मन का मेंढक (Man Ka Mendhak)

Deepti Yadav

जो दिल में है वो कह डालो, मत सोचों की दुनिया क्या कहेगी। हर वक़्त, हर जगह बौद्धिक होना ज़रूरी नहीं। पेट पालने के लिए पैसों की ज़रूरत होती है लेकिन वक़्त काटने के लिए पागलपंती की ज़रूरत ज़बरदस्त पड़ती है, तो आइये मिलकर थोड़ा पागलपन करते है, बवाल काटते है और बिना एक दुसरे को देखे एक दूसरे की कल्पना करते है......

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जो दिल में है वो कह डालो, मत सोचों की दुनिया क्या कहेगी। हर वक़्त, हर जगह बौद्धिक होना ज़रूरी नहीं। पेट पालने के लिए पैसों की ज़रूरत होती है लेकिन वक़्त काटने के लिए पागलपंती की ज़रूरत ज़बरदस्त पड़ती है, तो आइये मिलकर थोड़ा पागलपन करते है, बवाल काटते है और बिना एक दुसरे को देखे एक दूसरे की कल्पना करते है......