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Rajeev Singh

A perfect blend of Some solo Podcasts and some guests (different Domain experts) visions will enrich your wisdom to handle obstacles through out the life. Tune in to listen motivating success and Failure stories. Experts Interviews. Overcome Stress of Exam, Job and Relationship. Interesting Love, Lust and Breakup stories.

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  1. 01/20/2021

    SAMAY SAMAY KI BAAT HAI | PENNED & RECITED BY RAJEEV SINGH | Poetry on Time/samay/waqt | i S2DIO

    समय समय की बात है.. अरे समय की ही तो बात है, की आज कल समय बिल्कुल नहीं हमारे पास  वो भी क्या समय था.. जब समय हीं समय था सबके पास  और एक आज का समय है, देख लो..यही की, बस समय समय की बात है|  अब ये भी एक इतफाक देखो की  समय कितना हुआ, ये घडी तय करती है; और आपके पास घडी कौन सी है  ये समय तय करता है  समय है तो अपने समय का बहुत पक्का निरंतर चला करता है अपनी राह  और अपनी रफतार में.. परंतु इस दौड में घडी कभी कभी पिछे छूट जाती है  और समय आगे निकल जाता.. फिर हम रह जाते हैं,बिखर जाते है; नए समय की तालाश में  यही तो बस, समय समय की बात है||  फिर समय आता है अपने समय पर मरहम लेकर उस समय को भूल जाने को  फिर समय बन जाता है सहारा तब जूट जाता है इंसां अच्छे समय के आ जाने पर, यही समय की चक्रवात है.. यही तो समय समय की बात है||    धन्यवाद / आभार   Singh D. Rajeev Note;- COPYRIGHT RESERVED WITH THE OWNER.

    SAMAY SAMAY KI BAAT HAI | PENNED & RECITED BY RAJEEV SINGH | Poetry on Time/samay/waqt | i S2DIO
  2. 01/17/2021

    Munasib Nahi Ki Baith Jau Main... Motivational Poem by Rajeev Singh

    मुनासिब नहीं की बैठ जाऊ मैं थक कर, हिम्मत कर दो कदम मुझे बढ़ाना ही होगा । बस थोड़ा पस्त हुआ हूँ, परास्त नहीं मैं फिर से सम्बल उठाना ही होगा ।। सबकी अपनी रफ़्तार थी, कोई धीमी कोई तेज़ गति से निकल गया । मेरी गुमनामी में मुझे छोड़ जाने वालों, एक दिन तुम्हे वापस आना ही होगा ।। मुनासिब नहीं की बैठ जाऊ मैं थक कर, हिम्मत कर दो कदम मुझे बढ़ाना ही होगा ।। खुद कामयाबी हाथ आएगी, ऐसा नहीं चाहता मैं कुआं कभी आएगा प्यासे के पास, ऐसा नहीं सोचता मैं । कही इस आस में प्यास से न मर जाऊं मैं, दबे पाँव उस तक मुझे जाना ही होगा ।। मुनासिब नहीं की बैठ जाऊ मैं थक कर, हिम्मत कर दो कदम मुझे बढ़ाना ही होगा ।। अवशेष दबे पड़े है पाताल में, कुछ कोयले कुछ लोहे बन जायेंगे। बेशक मुझे और दबा दे विधाता, तुम्हें मुझे हीरा बनाना ही होगा।। मुनासिब नहीं की बैठ जाऊ मैं थक कर, हिम्मत कर दो कदम मुझे बढ़ाना ही होगा ।। मुनासिब नहीं की बैठ जाऊ मैं थक कर, हिम्मत कर दो कदम मुझे बढ़ाना ही होगा । बस थोड़ा पस्त हुआ हूँ, परास्त नहीं मैं फिर से सम्बल उठाना ही होगा ।। Penned and Recited by Rajeev Singh All Copyrights are Reserved with i S2DIO

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