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Do Bailon Ki Katha

मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य के प्रमुख लेखकों में से एक माने जाते हैं। उनकी कहानियाँ समाज के आम जीवन को बेहद सजीव रूप में प्रस्तुत करती हैं, जिससे पाठक एक जुड़ाव महसूस करते हैं। उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों की गहराई को सरल, परंतु प्रभावी ढंग से ब्यान करती हैं। 'दो बैलों की कथा' प्रेमचंद की ऐसी ही एक भावुक कहानी है, जिसमें दो बैलों, हीरा और मोती, की दोस्ती और उनके साहस की अद्भुत मिसाल देखने को मिलती है। यह कहानी इन जानवरों के प्रति इंसानों के व्यवहार को तो उजागर करती ही है, साथ ही साथ हीरा और मोती की आपसी समझ, त्याग और संघर्ष भी बताती है। तो आइए, सुनते है इन दो बैलों की कहानी और जानते हैं कि कैसे ये दो बैल अपने मालिक के प्रति अपनी निष्ठा और समर्पण दिखाते हैं, और कैसे वह विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी एकता और समझदारी से कठिनाइयों का सामना करते हैं। अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ: https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

Avsnitt

  1. AVSNITT 1

    हीरा और मोती की दोस्ती

    हीरा और मोती नाम के दो बैल थे, जिनके बीच आपसी समझ और बहुत गहरी दोस्ती थी। झूरी नाम के किसान के ये दोनों बैल न केवल काम में निपुण थे, बल्कि एक-दूसरे का सुख-दुख भी समझते थे। लेकिन जब अचानक झूरी इन्हें अपने ससुराल भेज देता है, तो हीरा और मोती यह सोचकर परेशान हो जाते हैं कि उन्हें बेच दिया गया है। उन्हें लगने लगता है कि जिस मालिक से वो इतना प्रेम करते हैं, उसका इतना काम करते हैं, वो उन्हें खुद से दूर क्यों कर रहा है। तो आइये सुनते हैं मुंशी प्रेमचंद की इस खूबसूरत कहानी का पहला भाग! अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ: https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

    5 min
  2. AVSNITT 2 • ENDAST FÖR ABONNENTER

    दुख भरे दिन

    नए स्थान पर पहुँचने के बाद, दोनों बैल अपने पुराने घर और मालिक को याद करते रहे। भूख के बावजूद, वे नाँद में मुँह तक नहीं डालते, क्योंकि वे दुखी थे। झूरी की पत्नी की कठोर बातें और उनका अपमान उनके मन को और भी आहत करते रहे। जब झूरी का साला उन्हें फिर से काम में लगाता है, तो मोती की शरारतें बढ़ जाती हैं, लेकिन हीरा अधिक सहनशील रहता है। तो आइये सुनते हैं मुंशी प्रेमचंद की इस खूबसूरत कहानी का यह दूसरा भाग और जानते हैं कि क्या हीरा और मोती अपने बंधन को बनाए रख सकेंगे, या ये कठिनाइयाँ उन्हें तोड़ देंगी? अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ: https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

    5 min
  3. AVSNITT 4 • ENDAST FÖR ABONNENTER

    साहस भरा संघर्ष

    हीरा और मोती को पूरा दिन भूखे रहने के बाद यह एहसास होता है कि वे कितनी गंभीर स्थिति में हैं। काँजीहौस की अंधेरी दीवारों के पीछे, जहां न कोई चारा है और न कोई उम्मीद, हीरा की विद्रोह की भावना और भी प्रबल हो जाती है। मोती, जो पहले से ही कमजोर महसूस कर रहा है, अपने मित्र को सहारा देने की कोशिश करता है। हीरा दीवार को तोड़ने का साहस जुटाता है, लेकिन जैसे ही वह प्रयास करता है, चौकीदार उसे पकड़ लेता है। फिर मोती दीवार को गिराने की कोशिश करता है। तो आइये सुनते हैं मुंशी प्रेमचंद की इस खूबसूरत कहानी का यह चौथा भाग और जानते हैं कि हीरा और मोती अपने लक्ष्य में कामयाब हो पाये या नहीं? अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ: https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

    4 min
  4. AVSNITT 5 • ENDAST FÖR ABONNENTER

    घर वापसी

    एक हफ्ते तक बंधे रहने के बाद, हीरा और मोती की नीलामी का दिन आता है। दोनों मित्रों को निकाला जाता है, लेकिन उनकी सूरत देखकर कोई भी उन्हें खरीदने के लिए तैयार नहीं होता। फिर एक कठोर व्यक्ति उनके पास आता है, और दोनों के मन में डर का माहौल छा जाता है। वे अपने भाग्य को लेकर निराश होते हैं, लेकिन फिर भी आशा नहीं छोड़ते। नए मालिक के साथ जाते समय अचानक, उन्हें उस रास्ते का एहसास होता है, जो उन्हें उनके घर की ओर ले जाता है। उनकी थकान और कमजोरी क्षण भर में गायब हो जाती है, और दोनों अपने थान की ओर दौड़ने लगते हैं। तो आइये सुनते हैं मुंशी प्रेमचंद की इस खूबसूरत कहानी का यह आखरी भाग और जानते हैं कि हीरा और मोती वापस अपने घर पहुँच पाएंगे या नहीं? अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ: https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

    5 min

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मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य के प्रमुख लेखकों में से एक माने जाते हैं। उनकी कहानियाँ समाज के आम जीवन को बेहद सजीव रूप में प्रस्तुत करती हैं, जिससे पाठक एक जुड़ाव महसूस करते हैं। उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों की गहराई को सरल, परंतु प्रभावी ढंग से ब्यान करती हैं। 'दो बैलों की कथा' प्रेमचंद की ऐसी ही एक भावुक कहानी है, जिसमें दो बैलों, हीरा और मोती, की दोस्ती और उनके साहस की अद्भुत मिसाल देखने को मिलती है। यह कहानी इन जानवरों के प्रति इंसानों के व्यवहार को तो उजागर करती ही है, साथ ही साथ हीरा और मोती की आपसी समझ, त्याग और संघर्ष भी बताती है। तो आइए, सुनते है इन दो बैलों की कहानी और जानते हैं कि कैसे ये दो बैल अपने मालिक के प्रति अपनी निष्ठा और समर्पण दिखाते हैं, और कैसे वह विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी एकता और समझदारी से कठिनाइयों का सामना करते हैं। अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ: https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

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