़ें स्वयं अनुभव में हैं — बर्नआउट, बीमारी, और जीवन की गहराइयों से उभरकर पाए गए उत्तरों में। हर एपिसोड एक वैज्ञानिक स्पष्टता और आध्यात्मिक समर्पण से भरा हुआ कोड है — जो न केवल मानसिक ऊर्जा को स्थानांतरित करता है, बल्कि आत्मा को भी स्पर्श करता है। यह कोई प्रेरणादायक भाषण नहीं है। यह एक आह्वान है — आत्मा की ओर लौटने का, छः शरीरों को पुनर्संरेखित करने का, और जीवन को अपने पूर्ण सामर्थ्य व शांति की लय में जीने का। Antifragilient OS के ये दैनिक ट्रांसमिशन्स उन लोगों के लिए हैं जो थक चुके हैं, जागने की प्रक्रिया में हैं, या अपनी सर्वोच्च क्षमता में जीना चाहते हैं। यह है NowShift — वह क्षण जहाँ सब कुछ बदलने लगता है। 🎧 रोज़ सुनें। शब्दों को अपने भीतर उतरने दें। मौन को आपको पुनः संपूर्ण करने दें।

  1. R.A.A.G.A - The P.U.L.S.E of L.I.F.E  मिनी सीरीज़ (भाग 2 / 6) : जब आपका पूरा अस्तित्व एक ही भावनात्मक सच दोहराने लगे

    10/23/2025

    R.A.A.G.A - The P.U.L.S.E of L.I.F.E मिनी सीरीज़ (भाग 2 / 6) : जब आपका पूरा अस्तित्व एक ही भावनात्मक सच दोहराने लगे

    Send us a text क्या हो अगर आपका पूरा तंत्र एक ही संदेश पकड़ सके— “हम सुरक्षित हैं। हम बढ़ सकते हैं।” और वो संदेश ज़िन्दगी की शोर में भी गूंजता रहे? यही है रेज़ोनेंस। एक जैविक सामंजस्य, जहाँ दिल, फेफड़े, आँत, दिमाग और अवचेतन अलग‑अलग दिशाओं में खिंचने की बजाय एक ही सुर बजाने लगते हैं। इस एपिसोड में, हम समझेंगे कि आधुनिक VUCA दुनिया—Volatility, Uncertainty, Complexity, Ambiguity—कैसे इस गूंज को तोड़ती है और इसे वापस कैसे लाया जाए ताकि आपके निर्णय साफ़ रहें और आपकी ऊर्जा बिखरे नहीं। हम शरीर को एक ऑर्केस्ट्रा की तरह देखते हैं— दिल भावनात्मक रिद्म पकड़ता हैफेफड़े सांस की धुन ले जाते हैंआंतें गहराई और बास देती हैंदिमाग बौद्धिक स्कोर लिखता हैअवचेतन टाइमिंग और ट्रांज़िशन संभालता है जब यह सब एक ही भावनात्मक सच दोहराते हैं—intuition तेज़ होती है, nervous system रेगुलेट रहता है और momentum टूटता नहीं। लेकिन VUCA इसे यूँ बिगाड़ देती है— Volatility—सीना कसता है, सांस छोटी होती हैUncertainty—सिग्नल हिलता हैComplexity—बहुत सारे इनपुट सर्किट ओवरलोड करते हैंAmbiguity—अंदर से मिले-जुले आदेश मिलते हैं, इच्छा शक्ति बिखर जाती है नतीजा? बाहर सब ठीक लगता है, भीतर एक भी भावनात्मक सुर टिक नहीं पाता। अब समाधान— RAAGA quietly शिफ्ट करता है। Personalized Freedom Loops (PFLs) पीछे‑पीछे baseline ठीक करते हैं— सांस गहरी होती हैvagal tone सुधरती हैinner parts की लड़ाई कम होती है PTAAL Loops हल्की, सुरक्षित movement लाते हैं जिससे आप— साफ सोचते हैंsmooth respond करते हैंchaos में भी center पकड़ लेते हैं ट्रिगर फिसल जाते हैं। निर्णय साफ़ लगते हैं। अंदर की आवाज़ बदलती है— Am I safe? → It’s possible → I can do this → How far can I grow? आप रिएक्शन से नहीं, रेज़ोनेंस से जीने लगते हैं। 🎧 अपना Field Re-Tune करना चाहते हैं? एपिसोड सुनिये और फिर DM करें REALIGN Instagram पर: @DrAbhimanyou_psychologist ₹4,999 या $59.99 देकर एक छोटा‑सा 5 प्रश्न वाला फ़ॉर्म भरें, और आपको मिलेंगे— 2 फ्री PFL Loops7‑Day PTAAL सेट100‑Day Guidance अगर यह एपिसोड काम आया— फ़ॉलो करें, शेयर करें और एक छोटा‑सा रिव्यू लिखें क्योंकि शायद कोई और आपकी ही खोज में हो। डॉ. अभिमन्यु राठौड़ द्वारा प्रस्तुत पॉडकास्ट सुनने के लिए धन्यवाद। 🔗 इंस्टाग्राम पर फॉलो करें:@drabhimanyou_psychologist 💬 हमारे नि:शुल्क बर्नआउट रिवर्सल समुदाय से जुड़ें: Transform Burnout Facebook Group ✨ रोज़ाना की ट्रांसमिशन सुनने के लिए सब्सक्राइब करें 📤 इस एपिसोड को उस व्यक्ति के साथ साझा करें जिसे आज इसकी ज़रूरत है

    21 min
  2. R.A.A.G.A - The P.U.L.S.E of L.I.F.E  मिनी सीरीज़ (भाग 1 / 6): कैसे सुरक्षा वापस लौटती है तंत्रिका तंत्र में

    10/22/2025

    R.A.A.G.A - The P.U.L.S.E of L.I.F.E मिनी सीरीज़ (भाग 1 / 6): कैसे सुरक्षा वापस लौटती है तंत्रिका तंत्र में

    Send us a text “सुरक्षा जब नर्वस सिस्टम में लौटती है” जब दुनिया लगातार अस्थिर, अनिश्चित, जटिल और अस्पष्ट बनी रहती है, तो नर्वस सिस्टम तर्क की बात नहीं सुनता। सर्वाइवल ब्रेन कंट्रोल ले लेता है, सोचने वाला दिमाग बंद हो जाता है, और जर्नलिंग, अफ़र्मेशन्स, माइंडफुलनेस, थेरेपी जैसे सबसे अच्छे टूल भी पहाड़ चढ़ाने जैसे लगते हैं। यह इसलिए नहीं कि आप आलसी हैं या अनुशासनहीन, बल्कि इसलिए क्योंकि आपका शरीर किसी टकराव के लिए तैयार हो रहा है। इस एपिसोड में, डॉ. अभिमन्यु राठौरे, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और Antifragilient OS के संस्थापक, एक अलग प्रकार के हीलिंग द्वार का परिचय कराते हैं: ध्वनि और लय। शरीर भाषा से पहले लय को समझता है। जब लय लौटती है, तो सुरक्षा लौटती है — और सिस्टम बिना ज़बरदस्ती या इच्छाशक्ति के खुद को रीऑर्गनाइज़ करने लगता है। आप सीखेंगे कि RAAGA अप्रोच किस तरह शरीर के छह स्तरों—शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, आध्यात्मिक, ऊर्जात्मक और इलेक्ट्रिक—में संतुलन लाता है, वह भी पैसिव लिसनिंग लूप्स के ज़रिए: •Personalized Freedom Loops आपकी पहचान और विज़न को काम, वर्कआउट, शाम और नींद के दौरान एंकर करते हैं। •PTAAL Loops भीड़-भाड़, शोर और डर से भरे माहौल में आपकी प्रगति को प्रोटेक्ट करते हैं। न कोई अनुशासन चाहिए। न कोई माइंडसेट ट्रिक। बस सुनना है — और नर्वस सिस्टम उसे स्वीकार करता है। हम ये भी समझते हैं: •क्यों “सिर भारीपन” किसी समस्या का नहीं, बल्कि अवचेतन पुनर्गठन का संकेत है •क्यों हर किसी की हीलिंग टाइमलाइन अलग होती है •कैसे लय आपकी नई बेसलाइन बनती है: कम क्रैश, तेज़ रिकवरी, स्थिर रिएक्शन, और एक शांत दिमाग •RAAGA के पीछे का प्राचीन सिद्धांत: आग (गति) और जल (दया) का मिलना ज़रूरी है — ज़्यादा आग आपको जला देती है, ज़्यादा पानी आपको रोक देता है हीलिंग अब एक मेहनत नहीं रहती — यह एक स्टेट बन जाती है जिसमें आप प्रवेश करते हैं। अगर आप थक चुके हैं सिर्फ़ कोपिंग करते-करते और तैयार हैं एक नए तरीके से विकसित होने के लिए — तो यह एपिसोड आपको स्पष्टता, भाषा और दिशा देगा। 100-दिन की Soul Guarantee के साथ लूप्स को ज़रूर आज़माएं। सब्सक्राइब करें। रिव्यू दें। और किसी ऐसे इंसान से शेयर करें जो फंसा हुआ महसूस करता है। और हमें बताएं: आपके जीवन में सबसे ज़्यादा किस चीज़ में लय वापस लाना चाहेंगे? डॉ. अभिमन्यु राठौड़ द्वारा प्रस्तुत पॉडकास्ट सुनने के लिए धन्यवाद। 🔗 इंस्टाग्राम पर फॉलो करें:@drabhimanyou_psychologist 💬 हमारे नि:शुल्क बर्नआउट रिवर्सल समुदाय से जुड़ें: Transform Burnout Facebook Group ✨ रोज़ाना की ट्रांसमिशन सुनने के लिए सब्सक्राइब करें 📤 इस एपिसोड को उस व्यक्ति के साथ साझा करें जिसे आज इसकी ज़रूरत है

    29 min
  3. जब रिश्ते भी डराने लगें

    10/21/2025

    जब रिश्ते भी डराने लगें

    Send us a text कभी ऐसा लगा है कि सामने वाला इंसान सुरक्षित है…  फिर भी दिल पीछे हट जाता है? इस अंतिम एपिसोड में, डॉ. अभिमानी राठोर बताते हैं कि ट्रॉमा सिर्फ़ यादों में नहीं रहता — वह हमारे nervous system में पैटर्न बनाकर बैठ जाता है। यही पैटर्न आज के रिश्तों में दूरी, डर, ओवरथिंकिंग, क्लिंगीनेस, या अचानक गायब हो जाने जैसे व्यवहारों में बदल जाते हैं। हम उन अदृश्य तरीकों को समझते हैं जिनसे ट्रॉमा रिश्ते कठिन बना देता है, जैसे— • अपनी असली ज़रूरतें छुपाना  • माइक्रो‑ट्रस्ट टेस्ट करना  • घनिष्ठता से बचना  • अच्छे लोगों के साथ भी असुरक्षित महसूस करना  • चीज़ें बेहतर होते ही पीछे हट जाना  • खुद ही रिश्ता बिगाड़ देना (self‑sabotage) डॉ. राठोर बताते हैं कि ये सब “लोगों से बचना” नहीं है—  ये ट्रिगर से बचना है। ये दर्द के दोहराव से बचना है। और यही समझ हीलिंग का पहला दरवाज़ा खोलती है। अगर आज की बातचीत में आपको एक भी जगह खुद का प्रतिबिंब दिखा हो, तो जान लें—  आप टूटी नहीं हैं, आप conditioned हैं।  और conditioning बदली जा सकती है। यह एपिसोड रिश्तों में सुरक्षा की भाषा सिखाता है—अपने शरीर को पढ़ने की, अपने डर को संभालने की, और सही लोगों के साथ धीरे‑धीरे खुलने की। सुनिए, नोट कीजिए, और एक छोटा कदम चुनिए जो आप आज से दोहरा सकें। क्योंकि सुरक्षा बड़े इशारों से नहीं,  स्थिरता से खिलती है। डॉ. अभिमन्यु राठौड़ द्वारा प्रस्तुत पॉडकास्ट सुनने के लिए धन्यवाद। 🔗 इंस्टाग्राम पर फॉलो करें:@drabhimanyou_psychologist 💬 हमारे नि:शुल्क बर्नआउट रिवर्सल समुदाय से जुड़ें: Transform Burnout Facebook Group ✨ रोज़ाना की ट्रांसमिशन सुनने के लिए सब्सक्राइब करें 📤 इस एपिसोड को उस व्यक्ति के साथ साझा करें जिसे आज इसकी ज़रूरत है

    7 min
  4. रोशनी की ओर वापसी: दिवाली का उपहार – रीअलाइनमेंट का

    10/20/2025

    रोशनी की ओर वापसी: दिवाली का उपहार – रीअलाइनमेंट का

    Send us a text आज 20 अक्टूबर 2025 है। डॉ. अभिमन्यु राठौर, एंटिफ्रैजीलिएंट OS: डेली नॉवशिफ्ट ट्रांसमिशन्स के संस्थापक, अपने पॉडकास्ट का एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं — दिवाली के दिन, रोशनी और संपन्नता का प्रतीक। 15 अगस्त को उन्होंने इस पॉडकास्ट को जानबूझकर पॉज़ किया था — इसलिए नहीं कि गति रुक गई थी, बल्कि इसलिए कि वे खुद उस दर्द को समझना चाहते थे जो किसी इंसान के टूटने के समय उसके भीतर चलता है। उन्होंने खुद अपने जीवन में अनुशासन तोड़ा — नींद बिगाड़ी, पैसे हटा दिए, और खुद को उसी स्थिति में रखा जिसमें लाखों लोग फंसे रहते हैं। उस अंधेरे से जन्म हुआ — Antifragilient Bio-Acoustic Alignment Loops (ABAA Loops) का। एक ऐसा सिस्टम जो बिना इच्छाशक्ति के अंदर से बदलाव शुरू कर देता है। ✨ किसी ने 18 साल पुराने रिश्ते में घंटे भर में सीमा खींची, ✨ किसी ने 10 साल पुराने सपने पर 2 दिन में कार्रवाई की, ✨ किसी को अचानक आर्थिक सहयोग मिला बिना माँगे। ये जादू नहीं — आर्किटेक्चर और रेज़ोनेंस का संगम है। दिवाली पर, ये एक उपहार है — उन सभी के लिए जो थक चुके हैं जूझते-जूझते। 🌿 DM REALIGN करें अपना Personalized Loop System पाने के लिए (₹4,999) — 100 दिन की Soul Guarantee के साथ।  💫 या DM REVIVE करें फ्री पैक के लिए। 📩 Instagram: @drabhimanyou_psychologist डॉ. अभिमन्यु राठौड़ द्वारा प्रस्तुत पॉडकास्ट सुनने के लिए धन्यवाद। 🔗 इंस्टाग्राम पर फॉलो करें:@drabhimanyou_psychologist 💬 हमारे नि:शुल्क बर्नआउट रिवर्सल समुदाय से जुड़ें: Transform Burnout Facebook Group ✨ रोज़ाना की ट्रांसमिशन सुनने के लिए सब्सक्राइब करें 📤 इस एपिसोड को उस व्यक्ति के साथ साझा करें जिसे आज इसकी ज़रूरत है

    15 min
  5. जब असलियत धुंधली पड़ जाती है

    08/15/2025

    जब असलियत धुंधली पड़ जाती है

    Send us a text एपिसोड 6/7 — ट्रॉमा सिम्प्टम्स मिनी सीरीज़ कभी ऐसा लगा है जैसे आप ज़िंदगी को किसी धुंधली खिड़की से देख रहे हों? या फिर समय जैसे अचानक गायब हो गया हो? ये कोई कमजोरी नहीं, बल्कि आपके तंत्रिका तंत्र का संरक्षण तंत्र है। एंटिफ्रैजीलिएंट OS: डेली नॉवशिफ्ट ट्रांसमिशन्स के इस एपिसोड में, डॉ. अभिमन्यु राठौर बताते हैं कि कैसे ट्रॉमा हमारे देखने, सुनने और महसूस करने के अनुभव को बदल देता है। वे चार प्रमुख संवेदी लक्षणों को सरल भाषा में समझाते हैं: हैलूसिनेशन — ऐसी चीज़ें देखना या सुनना जो असल में नहीं हैं।समय का गायब होना — घंटों या दिनों का बिना याद के निकल जाना।डिपरसनलाइज़ेशन — अपने ही शरीर से अलगाव महसूस होना।डिरेअलाइज़ेशन — आसपास की दुनिया का सपना जैसी लगना।ये अनुभव जितने भ्रमित करने वाले लगते हैं, उतने ही महत्वपूर्ण भी हैं, क्योंकि ये इशारा करते हैं कि आपके अंदर कुछ ऐसा है जिसे प्यार, समय और उपचार की ज़रूरत है। यह एपिसोड उन सभी के लिए है जो अपनी वास्तविकता में बदलाव महसूस करते हैं या किसी प्रियजन के साथ यह अनुभव साझा करते हैं। यह जानना ही उपचार की दिशा में पहला कदम है। 📌 अगले और आख़िरी एपिसोड में हम बात करेंगे कि ट्रॉमा हमारे रिश्तों और दूसरों से जुड़ाव की क्षमता को कैसे प्रभावित करता है। डॉ. अभिमन्यु राठौड़ द्वारा प्रस्तुत पॉडकास्ट सुनने के लिए धन्यवाद। 🔗 इंस्टाग्राम पर फॉलो करें:@drabhimanyou_psychologist 💬 हमारे नि:शुल्क बर्नआउट रिवर्सल समुदाय से जुड़ें: Transform Burnout Facebook Group ✨ रोज़ाना की ट्रांसमिशन सुनने के लिए सब्सक्राइब करें 📤 इस एपिसोड को उस व्यक्ति के साथ साझा करें जिसे आज इसकी ज़रूरत है

    4 min
  6. जब आपका शरीर आपसे बात करता है, तो सुनिए

    08/14/2025

    जब आपका शरीर आपसे बात करता है, तो सुनिए

    Send us a text (एपिसोड 5/7: ट्रॉमा सिम्प्टम्स मिनी सीरीज़) हमारा शरीर हमेशा हमसे संवाद करता है। कभी पीठ दर्द बनकर, कभी सिरदर्द, तो कभी थकान या नींद न आने की समस्या बनकर। सवाल यह है — क्या हम उसकी भाषा सुन पाते हैं? एंटिफ्रैजीलिएंट OS: डेली नॉवशिफ्ट ट्रांसमिशन्स के ट्रॉमा सिम्प्टम्स मिनी सीरीज़ के पाँचवे एपिसोड में, डॉ. अभिमन्यु राठौर बताते हैं कि कैसे अनसुलझे भावनात्मक घाव हमारे शरीर में संग्रहित होकर शारीरिक लक्षणों के रूप में सामने आते हैं। क्रोनिक थकानसिरदर्द और माइग्रेनपाचन संबंधी समस्याएँअनिद्रा और नींद विकारभूख में बदलावअजीब या अनजानी शारीरिक संवेदनाएँइन सभी लक्षणों के पीछे छिपी है एक गहरी कहानी। डॉ. राठौर मेटाफिजिकल एनाटॉमी और बायोडिकोडिंग के नज़रिए से बताते हैं कि शरीर के ये संकेत वास्तव में हमारी अनकही भावनाओं और संघर्षों का आईना हैं। यह एपिसोड आपको यह समझने में मदद करेगा कि आपका शरीर केवल तकलीफ़ नहीं दे रहा, वह आपको एक संदेश दे रहा है। जब हम इन संदेशों को सुनना शुरू करते हैं, तभी असली उपचार की प्रक्रिया शुरू होती है। अगले एपिसोड में हम समझेंगे कि ट्रॉमा हमारे इंद्रियों के अनुभव को कैसे बदल देता है — और यह हमारे दैनिक जीवन को किस तरह प्रभावित करता है। डॉ. अभिमन्यु राठौड़ द्वारा प्रस्तुत पॉडकास्ट सुनने के लिए धन्यवाद। 🔗 इंस्टाग्राम पर फॉलो करें:@drabhimanyou_psychologist 💬 हमारे नि:शुल्क बर्नआउट रिवर्सल समुदाय से जुड़ें: Transform Burnout Facebook Group ✨ रोज़ाना की ट्रांसमिशन सुनने के लिए सब्सक्राइब करें 📤 इस एपिसोड को उस व्यक्ति के साथ साझा करें जिसे आज इसकी ज़रूरत है

    8 min
  7. ट्रॉमा आपके सोचने के तरीके को कैसे बदल देता है

    08/13/2025

    ट्रॉमा आपके सोचने के तरीके को कैसे बदल देता है

    Send us a text ट्रॉमा केवल हमारे भावनात्मक स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि हमारी सोचने और निर्णय लेने की क्षमता को भी गहराई से प्रभावित करता है। डॉ. अभिमन्यु राठौर, एंटिफ्रैजीलिएंट ओपरेटिंग सिस्टम के संस्थापक, इस एपिसोड में बताते हैं कि ट्रॉमा के संज्ञानात्मक लक्षण कैसे हमारे विचारों, फैसलों और खुद के प्रति दृष्टिकोण को बदल देते हैं। इस चौथे भाग में, वे सात प्रमुख लक्षणों की चर्चा करते हैं: निर्णय लेने में कठिनाई या असमर्थतालगातार आत्म-आलोचनाध्यान और एकाग्रता में समस्याभ्रम और मानसिक उलझनस्मृति में खाली जगह या गैप्सनकारात्मक या चिंताजनक विचारों में फंसे रहनास्वयं के बारे में गहरे नकारात्मक विश्वासडॉ. राठौर इन लक्षणों को कमजोरी नहीं, बल्कि जीवित रहने के लिए मस्तिष्क द्वारा विकसित सुरक्षा तंत्र के रूप में देखते हैं। जागरूकता के साथ, इन पैटर्न्स को समझना और बदलना संभव है। 🎧 एंटिफ्रैजीलिएंट OS: डेली नॉवशिफ्ट ट्रांसमिशन्स की ट्रॉमा सिम्प्टम्स मिनी सीरीज़ का यह चौथा भाग सुनें — Apple Podcast, Spotify और JioSaavn पर उपलब्ध। अगले एपिसोड में हम ट्रॉमा के शारीरिक लक्षणों पर गहराई से चर्चा करेंगे। डॉ. अभिमन्यु राठौड़ द्वारा प्रस्तुत पॉडकास्ट सुनने के लिए धन्यवाद। 🔗 इंस्टाग्राम पर फॉलो करें:@drabhimanyou_psychologist 💬 हमारे नि:शुल्क बर्नआउट रिवर्सल समुदाय से जुड़ें: Transform Burnout Facebook Group ✨ रोज़ाना की ट्रांसमिशन सुनने के लिए सब्सक्राइब करें 📤 इस एपिसोड को उस व्यक्ति के साथ साझा करें जिसे आज इसकी ज़रूरत है

    5 min
  8. ट्रॉमा के व्यवहारिक लक्षण: अतीत से उपजे छिपे पैटर्न

    08/12/2025

    ट्रॉमा के व्यवहारिक लक्षण: अतीत से उपजे छिपे पैटर्न

    Send us a text ट्रॉमा सिम्प्टम्स मिनी सीरीज़ – एपिसोड 3 में आपका स्वागत है क्या आप खुद को हमेशा काम में डूबा हुआ पाते हैं, या फिर प्रेरणा की कमी, लत, या सामाजिक अलगाव से जूझते हैं? क्या कभी आपने सोचा है कि यह सब आपकी कमजोरी नहीं, बल्कि अतीत के अनुभवों से उपजे सुरक्षा तंत्र हो सकते हैं? इस एपिसोड में, डॉ. अभिमन्यु राठौर, एंटिफ्रैजीलिएंट ओपरेटिंग सिस्टम के संस्थापक, बताते हैं कि ट्रॉमा कैसे हमारे व्यवहार को बिना हमारी जानकारी के आकार देता है। वे 12 सामान्य व्यवहारिक लक्षणों का विश्लेषण करते हैं — जैसे लत, प्रेरणा की कमी, खाने के विकार, आवेगपूर्ण निर्णय, अदृश्य बाधाएं, भावनात्मक अभिव्यक्ति में कठिनाई, यौन जीवन में चुनौतियां, सामाजिक असहजता, अलगाव, और अपनी क्षमताओं से कम स्तर पर प्रदर्शन करना। इन पैटर्न्स को पहचानना और समझना, आत्म-करुणा और गहरी आत्म-जागरूकता की ओर पहला कदम है। यह समझ आपके व्यवहार को दोष की नजर से नहीं, बल्कि जीवित रहने की बुद्धिमान रणनीति के रूप में देखने का मौका देती है। 🎧 एंटिफ्रैजीलिएंट OS: डेली नॉवशिफ्ट ट्रांसमिशन्स पर यह एपिसोड सुनें — Apple Podcasts, Spotify और JioSaavn पर उपलब्ध। अगले एपिसोड में हम ट्रॉमा के संज्ञानात्मक लक्षणों की पड़ताल करेंगे — जिन्हें जानना आपकी हीलिंग यात्रा के लिए बेहद जरूरी है। डॉ. अभिमन्यु राठौड़ द्वारा प्रस्तुत पॉडकास्ट सुनने के लिए धन्यवाद। 🔗 इंस्टाग्राम पर फॉलो करें:@drabhimanyou_psychologist 💬 हमारे नि:शुल्क बर्नआउट रिवर्सल समुदाय से जुड़ें: Transform Burnout Facebook Group ✨ रोज़ाना की ट्रांसमिशन सुनने के लिए सब्सक्राइब करें 📤 इस एपिसोड को उस व्यक्ति के साथ साझा करें जिसे आज इसकी ज़रूरत है

    7 min

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हर सुबह, गहन ध्यान के बाद, Dr. Abhimanyou Raathore — एक अनुभवी क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, फंक्शनल मेडिसिन प्रैक्टिशनर, और Antifragilient OS के निर्माता — एक ऊर्जा-समृद्ध ट्रांसमिशन साझा करते हैं, जो आंतरिक और बाहरी रूपांतरण के लिए समर्पित है। इन ट्रांसमिशन्स की जड़ें स्वयं अनुभव में हैं — बर्नआउट, बीमारी, और जीवन की गहराइयों से उभरकर पाए गए उत्तरों में। हर एपिसोड एक वैज्ञानिक स्पष्टता और आध्यात्मिक समर्पण से भरा हुआ कोड है — जो न केवल मानसिक ऊर्जा को स्थानांतरित करता है, बल्कि आत्मा को भी स्पर्श करता है। यह कोई प्रेरणादायक भाषण नहीं है। यह एक आह्वान है — आत्मा की ओर लौटने का, छः शरीरों को पुनर्संरेखित करने का, और जीवन को अपने पूर्ण सामर्थ्य व शांति की लय में जीने का। Antifragilient OS के ये दैनिक ट्रांसमिशन्स उन लोगों के लिए हैं जो थक चुके हैं, जागने की प्रक्रिया में हैं, या अपनी सर्वोच्च क्षमता में जीना चाहते हैं। यह है NowShift — वह क्षण जहाँ सब कुछ बदलने लगता है। 🎧 रोज़ सुनें। शब्दों को अपने भीतर उतरने दें। मौन को आपको पुनः संपूर्ण करने दें।