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Research and Analysis of the day's top stories with Ravish Kumar.

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Research and Analysis of the day's top stories with Ravish Kumar.

    रवीश कुमार का प्राइम टाइम : जासूसी पर जांच- ममता ने न्यायिक आयोग बनाया, केंद्र ने फिर टरकाया

    रवीश कुमार का प्राइम टाइम : जासूसी पर जांच- ममता ने न्यायिक आयोग बनाया, केंद्र ने फिर टरकाया

    पेगसास जासूसी कांड की जांच में एक नया मोड़ आ गया है. छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मामले की जांच का ऐलान किया था लेकिन इससे एक कदम आगे जाते हुए बंगाल की सरकार ने न्यायिक आयोग का गठन कर दिया है. दिल्ली आने से पहले ममता बनर्जी ने अपने मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला किया. इस न्यायिक आयोग का प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मदन लोकुर को बनाया गया है. कोलकाता हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस ज्योतिर्मय भट्टाचार्य भी इस आयोग के सदस्य होंगे.

    • 30 min
    रवीश कुमार का प्राइम टाइम : जासूसी कांड पर इजरायल जांच को तैयार, भारत का इनकार

    रवीश कुमार का प्राइम टाइम : जासूसी कांड पर इजरायल जांच को तैयार, भारत का इनकार

    पेगासस जासूसी कांड को लेकर इजरायल, फ्रांस, हंगरी को नहीं लगता कि इससे उनके देश की छवि खराब हो रही है. बल्कि इन देशों में चिंता इस बात को लेकर है, कि विपक्ष के नेता, सरकार के मुखिया और पत्रकारों से लेकर नागरिकों के फोन की जासूसी ठीक बात नहीं है. क्या ये अजीब नहीं है कि जिस देश की कंपनी है एनएसओ, उस देश में इसकी जांच हो रही है. लेकिन भारत में नहीं. इजरायल के रक्षा मंत्रालय ने बकायदा आयोग का गठन कर दिया है,जो पता लगाएगा कि सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल नागरिकों की जासूसी के लिए तो नहीं हुआ? इजरायल की कंपनी एनएसओ सिर्फ इसी शर्त पर सरकारों को सॉफ्टवेयर बेचती कि वे आतंक के मामले में पता लगाने के लिए इसका इस्तेमाल करेंगे. एनएसओ कह रही है कि दुनिया की किसी भी देश की सरकार जानकारी मांगेगी तो हम मदद के लिए तैयार हैं, और हमारी भारत सरकार जानकारी ही नहीं मांग रही. इस कंपनी ने 45 देशों को अपना सॉफ्टवेयर बेचा है. इजरायल के रक्षा मंत्रालय की अनुमति के बाद से ही कंपनी अपना सॉफ्टवेयर किसी भी देश को बेचती है.

    • 32 min
    रवीश कुमार का प्राइम टाइम : सच छापा तो पड़ गया छापा

    रवीश कुमार का प्राइम टाइम : सच छापा तो पड़ गया छापा

    अगर आप सरकार से सवाल करना चाहते हैं. आलोचना करना चाहते हैं तो पहले एक काम कीजिए. आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय, जिसे ईडी कहते हैं, उनके अधिकारियों से पूछ लीजिए कि कितना तक लिखें तो छापा पड़ेगा? कितना तक न लिखें तो छापा नहीं पड़ेगा? अभी तक चुनाव आते ही विपक्षी दलों के नेताओं और उनसे जुड़े लोगों के यहां छापेमारी होने लग जाती थी. लेकिन क्या अब खबर छापने और दिखाने के बाद या उसके कारण छापेमारी होने लगी है? आपातकाल शब्द इतना घिस चुका है, कि आप इसके इस्तेमाल से कुछ भी नहीं कह पाते हैं. काल के नए-नए रूप आ गए हैं. दूसरी लहर के दौरान हिंदी ही नहीं, अंग्रेजी अखबारों में भास्कर अकेला ऐसा अखबार है, जिसने नरसंहार को लेकर सरकार से असहज सवाल पूछे. उन बातों से पर्दा हटा दिया, जिन्हें ढंकने की कोशिश हो रही थी. इस दौरान भास्कर के पत्रकारों ने न केवल अच्छी रिपोर्टिंग की, बल्कि महामारी की रिपोर्टिंग में नए-नए पहलू भी जोड़ दिए.

    • 30 min
    रवीश कुमार का प्राइम टाइम : क्या ऑक्सीजन की कमी से दम तोड़ते लोगों की हक़ीक़त केंद्र को नहीं नज़र

    रवीश कुमार का प्राइम टाइम : क्या ऑक्सीजन की कमी से दम तोड़ते लोगों की हक़ीक़त केंद्र को नहीं नज़र

    क्या आप बिल्कुल किसी ऐसे को नहीं जानते, जो दूसरी लहर के समय ऑक्सीजन के लिए मारे-मारे फिर रहे थे. बिल्कुल भी आप ऐसे किसी को नहीं जानते? जिनकी मौत अस्पताल के भीतर ऑक्सीजन की सप्लाई ठप्प हो जाने के कारण हुई, फिर सोशल मीडिया पर ऑक्सीजन सिलेंडर और ऑक्सीजन बेड मांगने वाले वे लोग कौन थे? मोदी सरकार की स्वास्थ्य राज्य मंत्री डॉक्टर प्रवीण भारती पवार के एक जवाब ने आप सभी को फेक न्यूज में बदल दिया है. पहले फेक न्यूज ने आपको बदला, अब आपको ही फेक न्यूज में बदल दिया गया है. क्या राज्य सरकारें लिखकर दे देंगी, तो क्या उसे संसद में जस का तस रख दिया जाएगा? जिस संसद को जनता की आवाज कहा जाता है. क्या ये वाकई जनता की आवाज है कि कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत नहीं हुई?

    • 34 min
    रवीश कुमार का प्राइमटाइम : सरकार गिराने को जासूसी, सरकार बनाने को जासूसी

    रवीश कुमार का प्राइमटाइम : सरकार गिराने को जासूसी, सरकार बनाने को जासूसी

    फ्रांस में पेगासस जासूसी कांड को लेकर जांच होगी. इस जांच में पता लगाया जाएगा कि क्या फ्रॉड तरीके से किसी के इलेक्ट्रॉनिक ऊपकरण की जानकारी हासिल की गई और निजता का उल्लंघन हुआ. भारत सरकार ने न तो अभी तक जांच की बात कही है, न कहा है कि किसने पैसा दिया था खरीदने के लिए. अगर खरीदा गया है तो, ये भी नहीं बता रही है कि पेगासस खरीदा गया है या नहीं. अगर आपको लगता है कि ये मामला दो-चार विधायकों के फोन रिकॉर्डिंग का है, तो उस लिहाज से भी आप ये फिल्म देख सकते हैं. ‘ऑल द प्रेसीडेंट्स मेन’, जिसकी कहानी यह थी कि अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के लोगों ने डेमोक्रेट सांसदों की बैठक में फोन रिकॉर्डिंग करने के यंत्र लगा दिए और उनके दस्तावेजों की चोरी कर ली. जब वांशिगटन पोस्ट के संवाददाता ने इस साजिश का भांडा फोड़ दिया और खबर छपी, तो आज तक दुनिया में वाटर गेट की मिसाल दी जाती है.

    • 30 min
    रवीश कुमार का प्राइम टाइम : पेगासस कांड, सावधान! जासूस फोन सुन रहा है

    रवीश कुमार का प्राइम टाइम : पेगासस कांड, सावधान! जासूस फोन सुन रहा है

    पेगासस जासूसी कांड में पत्रकारों के अलावा अब विपक्ष के नेताओं के भी नाम आ गए हैं. 'द वायर' ने रविवार के बाद आज एक और रिपोर्ट छापी है, जिसमें इसकी पुष्टि की गई है कि जासूसी के लिए 300 फोन नंबरों की एक सूची बनाई गई थी, जिसमें राहुल गांधी के भी दो नंबर शामिल हैं. इसी सूची में राहुल से जुड़े 9 और नंबर डाले गए थे लेकिन राहुल ने नंबर बदल लिया था. राहुल ने 'द वायर' से कहा है कि उनके व्हाट्सएप पर अतीत में संदिग्ध मैसेज आए हैं. जासूसी के लिए ही ऐसा किया जाता है. राहुल ने कहा, “यदि आपकी जानकारी सही है, तो इस स्तर की निगरानी व्यक्तियों की गोपनीयता पर हमले से आगे की बात है. यह हमारे देश की लोकतांत्रिक नींव पर हमला है. इसकी गहन जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें सजा दी जाए.” राहुल के अलावा उनके सहयोगी अलंकार सवाई, सचिव राव का नाम भी सूची में है. राहुल गांधी के सात गैर-राजनीतिक दोस्तों के भी नाम हैं.

    • 30 min

Customer Reviews

4.7 out of 5
30 Ratings

30 Ratings

Telugu_Abbai ,

Ravish is a gift

Do yourself a favor and start following reportage and analysis by Ravish Kumar. And you’ll be better for it.

Othenon ,

Stop with the shouting matches

I am looking to get news of Covid and some on the ground reports that was the hallmark of this podcast in the past.

More than half of each of the recent episodes is a shouting match between the host and some one from the central government. Totally uninformative and doesn’t serve the public one bit.

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