यादों का घरौंदा; Healing the Broken Hearts:Manish Rai

manish rai

" इलाहाबाद" गंगा -यमुना की गोद में सरस्वती की अविरत साधना में लीन असंख्य प्रतियोगियों के त्याग,तपस्या आऔर बलिदान का साक्षी ये गांव नुमा शहर जिसकी कोख में पलते हैं अनगिनत बड़े-बड़े ख्वाब... महत्त्वाकांक्षा के मोतियों से गुंथा हुआ नदी के द्वीप सा शहर जहां इश्क पर्याय और मुहब्बत को गला पिघलाकर दोस्ती के सांचे में ढालना सरस्वती के ह साधक की निहित विवशता है... जहां हर आदत, चाहत,नशा और मुहब्बत का बस एक ही रंग होता है; लक्ष्य की साधना,सेलेक्शन पाना,प्रत्येक शाखा का वृक्ष बनकर कर्तव्य की बलि वेदी में समा जाना..स्मृति इसी ताने-बाने से उपजी एक ऐसी चासनी का नाम है जहां नियति ने प्रेम को पिघलाकर दोस्ती के

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" इलाहाबाद" गंगा -यमुना की गोद में सरस्वती की अविरत साधना में लीन असंख्य प्रतियोगियों के त्याग,तपस्या आऔर बलिदान का साक्षी ये गांव नुमा शहर जिसकी कोख में पलते हैं अनगिनत बड़े-बड़े ख्वाब... महत्त्वाकांक्षा के मोतियों से गुंथा हुआ नदी के द्वीप सा शहर जहां इश्क पर्याय और मुहब्बत को गला पिघलाकर दोस्ती के सांचे में ढालना सरस्वती के ह साधक की निहित विवशता है... जहां हर आदत, चाहत,नशा और मुहब्बत का बस एक ही रंग होता है; लक्ष्य की साधना,सेलेक्शन पाना,प्रत्येक शाखा का वृक्ष बनकर कर्तव्य की बलि वेदी में समा जाना..स्मृति इसी ताने-बाने से उपजी एक ऐसी चासनी का नाम है जहां नियति ने प्रेम को पिघलाकर दोस्ती के