रामकुटी | Ramkuti

Shrikant Borkar

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  1. Jan 24

    या कुन्देन्दु-तुषार-हार-धवला या शुभ्र-वस्त्रावृता। स्वर सौ.निवेदिता डंभारे

    स्वर सौ.निवेदिता डंभारे या कुन्देन्दु-तुषार-हार-धवला या शुभ्र-वस्त्रावृता। या वीणा-वर-दण्ड-मण्डित-करा या श्वेत-पद्मासना॥ या ब्रह्माच्युत-शंकर-प्रभृतिभि र्देवैः सदा वन्दिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेष-जाड्यापहा॥ 🌸*अर्थात*🌸 जो कुंद पुष्प, चन्द्रमा और हिमहार के समान श्वेत हैं, जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और जिनके हाथों में वीणा शोभित है, जो श्वेत कमल पर विराजमान हैं और ब्रह्मा, विष्णु एवं महादेव द्वारा वन्दित हैं— वे भगवती माँ सरस्वती मेरी रक्षा करें और मेरे अज्ञान को पूर्णतः दूर करें। 🌼*आपको वसंत पंचमी एवं सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ।*🌼 *हरे कृष्ण*🦚 हरे राम 🪷

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  2. मीनाक्षी पञ्चरत्नम् - उद्यद्भनुसहस्रकोटिसदृशाम्

    Jan 15

    मीनाक्षी पञ्चरत्नम् - उद्यद्भनुसहस्रकोटिसदृशाम्

    मीनाक्षी पञ्चरत्नम् - उद्यद्भनुसहस्रकोटिसदृशाम् उद्यद्भानुसहस्रकोटिसदृशां केयूरहारोज्ज्वलां विम्बोष्ठीं स्मितदन्तपङ्क्तिरुचिरां पीताम्बरालङ्कृताम् । विष्णुब्रह्मसुरेन्द्रसेवितपदां तत्त्वस्वरूपां शिवां मीनाक्षीं प्रणतोऽस्मि सन्ततमहं कारुण्यवारांनिधिम् ॥१॥ मुक्ताहारलसत्किरीटरुचिरां पूर्णेन्दुवक्त्रप्रभां शिञ्जन्नूपुरकिङ्किणीमणिधरां पद्मप्रभाभासुराम् । सर्वाभीष्टफलप्रदां गिरिसुतां वाणीरमासेवितां । मीनाक्षीं प्रणतोऽस्मि सन्ततमहं कारुण्यवारांनिधिम् ॥२॥ श्रीविद्यां शिववामभागनिलयां ह्रीङ्कारमन्त्रोज्ज्वलां श्रीचक्राङ्कितबिन्दुमध्यवसतिं श्रीमत्सभानायिकाम् । श्रीमत्षण्मुखविघ्नराजजननीं श्रीमज्जगन्मोहिनीं । मीनाक्षीं प्रणतोऽस्मि सन्ततमहं कारुण्यवारांनिधिम् ॥३॥ श्रीमत्सुन्दरनायिकां भयहरां ज्ञानप्रदां निर्मलां श्यामाभां कमलासनार्चितपदां नारायणस्यानुजाम् । वीणावेणुमृदङ्गवाद्यरसिकां नानाविधामम्बिकां । मीनाक्षीं प्रणतोऽस्मि सन्ततमहं कारुण्यवारांनिधिम् ॥४॥ नानायोगिमुनीन्द्रहृत्सुवसतिं नानार्थसिद्धिप्रदां नानापुष्पविराजिताङ्घ्रियुगलां नारायणेनार्चिताम् । नादब्रह्ममयीं परात्परतरां नानार्थतत्त्वात्मिकां । मीनाक्षीं प्रणतोऽस्मि सन्ततमहं कारुण्यवारांनिधिम् ॥५॥

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  3. कहा प्रभु से बिगडता क्या, मेरी बिगडी बनाने में।स्वर सेवा: किशोरी दासी (अंजुना जी)

    04/23/2025

    कहा प्रभु से बिगडता क्या, मेरी बिगडी बनाने में।स्वर सेवा: किशोरी दासी (अंजुना जी)

    कहा प्रभु से बिगड़ता क्या, मेरी बिगड़ी बनाने में मजा क्या आ रहा तुमको, मुझे दर दर घूमाने में वे बोले क्यों मेरे पीछे, पड़ा तू रोज रहता है, मैं बोला, दूसरा कोई और बता दो जमाने में वे बोले कि हजारों हैं, करूंगा कृपा किस किस पर मैं बोला साफ ही कह हो, बचा कुछ नहीं खजाने में वे बोले होश में बोलो, नहीं तो रूठ जाऊँगा, मैं बोला हो बड़े माहिर, जल्दी रूठ जाने में कहीं कुछ साधना की है, वो बोले तो कहा मैंने सुना है रीझ जाते हो फकत आंसू बहाने में वे बोले मेरी मर्जी है करूंगा जो भी चाहूंगा मैं बोला कर दो परिवर्तन, करूणानिधि कहाने में वे बोले करुणा दया न होती तो जन राजेश न होते मैं बोला हर्ज फिर क्या है, मुझे मुख छवि दिखाने में कहा प्रभु से बिगड़ता क्या, मेरी बिगड़ी बनाने में

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