MSUVACH

Manoj Shrivastava

Manoj Shrivastava is an Author and self motivated leader. In this series of podcasts you will find a lot of Knowledge and Inspiration.

  1. 03/16/2021

    तीन स्वर्ण मुद्राएं

    जीवन में कितना कुछ मिला हुआ है, अक़्सर हमारा ध्यान उन चीज़ों पर नहीं टिकता। जो भी हमारे पास है उसे हम अपना अधिकार समझ लेते हैं, न तो हम उसके लिए कृतज्ञ होते और ना ही उसका आनन्द ले पाते। लेकिन हमारे जीवन में यदि कोई कमी है या कुछ नुक़सान हो गया तो उसकी शिकायत करते रहते हैं और अपना सारा ध्यान उसका अफ़सोस मनाने में लगा देते हैं, जबकि ख़ुश होने की ज़्यादा वज़हें मौज़ूद होती हैं। जीवन का दूसरा नाम ही आनंद है, जो भी मिला है उसके प्रति कृतज्ञता का भाव रखें, उसके साथ ख़ुश रहें। जो चला गया उसका अफ़सोस करने की बज़ाय यह सोचें कि वह आपका था ही नहीं। फिर देखिए पूरा जीवन ही उत्सव बन जाएगा।

    तीन स्वर्ण मुद्राएं
  2. 03/15/2021

    अवकाश

    प्रतिस्पर्धा के दौर में हर कोई एक-दूसरे से आगे निकलने की अंधी दौड़ में लगा है। पद, पैसा, ऐशो-आराम हर कोई चाहता है। दिन भर हम दो और दो पाँच करने की कोशिश में लगे रहते हैं। काम की व्यस्तता में न खाने का समय है और न ही आराम का। एक बार काम मिल जाने के बाद कुछ भी नया सीखने और अपनी कुशलता को नई धार देने के बारे में हम सोचते भी नहीं। धीरे‌-धीरे हमारा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य ख़राब हो जाता है, काम करने की क्षमता कम होने लगती है, और हम प्रतियोगिता से बाहर होते जाते हैं। निरंतर बदलती दुनिया में यदि तरक्क़ी करनी है तो हमें बीच-बीच में काम से अवकाश लेकर अपनी कुल्हाड़ी को धार लगाते रहना होगा।

    अवकाश
  3. 03/12/2021

    अनमोल रत्न

    अधिकांश लोग अपने लिए कोई न कोई लक्ष्य निर्धारित करते हैं। उन्हें हासिल करने के संसाधन भी जुटा लेते हैं। लेकिन अक़्सर अपना ‘समय’ ऐसे कार्यों में लगाते हैं, जो उन्हें उनके लक्ष्य से दूर ले जाते हैं। और कई बार तो ऐसा भी होता है कि लाख कोशिशों के बाद भी मनचाहे परिणाम नहीं मिलते और वे अपना ‘धैर्य’खो देते हैं। वे या तो थककर बैठ जाते हैं या फिर अपना रास्ता ही बदल लेते हैं। कई बार तो लोग ऐसे वक़्त पर हथियार डाल देते हैं जब बस अगले ही पल उन्हें वांछित परिणाम मिलने वाले होते हैं। अपने लिए एक स्पष्ट लक्ष्य बनाएं,सही दिशा में ‘समय’, और धन का निवेश करें। फिर पूरे मनोयोग और ‘धैर्य’ के साथ तब तक लगे रहें जब तक उसे हासिल ना कर लें। आपकी जीत तय है।

    अनमोल रत्न

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