ठेठ भारतीय

Abhishek Gupta

मुझे जो समझ मे आता है वैसा बोलता हूँ , कोई फ़ालतू का ड्रामा ढकोसला दिखावा नहीं। आपको समझ आये तोह ठीक नहीं तोह टाटा बाय-बाय अलविदा। बाक़ी शरीफ़ और समझदार आदमी हूँ , काफ़ी पढ़ा-लिखा भी हूँ। घाट-घाट का पानी पिया है मैंने , अच्छा-बुरा सब समझता हूँ। और हाँ..... थोक के भाव में दिल तुड़वाया हुआ आशिक़ भी हूँ और आर्थिक अकाल भी पड़ा हुआ है मेरे जीवन में। किस्मत फूटी है वो अलग।

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मुझे जो समझ मे आता है वैसा बोलता हूँ , कोई फ़ालतू का ड्रामा ढकोसला दिखावा नहीं। आपको समझ आये तोह ठीक नहीं तोह टाटा बाय-बाय अलविदा। बाक़ी शरीफ़ और समझदार आदमी हूँ , काफ़ी पढ़ा-लिखा भी हूँ। घाट-घाट का पानी पिया है मैंने , अच्छा-बुरा सब समझता हूँ। और हाँ..... थोक के भाव में दिल तुड़वाया हुआ आशिक़ भी हूँ और आर्थिक अकाल भी पड़ा हुआ है मेरे जीवन में। किस्मत फूटी है वो अलग।