वगैरह वगैरह

मचान पत्रिका

मचान पत्रिका की पहली सालगिरह बस आती ही दिख रही है, अंक दर अंक प्रिय और परिचित होती इस नई हिन्दी मैग्ज़ीन की सम्पादक मंडली- यानी हम- मधुरिमा, श्वेतिका, प्रियांशी और उलफ़त- अपने पाठकों से जुड़ने के सतत प्रयासों में लगे हैं और आपको बुलावा दे रही हैं पत्रिका की सीमित पंक्तियों को लांघते हुए हमारी इधर-उधर की गपशप में शामिल होने का। हाज़िर है मचान पत्रिका की नई पेशकश "वगैरह-वगैरह", एक पॉडकास्ट जिसकी कोई तारीख़ नहीं, और फ़िलहाल के लिए कोई ख़ास विषय भी नहीं, बस अपनापन और बातचीत।

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मचान पत्रिका की पहली सालगिरह बस आती ही दिख रही है, अंक दर अंक प्रिय और परिचित होती इस नई हिन्दी मैग्ज़ीन की सम्पादक मंडली- यानी हम- मधुरिमा, श्वेतिका, प्रियांशी और उलफ़त- अपने पाठकों से जुड़ने के सतत प्रयासों में लगे हैं और आपको बुलावा दे रही हैं पत्रिका की सीमित पंक्तियों को लांघते हुए हमारी इधर-उधर की गपशप में शामिल होने का। हाज़िर है मचान पत्रिका की नई पेशकश "वगैरह-वगैरह", एक पॉडकास्ट जिसकी कोई तारीख़ नहीं, और फ़िलहाल के लिए कोई ख़ास विषय भी नहीं, बस अपनापन और बातचीत।