DROPLETS OF INK

DROPLETS OF INK PUBLICATION

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  1. 08/22/2020

    इश्क़ BY RITU KHARE

    मोहब्बत नहीं है तुमसे, हां मगर तुमसे दूर रहना, हम पसंद नहीं। इश्क़ का इजहार हर बार हो, इसकी ज़रूरत भी तो नहीं। मोहब्बत बेहिसाब है मगर, सबकी मोहब्बत मुकम्मल भी तो नहीं। तुमसे कह दे इश्क़ है मगर, तुझे मुझपर ऐतबार तो नहीं। बस इसलिए बार बार कहते हैं हम, हमें तुमसे मोहब्बत नहीं। नफ़रत नहीं है तुमसे... बस थक गए हैं हम, तुम पर ऐतबार करते-करते। झूठ बारीकी से बोलते हो तुम, प्यार का इजहार करते-करते।। कहते हो इश्क़ है हमसे मगर, मोहब्बत है तुम्हें ये लगता तो नहीं। गलती हर बार हमारी होती है, तुम्हारी क्यूं नहीं।। हां, नफ़रत अब भी नहीं है तुमसे मगर, अब तुमसे मोहब्बत हमें भी नहीं!!

    इश्क़ BY RITU KHARE

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