बदलाव मंच विचार गोष्ठी

NYI DUNIYA KE AFSANE WITH JEET

धर्म को तू धारण तो कर, उड़ान है तू परवाज़ तो बन। क्या रखा है तथाकथित धर्म की परिभाषा में इंसान है तू इंसान तो बन।। धर्मनिरपेक्षता क्या है बताता हूँ, आवाज़ है तू शब्द तो बन। क्या रखा है किसी को नीचा गिराने में इंसान है तू इंसान तो बन।। ये मेरी 8 पंक्तियों की छोटी-सी लघु कविता।पहली बार whatsapp पर कवि सम्मलेन में भाग लेकर बहुत अच्छा महसूस हो रहा है सच में इस बदलाव मंच का एक नन्हा-सा फ़नकार बनकर बहुत गर्व अनुभव करता हूँ। शेष विचार ऑडियो में 🙏🙏🙏 © जितेन्द्र विजयश्री पाण्डेय "जीत" प्रयागराज, उत्तरप्रदेश

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धर्म को तू धारण तो कर, उड़ान है तू परवाज़ तो बन। क्या रखा है तथाकथित धर्म की परिभाषा में इंसान है तू इंसान तो बन।। धर्मनिरपेक्षता क्या है बताता हूँ, आवाज़ है तू शब्द तो बन। क्या रखा है किसी को नीचा गिराने में इंसान है तू इंसान तो बन।। ये मेरी 8 पंक्तियों की छोटी-सी लघु कविता।पहली बार whatsapp पर कवि सम्मलेन में भाग लेकर बहुत अच्छा महसूस हो रहा है सच में इस बदलाव मंच का एक नन्हा-सा फ़नकार बनकर बहुत गर्व अनुभव करता हूँ। शेष विचार ऑडियो में 🙏🙏🙏 © जितेन्द्र विजयश्री पाण्डेय "जीत" प्रयागराज, उत्तरप्रदेश