Dawood Ibrahim Full Life Story In Hindi | December 26, 1955 To 2026

LUIS NOIR

अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम - पुलिस के बेटे से लेकर 'ग्लोबल टेररिस्ट' तक की विस्तृत कहानी "दुनिया के सबसे खूंखार अपराधियों की लिस्ट में शुमार, जिस पर 25 मिलियन डॉलर (करीब 200 करोड़ रुपये) का ईनाम है [1]... यह कहानी है एक पुलिस वाले के बेटे की, जो डोंगरी की गलियों से उठकर अंडरवर्ल्ड का बेताज बादशाह और फिर 'ग्लोबल टेररिस्ट' बन गया। यह कहानी है दाऊद इब्राहिम कास्कर की।" दाऊद इब्राहिम कास्कर का जन्म 26 दिसंबर 1955 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के खेड़ में एक कोंकणी मुस्लिम परिवार में हुआ था [2, 3]। उसके पिता, इब्राहिम कास्कर, मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच में हेड कांस्टेबल थे और मां अमीना बी एक गृहिणी थीं [3, 4]। दाऊद मुंबई के डोंगरी इलाके (तेमकर मोहल्ला) में पला-बढ़ा और अहमद सेलर हाई स्कूल से पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी 5 दाऊद का पहला बड़ा अपराध 4 दिसंबर 1974 को हुआ [6]। तत्कालीन डॉन हाजी मस्तान से बदला लेने के लिए दाऊद और उसके गुर्गों ने एक टैक्सी लूटी, उन्हें लगा कि उसमें मस्तान का पैसा है [6]। लेकिन वो पैसा असल में मेट्रोपॉलिटन बैंक का था (4,75,000 रुपये) और यह उस दशक की सबसे बड़ी बैंक डकैती बन गई [7]। जब दाऊद के पिता को पता चला कि इस बैंक डकैती में उनके बेटे का हाथ है, तो उन्होंने उसकी बेल्ट से जमकर पिटाई की और उसे पुलिस थाने ले जाकर जुर्म कबूल करवाया [8, 9]। जल्द ही दाऊद ने अपने भाई शब्बीर के साथ मिलकर 'डी-कंपनी' (D-Company) बनाई [10]। 1981 में, पठान गैंग के समद खान ने दाऊद के भाई शब्बीर की बेरहमी से हत्या कर दी [11, 12]। भाई की मौत ने दाऊद को खून का प्यासा बना दिया और 1984 में उसने समद खान को मौत के घाट उतार दिया [11, 12]। पुलिस की बढ़ती सख्ती और समद खान की हत्या के मुकदमों से बचने के लिए 1986 में दाऊद भारत छोड़कर दुबई भाग गया [3, 11]। दुबई से उसने अपने साम्राज्य को एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट में बदल दिया ज

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अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम - पुलिस के बेटे से लेकर 'ग्लोबल टेररिस्ट' तक की विस्तृत कहानी "दुनिया के सबसे खूंखार अपराधियों की लिस्ट में शुमार, जिस पर 25 मिलियन डॉलर (करीब 200 करोड़ रुपये) का ईनाम है [1]... यह कहानी है एक पुलिस वाले के बेटे की, जो डोंगरी की गलियों से उठकर अंडरवर्ल्ड का बेताज बादशाह और फिर 'ग्लोबल टेररिस्ट' बन गया। यह कहानी है दाऊद इब्राहिम कास्कर की।" दाऊद इब्राहिम कास्कर का जन्म 26 दिसंबर 1955 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के खेड़ में एक कोंकणी मुस्लिम परिवार में हुआ था [2, 3]। उसके पिता, इब्राहिम कास्कर, मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच में हेड कांस्टेबल थे और मां अमीना बी एक गृहिणी थीं [3, 4]। दाऊद मुंबई के डोंगरी इलाके (तेमकर मोहल्ला) में पला-बढ़ा और अहमद सेलर हाई स्कूल से पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी 5 दाऊद का पहला बड़ा अपराध 4 दिसंबर 1974 को हुआ [6]। तत्कालीन डॉन हाजी मस्तान से बदला लेने के लिए दाऊद और उसके गुर्गों ने एक टैक्सी लूटी, उन्हें लगा कि उसमें मस्तान का पैसा है [6]। लेकिन वो पैसा असल में मेट्रोपॉलिटन बैंक का था (4,75,000 रुपये) और यह उस दशक की सबसे बड़ी बैंक डकैती बन गई [7]। जब दाऊद के पिता को पता चला कि इस बैंक डकैती में उनके बेटे का हाथ है, तो उन्होंने उसकी बेल्ट से जमकर पिटाई की और उसे पुलिस थाने ले जाकर जुर्म कबूल करवाया [8, 9]। जल्द ही दाऊद ने अपने भाई शब्बीर के साथ मिलकर 'डी-कंपनी' (D-Company) बनाई [10]। 1981 में, पठान गैंग के समद खान ने दाऊद के भाई शब्बीर की बेरहमी से हत्या कर दी [11, 12]। भाई की मौत ने दाऊद को खून का प्यासा बना दिया और 1984 में उसने समद खान को मौत के घाट उतार दिया [11, 12]। पुलिस की बढ़ती सख्ती और समद खान की हत्या के मुकदमों से बचने के लिए 1986 में दाऊद भारत छोड़कर दुबई भाग गया [3, 11]। दुबई से उसने अपने साम्राज्य को एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट में बदल दिया ज