Vandana

Vandana Anand

Beautiful and Mesmerising Stories from All over the world ,soothing stories specially chosen from all walks of life. Start your day with them or make ur children listen at night as bedtime stories... Surely these stories will help you make u Better person...😊

  1. 06/18/2020

    नर्क क्या है?अपने व्यवहार से मिलता सवाल का जवाब।

    अपने व्यवहार से ही मिलता सवाल का जबाब एक दार्शनिक समस्याओं के अत्यंत सटीक समाधान बताते थे। एक बार उनके पास एक सेनापति पहुंचा और स्वर्ग-नरक के विषय में जानकारी चाही। दार्शनिक ने उसका पूर्ण परिचय पूछा तो उसने अपने वीरतापूर्ण कार्यों के बारे में सविस्तार बताया। उसकी बातें सुनकर दार्शनिक ने कहा - शक्ल सूरत से तो आप सेनापति नहीं भिखारी लगते हैं। मुझे विश्वास नहीं होता कि आप में हथियार उठाने की क्षमता भी होगी। दार्शनिक की अपमानजनक बातें सुनकर सेनापति को गुस्सा आ गया। उसने म्यान से तलवार निकाला ली। यह देखकर दार्शनिक ठहाका लगाते हुए बोले - अच्छा तो आप तलवार भी रखते हैं। यह शायद काठ की होगी। लोहे की होती तो अब तक आपके हाथ से छूटकर गिर गई होती। अब तो सेनापति आप से बाहर हो गया। उसकी आँखे क्रोध से लाल हो गई और वह दार्शनिक पर हमला करने को उद्यत हो गया। तभी दार्शनिक ने गंभीर होकर कहा - बस यही नरक है। क्रोध में उन्मत होकर आपने अपना विवेक खो दिया और मेरी हत्या करने को तत्पर हो गए। दार्शनिक की बात सुनकर सेनापति ने शांत होकर तलवार म्यान में वापस रख ली। तब दार्शनिक ने कहा - विवेक जाग्रत होने पर व्यक्ति को अपनी भूलों का अहसास होने लगता है। मन शांत होने से स्थिरता आती है और दिव्य आनंद की अनुभूति होती है। यही यह है कि आत्म - नियंत्रण से विवेक उपजता है जिसके कारण अनुचित कर्म या व्यवहार पर रोक लगती है और जीवन में शांति व संतोष की अनुभूति होती है।

    3 min
  2. 06/16/2020

    दौलत शोहरत और पद की कीमत।

    *पद की कीमत* प्राचीन चीन राज्य में एक दर्शनिक थे। नाम था... *'चुआंग जू'*। वे बहुत विद्वान और सूझबूझ वाले माने जाते थे। एक बार चीनी प्रधानमंत्री का पद रिक्त हो गया तो सभासदों और अन्य मंत्रीगणों के सुझाव पर राजा ने *'चुआंग जू'* को प्रधानमंत्री बनाने का निर्णय किया। तय किया गया कि सरकारी सिपाही जाकर भावी मंत्री को उनके गाँव से आदर समेत ले आएँगे फिर उन्हें पदभार सौंपा जाएगा। राजा के सिपाही पहुँचे *'चुआंग जू'* के गाँव में लोगों से पता चला कि वे इस वक्त नदी किनारे बँसी से मछली पकड रहे हैं। सिपाही वहीं पहुँचे, देखा वे सिपाहियों की ओर पीठ किये बैठे हैं। सिपाहियों ने उन्हें पुकारा तो उन्होंने उसी तरह बैठे-बैठे सिपाहियों से वहाँ आने का कारण पूछा। सिपाहियों ने बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री के पद के लिए चुना गया है सो वे उनके साथ चलें और अपना पद भार ग्रहण करें। 'चुआंग जू' उसी तरह बैठे-बैठे बोले- *“एक बात बताओ?”* सिपाही- *“जी, पूछिये।“* 'चुआंग जू'- *“मैने सुना है, राजा के महल में एक राजमंदिर है। जिसमें सोने की वेदी पर एक कछुवा रखा है... वह तीन सौ साल पहले मर गया था। कहते हैं तब से ही उसके शव को पवित्र मान कर उसे सोने की वेदी पर सजा कर उसकी पूजा होती आ रही है। क्या तुम बता सकते हो वह कछुवा क्या पसंद करता? मर कर सोने की वेदी पर पूजा जाना या जीवित रह कर कीचड में दुम हिलाना?”* सिपाही तपाक से बोला- *“बेशक, जीवित रह कर कीचड में दुम हिलाना।"* ये सुनते ही 'चुआंग जू' महोदय दहाडे- *“तो दफा हो जाओ यहाँ से... मुझे भी जीवित रह कर कीचड में दुम हिलाना पसंद है।"* मित्रों! इस कहानी का सार यह है कि *पद कितना भी उँचा हो, दौलत-शोहरत कितनी भी ज्यादा हो वास्तव में ये सब व्यक्ति के सहज-सरल व्यक्तित्व और जीवन की समानता नहीं कर सकते। सो इन्हें इतनी ही तवज्जो दीजिए जितने से ये आपके स्वाभाविक जीवन को नष्ट ही न कर दें। अगर आपको लगता है कि ये आपके लिए ना होकर आप इनके लिए हो कर रह गए हैं तो इन्हें ‘ना’ कहने की हिम्मत भी रखें। कहने का अर्थ ये कि दौलत-शोहरत-पद इतने कीमती नहीं है कि इन्हें पाने के लिए जीवन को ही दांव पर लगा दिया जाए* .

    4 min

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