आज मन कुछ भारी सा है...चलो 2 बाते कर ले।

Vivek Gupta

वैसे तो हम प्रतिदिन न जाने कितना कुछ बोलते रहते है, लेकिन जब मन भारी होता है तो इंसान के मुख से कुछ ऐसी बाते निकलती है जो शायद उस व्यक्ति के जीवन का सार होता है। ऐसे ही कुछ विचार मेरे मन से भी निकलते है जिन्हें आपके साथ साझा करने की इच्छा से यह प्रयास कर रहा हूं। आशा करता हूँ कि आप लोगो को पसंद आएगा।

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  1. वापस कब जाना है?

    08/13/2021

    वापस कब जाना है?

    *"जीवन यात्रा में अब लौटने की तैयारी प्रारंभ करें....इससे पहले की देर हो जाये... इससे पहले की सब किया धरा निरर्थक हो जाये....."* *लौटना क्यों है*❓ *लौटना कहाँ है*❓ *लौटना कैसे है*❓ इसे समझने के लिए टॉलस्टाय की मशहूर कहानी साझा कर रहा हूँ : *"लौटना कभी आसान नहीं होता*" एक आदमी राजा के पास गया कि वो बहुत गरीब था, उसके पास कुछ भी नहीं, उसे मदद चाहिए... राजा दयालु था..उसने पूछा कि "क्या मदद चाहिए..?" आदमी ने कहा.."थोड़ा-सा भूखंड.." राजा ने कहा, “कल सुबह सूर्योदय के समय तुम यहां आना..ज़मीन पर तुम दौड़ना जितनी दूर तक दौड़ पाओगे वो पूरा भूखंड तुम्हारा। परंतु ध्यान रहे, जहां से तुम दौड़ना शुरू करोगे, सूर्यास्त तक तुम्हें वहीं लौट आना होगा, अन्यथा कुछ नहीं मिलेगा...!" आदमी खुश हो गया... सुबह हुई.. सूर्योदय के साथ आदमी दौड़ने लगा... आदमी दौड़ता रहा.. दौड़ता रहा.. सूरज सिर पर चढ़ आया था.. पर आदमी का दौड़ना नहीं रुका था.. वो हांफ रहा था, पर रुका नहीं था... थोड़ा और.. एक बार की मेहनत है.. फिर पूरी ज़िंदगी आराम... शाम होने लगी थी... आदमी को याद आया, लौटना भी है, नहीं तो फिर कुछ नहीं मिलेगा... उसने देखा, वो काफी दूर चला आया था.. अब उसे लौटना था.. पर कैसे लौटता..? सूरज पश्चिम की ओर मुड़ चुका था.. आदमी ने पूरा दम लगाया.. वो लौट सकता था... पर समय तेजी से बीत रहा था.. थोड़ी ताकत और लगानी होगी... वो पूरी गति से दौड़ने लगा... पर अब दौड़ा नहीं जा रहा था.. वो थक कर गिर गया... उसके प्राण वहीं निकल गए...! राजा अपने सहयोगियों के साथ वहां गया, जहां आदमी ज़मीन पर गिरा था... राजा ने उसे गौर से देखा.. फिर सिर्फ़ इतना कहा... *"इसे सिर्फ दो गज़ ज़मीं की दरकार थी... नाहक ही ये इतना दौड़ रहा था...! "* आदमी को लौटना था... पर लौट नहीं पाया... वो पहुच गया वहां, जहां से कोई लौट कर नहीं आता... कही हम भी तो वही भूल नही कर रहे जो उस आदमी ने की.... हमें अपनी चाहतों की सीमा का पता नहीं होता... *हमारी ज़रूरतें तो सीमित होती हैं, पर चाहतें अनंत..* अपनी चाहतों के मोह में हम लौटने की तैयारी ही नहीं करते... जब करते हैं तो बहुत देर हो चुकी होती है... फिर हमारे पास कुछ भी नहीं बचता... अतः आज कुछ प्रश्न अपने आप से पूछें .... मैं जीवन की दौड़ में सम्मिलित हुवा था, आज तक कहाँ पहुँचा? आखिर मुझे जाना कहाँ है ओर कब तक पहुँचना है? इसी तरह दौड़ता रहा तो कहाँ ओर कब तक पहुँच पाऊंगा? हम सभी दौड़ रहे हैं... बिना ये समझे कि सूरज समय पर लौट जाता है... हम ही लौटना नहीं जानते... सच ये है कि "जो लौटना जानते हैं, वही जीना भी जानते हैं... पर लौटना इतना भी आसान नहीं होता..." काश टॉलस्टाय की कहानी का वो पात्र समय से लौट पाता...! *"मै प्रार्थना करता हूँ कि हम सब लौट पाएं..! लौटने का विवेक, सामर्थ्य एवं निर्णय हम सबको मिले........"*

    6 min
  2. आखिर अंतर रह ही गया।

    08/13/2021

    आखिर अंतर रह ही गया।

    *🤔😊आखिर अंतर फिर भी रह ही गया!😊* 🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔 1) *बचपन में जब हम रेल की यात्रा करते थे, माँ घर से खाना बनाकर साथ ले जाती थी, पर रेल में कुछ लोगों को जब खाना खरीद कर खाते देखते, तब बड़ा मन करता था कि हम भी खरीद कर खाएँ!* पिताजी ने समझाया- ये हमारे बस का नहीं! ये तो बड़े व अमीर लोग हैं जो इस तरह पैसे खर्च कर सकते हैं, हम नहीं! 😊बड़े होकर देखा, अब जब हम खाना खरीद कर खा रहे हैं, तो "स्वास्थ सचेतन के लिए", वो बड़े व अमीर लोग घर का भोजन ले जा रहे हैं... *आखिर अंतर रह ही गया.* 🧐🧐🧐🧐🧐🧐🧐🧐 2) *बचपन में जब हम सूती कपड़े पहनते थे, तब वो लोग टेरीलीन पहनते थे! बड़ा मन करता था, पर पिताजी कहते- हम इतना खर्च नहीं कर सकते!* 😊बड़े होकर जब हम टेरीलीन पहने लगे, तब वो लोग सूती कपड़े पहनने लगे! अब सूती कपड़े महँगे हो गए! हम अब उतने खर्च नहीं कर सकते थे! *आखिर अंतर रह ही गया...*😒🤔 ⚖⚖⚖⚖⚖⚖⚖ 3) *बचपन में जब खेलते-खेलते हमारा पतलून घुटनों के पास से फट जाता, माँ बड़ी कारीगरी से उसे रफू कर देती, और हम खुश हो जाते थे। बस उठते-बैठते अपने हाथों से घुटनों के पास का वो रफू वाला हिस्सा ढँक लेते थे!* बड़े होकर देखा वो लोग घुटनों के पास फटे पतलून महँगे दामों में बड़े दुकानों से खरीद कर पहन रहे हैं ! *आखिर अंतर रह ही गया...*🤔😒 ⚖⚖⚖⚖⚖⚖⚖⚖ 4) *बचपन में हम साईकिल बड़ी मुश्किल से खरीद पाते, तब वे स्कूटर पर जाते ! जब हम स्कूटर खरीदे, वो कार की सवारी करने लगे और जब तक हम मारुति खरीदे, वो बीएमडब्लू पर जाते दिखे!* और हम जब रिटायरमेन्ट का पैसा लगाकर BMW खरीदे, अंतर को मिटाने के लिए, तो वो साईकिलिंग करते नज़र आए, स्वास्थ्य के लिए। *आखिरअंतर फिर भी रह ही गया...🤔😒* 😊हर हाल में हर समय दो विभिन्न लोगो में "अंतर" रह ही जाता है। *"अंतर" सतत है,,* अतः सदा सर्वदा रहेगा। कभी भी दो भिन्न व्यक्ति और दो विभिन्न परिस्थितियां एक जैसी नहीं होतीं। कहीं ऐसा न हो कि कल की सोचते-सोचते हम आज को ही खो दें और फिर कल इस आज को याद करें। *इसलिए जिस हाल में हैं... जैसे हैं... प्रसन्न रहें।* *अपना व अपनों का ख्याल रखे💐🌹आप मुस्कुराइए* *😊जिंदगी मुस्कुराएगी* 😊 🙏🙏 ****🙏🙏

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वैसे तो हम प्रतिदिन न जाने कितना कुछ बोलते रहते है, लेकिन जब मन भारी होता है तो इंसान के मुख से कुछ ऐसी बाते निकलती है जो शायद उस व्यक्ति के जीवन का सार होता है। ऐसे ही कुछ विचार मेरे मन से भी निकलते है जिन्हें आपके साथ साझा करने की इच्छा से यह प्रयास कर रहा हूं। आशा करता हूँ कि आप लोगो को पसंद आएगा।