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Mediabharti.net is a news portal for all netizens. It is an effort to provide a complete informative solution for everyone. You are free to post your comments and participate in discussions in a common endeavour to bridge the communication divide. You may find this platform useful for expression of your ideas, frustrations, longings and downright cynical outbursts. We have tried to include news, comments and critical analysis. We include regular columns on various issues that are in the public eye, plus self-promotion fundas, career, food etc too.

Mediabharti.net Dharmendra Kumar

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    उत्तर की तुलना में ज्यादा 'समझदार' है दक्षिण भारत का मीडिया

    उत्तर की तुलना में ज्यादा 'समझदार' है दक्षिण भारत का मीडिया

    उत्तर और दक्षिण भारत के मीडिया में एक बड़ा अंतर यह है कि दक्षिण में खबरों को 'सनसनीखेज' बनाकर पेश करने का चलन उतना नहीं है जितना देश के उत्तरी इलाकों में है। देश के दोनों हिस्सों के बीच मीडिया के प्रस्तुतीकरण में अंतर को स्पष्ट कर रही हैं ह्यूमरटाइम्स.कॉम की संपादक मुक्ता गुप्ता...

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    हिंदी पत्रकारिता के उन्नयन में मददगार है ऑनलाइन माध्यम

    हिंदी पत्रकारिता के उन्नयन में मददगार है ऑनलाइन माध्यम

    ऑनलाइन माध्यमों के उत्कर्ष के बाद पत्रकारिता, खासकर हिंदी पत्रकारिता के उन्नयन में मदद ही मिली है। इसे अन्य माध्यमों के लिए खतरे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वर्तमान मीडिया परिक्षेत्र के बदले हुए माहौल में ऑनलाइन पत्रकारिता के योगदान पर चर्चा कर रहे हैं मीडियाभारती.नेट के संपादक धर्मेंद्र कुमार...

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    देश को नहीं है ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की जरूरत

    देश को नहीं है ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की जरूरत

    ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का मुद्दा ‘गर्मी’ पकड़ने लगा है। साथ ही, यह बहस भी एक बार फिर शुरू हो चुकी है कि क्या ऐसा करना जरूरी है। पांच साल में 'एक बार' और 'एक साथ' चुनाव के लिए जो 'वजहें' बताई जा रही हैं, बेशक उनमें से कई 'जायज' हैं, लेकिन की वजहें किसी भी तरह से गले नहीं उतरती हैं। 'सुखी लोकतंत्र' के लिए रोजाना कहीं न कहीं चुनाव होते ही रहने चाहिए, नेताओं को अपना 'रिपोर्ट कार्ड' मिलते रहना चाहिए। राम मनोहर लोहिया ने कभी कहा था कि जिंदा कौमें पांच साल तक इंतजार नहीं करती तो फिर आज की सत्ता एक जिंदा कौम को ऐसा करने पर मजबूर क्यों कर रही है? इसी मुद्दे से जुड़े कई सवालों पर मीडियाभारती.नेट से बात कर रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार विनीत सिंह।

    • 19 min
    इतनी भी आसान नहीं है 'पांच ट्रिलियन डॉलर' की अर्थव्यवस्था...

    इतनी भी आसान नहीं है 'पांच ट्रिलियन डॉलर' की अर्थव्यवस्था...

    कोरोना के चलते 'पांच ट्रिलियन डॉलर' की अर्थव्यवस्था के सपने को एक बड़ी चोट पहुंची है। अब इसे लेकर सरकार द्वारा उठाए गए आगामी 'ठोस' कदम ही तय करेंगे कि यह 'सपना' सिर्फ सपना ही रहेगा या कोई मूर्त रूप ले पाएगा। इस विषय पर विस्तार से बता रहे हैं मीडियाभारती.नेट के संपादक धर्मेंद्र कुमार...

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    तीन महीने के खर्चे जितनी बचत है बेहद जरूरी

    तीन महीने के खर्चे जितनी बचत है बेहद जरूरी

    आपद काल में छोटी बचतें कितनी कारगर साबित हो सकती हैं, मीडियाभारती.नेट से बात करते हुए बता रहे हैं वित्त नियोजक अभिनव गुप्ता...

    • 54 sec
    अब 'साइलेंट वोटर' ही खोलेगा सत्ता का द्वार

    अब 'साइलेंट वोटर' ही खोलेगा सत्ता का द्वार

    चुनावी प्रक्रिया में, 'साइलेंट वोटर' के रूप में एक नया 'फिनोमिना' सामने आया है। मतदाताओं का यह वर्ग अपनी 'राय' जाहिर नहीं करता है, सिर्फ वोट करता है। मतदाताओं के इस नए रूप और व्यवहार के बारे में मीडियाभारती.इन से बात कर रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार ब्रज खंडेलवाल।

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