Farzi Khabar - सच का सबक

Farzi Khabar

Podcast फ़र्ज़ी ख़बर की नयी पहल है| जिसे देश की हर आदमी फ़र्ज़ी खबर की आवाज़ सुन सके | जिसे देश की हर आदमफ़र्ज़ी ख़बर एक फ़ेक न्यूज़ अग्गरेगटोर वेब्सायट हैं जहाँ आपको 24*7 अप्डेटेड वो न्यूज़ मिलेगी जो आपको पता कुछ और होगी और उसकी सच्चयी कुछ और होगी ।। फ़र्ज़ी ख़बर की वेबसाइट https://www.farzikhabar.in हैं जहाँ आप कभी भी विज़िट कर सकते हैं ।। वेब्सायट के अलावा फ़र्ज़ी ख़बर ने सोशीयल मीडिया पर भी अपनी पकड़ बना ली हैं जिससे हर उम्र तक के लोगों तक ज़्यादा से ज़्यादा फैली हुई फ़र्ज़ी ख़बरों की वास्तविकता और साथ ही साथ इतिहास की भी फ़र्ज़ी ख़बरों

  1. 06/08/2020

    Exposed 23! क्या पुराने समय में पृथ्वी के सपाट होने की धारणा थी पनपी? जानें सच!

    सपाट पृथ्वी (flat earth) की मिथक एक आधुनिक समय की गलत धारणा है कि यूरोप में मध्य युग के दौरान पृथ्वी को विद्वानों और शिक्षित लोगों द्वारा गोलाकार के बजाय सपाट (flat earth) माना जाता था । क्या थे विद्वानों के तर्क वितर्क? आईए इस बारे में जानते हैं । एक गोलाकार पृथ्वी का सबसे पहला प्रलेखन प्राचीन यूनानियों (5 वीं शताब्दी ईसा पूर्व) से आता है। 600 ईस्वी से, विद्वानों ने इस दृष्टिकोण का समर्थन किया है, और प्रारंभिक मध्य युग (700-1500 ईस्वी) तक, लगभग सभी विद्वानों ने गोलाकार दृष्टिकोण में ही अपना विश्वास रखा । 1400 के दशक से, शिक्षित यूरोपीय लोगों के बीच एक सपाट पृथ्वी (flat earth) का विश्वास लगभग किसी में नहीं था । कई काल्पनिक प्रसिद्ध चित्रों में पृथ्वी को सपाट दिखाने के बावजूद भी इस बात पर विश्वास करने वाले लोगों की कमी थी । और पढ़े :-

  2. 06/08/2020

    Exposed 21! क्या सच में जीसस क्रिसमस के दिन हुए थे पैदा? जानिए चौकाने वाला सच!

    जीसस, जिन्हें जीसस क्राइस्ट (Jesus Christ) भी कहा जाता है, पहली सदी के यहूदी उपदेशक और धार्मिक नेता थे। वह ईसाई धर्म के केंद्रीय व्यक्ति हैं। अधिकांश ईसाई मानते हैं कि वह ईश्वर पुत्र का अवतार हैं और पुराने नियम में जिनका उल्लेख है, वे वही मसीहा हैं । जीसस (Jesus Christ) एक गैलीलियन यहूदी थे, जिसे जॉन बैपटिस्ट ने ईसाई बना दिया और अपना स्वयं का मंत्रालय शुरू किया। वे मौखिक रूप से उपदेश दिया करते थे और अक्सर उन्हें “रब्बी” कहा जाता था। उन्हें यहूदी अधिकारियों द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था, और फिर उन्हें रोमन सरकार के हवाले कर दिया गया था । रोमन अधिकारी पोंटियस पिलाटे के आदेश पर उन्हें सूली पर चढ़ाया गया था । उनकी मृत्यु के बाद, उनके अनुयायियों का मानना था कि वह मरने के बाद फिरसे ज़िंदा हो उठे हैं, और उन्होंने जिस समुदाय का गठन किया वह अंततः चर्च बन गया। और पढ़े

  3. 06/08/2020

    Exposed 19! क्या आचार्य चाणक्य ने मगध साम्राज्य में फैलाई एक महामारी? जानिए सच!

    प्राचीन काल के मगध साम्राज्य में बिन्दुसार नामक राजा था जो कि महान राजा चन्द्रगुप्त मौर्य का पुत्र एवं चक्रवर्ती सम्राट अशोक का पिता था । बिन्दुसार के दरबार में कई मंत्री थे परंतु उनमें से सबसे बुद्धिमान और चतुर थे आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya)। आचार्य चाणक्य को अर्थशास्त्र का ज्ञाता माना जाता था । उन्होंने ही चन्द्रगुप्त मौर्य के साथ मगध साम्राज्य की नीव रखी थी एवं चन्द्रगुप्त मौर्य को सिंहानसन पर बिठाने में भी आचार्य चाणक्य की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही थी । आचार्य चाणक्य ने मगध साम्राज्य को सक्षमता से चलाने के लिए अर्थशास्त्र नामक किताब लिखी थी जिसमें राज्य को सफलतापूर्वक चलाने के लिए कई राजनीतिक नीतियों का वर्णन किया था । चाणक्य साम, दाम, दंड या भेद, किसी भी रूप से अपना कार्य पूर्ण करवाने के लिए जाने जाते हैं । कुछ समय पूर्व कलर्स चैनल पर चक्रवर्ती अशोक सम्राट नाम का एक सीरियल आया करता था जिसमें आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) के बारे में कई दिलचस्प कहानियां भी थी ।  इसी में से एक कहानी में वर्णन किया गया है की आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) द्वारा मगध साम्राज्य में एक महामारी फैलाई गई है जिसके कारण कई लोगों को बुरे स्वास्थ्य से पीड़ित देखा जा सकता है । क्या सच में यह महामारी आचार्य चाणक्य(Acharya Chanakya) द्वारा फैलाई गई ? जी नहीं यह कथन कतई सत्य नहीं है । आइए जानते हैं इस महामारी के पीछे किसका था हाथ।

  4. 06/08/2020

    Exposed 17! क्या चाणक्य ने मारा था चन्द्रगुप्त की बीवी को? जानिए सच्चाई! 

    चाणक्य (Chanakya) एक प्राचीन भारतीय शिक्षक, दार्शनिक, अर्थशास्त्री, न्यायविद और शाही सलाहकार थे। उन्हें पारंपरिक रूप से कौटिल्य या विष्णुगुप्त के रूप में पहचाना जाता है, जिन्होंने प्राचीन भारतीय राजनीतिक ग्रंथ, अर्थशास्त्र, को दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व और तीसरी शताब्दी सीई के बीच लिखा था । उन्हें भारत में राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में अगुआ माना जाता है, और उनके काम को शास्त्रीय अर्थशास्त्र का एक महत्वपूर्ण अग्रदूत माना जाता है। उनकी रचनाएँ गुप्त साम्राज्य के अंत में खो गईं और बीसवीं शताब्दी की शुरुआत होने तक फिर से खोजी नहीं जा सकीं । चाणक्य ने सत्ता में आने के पहले मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त की सहायता की। मौर्य साम्राज्य की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए उन्हें व्यापक रूप से श्रेय दिया जाता है। चाणक्य (Chanakya) ने दोनों सम्राटों चंद्रगुप्त और उनके बेटे बिन्दुसार के मुख्य सलाहकार के रूप में कार्य किया।

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