PURE ZINDAGI with Srivastava

@Manojhazaribag

‘PURE जिं दगी’ is a podcast by Manoj Srivastava, an Indian journalist. He is against propaganda and believes in freedom, equality and fraternity. This podcast offers no advice but empowers you to take informed decisions. Topics relate directly to the core of life - day to day explainers, emotional complexities, influence of technology, cultural dilemma etc. Write to the host - manojhazaribag@gmail.com find Manoj Srivastava on social media platforms through @manojhazaribag - ig, fb, twitter.

Episodes

  1. 12/22/2022

    UNDERSTANDING MENTAL HEALTH

    Let's start a conversation around mental health because this can change the game of life, altogether. Mental health is the silent pandemic humanity is going through. It is damaging health, wealth, education, career and even lives. According to an estimate by WHO, two of the most common mental health conditions, depression and anxiety, cost the global economy US$ 1 trillion each year. People with severe mental health conditions die prematurely – as much as two decades early – due to preventable physical conditions. On the other hand, according to WHO only, Affordable, effective and feasible strategies exist to promote, protect and restore mental health. The need for action on mental health is indisputable and urgent. Mental health has intrinsic and instrumental value and is integral to our well-being. Mental health is determined by a complex interplay of individual, social and structural stresses and vulnerabilities. Keeping yourself physically fit helps you in keeping yourself mentally fit. But, this is not enough, and there is a gap. That gap is called mental health. Religion, spirituality and philosophy have emerged out of this gap only. It helped us before we were exposed to modern sciences. Now there is science to help us in a better way and psychology is there to tell us - how. I hope this podcast inspires you to think differently. happy listening . ------------ Podcast is a new medium. Here we have to grow together both as an audience and content creator. If you have anything to say feel free to write to me at manojhazaribag@gmail.com. find me on social media platforms through @manojhazaribag - ig, fb, twitter.

  2. 12/06/2022

    Phubbing _ You too Brutus!

    फबिं ग सा इको लॉ जी के लेक्सि कॉ न में एक नई एंट्री है.है.....ये दो शब्दों को मि ला कर गढ़ा गया है.है..फो न और स्नबिं ग.... snubbing का मतलब है कि सी आदमी को इग्नो र करना ... उसकी तरफ नजर उठा के भी ना देखना .....स्नबिं ग एक रूखा व्यवहार मा ना जा ता है.है...मतलब अगर आप फ़ो न के चलते कि सी को इग्नो र करते हैं.हैं..तो ये एक इल मैनर है और इसे फबिं ग कहते हैं.हैं... स्टडी ज में ये पा या गया है कि फो न की वजह से दो स्तों , रि श्तेदा रों और यहां तक की प्रेमी जो ड़ों के बी च खटपट आम बा त हो गई है.है..और एक लि मि ट से ज्या दा फबिं ग का शि कार हो ने वा ला व्यक्ति डि प्रेश्ड फी ल करने लगता है.है..फ़बिं ग टर्म का जन्म इसी समस्या का हल ढूंढने के लि ए कि या गया था ... स्टडी ज कहती हैं कि फ़बिं ग का प्रचलन, धी रे धी रे,रे हमा रे फ़ेस-टू-फ़ेस इंटइं रैक्शरै न को लेस मी निं गफुल या नि कमजो र बना रहा है.है.. फ़ब्ड या नी फ़बिं ग का शि कार हो चुका व्यक्ति ऑस्ट्रसा इज्ड फी ल करता है.है...या नि बहि ष्कृत महसूस करता है.है..फबिं ग उसके सेल्फ एस्टी म, उसके बि लॉ न्गिं गनेस औऱ उसके एग्जि स्टेंस को थ्रेटन करती है.है....स्टडी ज ये भी कहती हैं कि अगर पति पत्नी के बी च फबिं ग शुरू हो गई तो उनका मैरि टल सैटि सफैक्शन घटता है.है..उनमें डि प्रेस्शन के चां सचां बढ़ जा ते हैं.हैं..

  3. 12/06/2022

    Bots _ friends and foes.

    TS आपको पक्का पता होगा कि बॉ ट् कि सको कहते हैं.हैं..नहीं पता तो आगे सुनि ए...लेकि न आपको पता है तो आप ये भी सो च रहे होंगेकि मैं आपको बॉ ट्स के बा रे में नया क्या बता दूंगादूं गा....पहली बा त तो ये है कि बॉ ट्स दरअसल जि तना आप समझते हैं उससे कहीं ज्या दा बड़ी समस्या बन चुके हैं.हैं...दुनिदुनिया के सबसे अमी र आदमी और चो टी के टेक आंत्रप्रेन्यो र एलॉ न मस्क ने ये बा त कही मगर कि सी ने ध्या न नहीं दि या ....क्या आपने कभी कैप्चा कोड वेरि फा ई नहीं कि या है.है.जरूर कि या होगा....वो कैप्चा वेरि फि केशन आपसे यही तो कहता है कि PROOVE THAT YOU ARE NOT A BOT…. एक बॉ ट सि र्फ एक कंप्यूटर प्रो ग्रा म हो ता है.है...एक ऐसा प्रो ग्रा म जो इंसाइं सानों के सा थ इंटइं रैक्टरै करता है.है..मसलन कुछ पूछ भी सकता है और कुछ बता भी सकता है.है... जैसेकि आपके घर में अगर एलेक्सा या सी री जैसा को ई कनेक्टेड इंटइं रैक्टिरैक्टिव डि वा इस है तो उसके भी तर एक बॉ ट है.है.. कि सी ऐप या सा इट पर जो चैट बॉ क्स होता है.है..वो बॉ ट है.है... गूगल सर्च या फि र छो टे बड़े कि सी भी सर्च इंजइं न में सबसे इंपोइं पोर्टेंट काम भी बॉ ट्स करते हैं.हैं.....लेकि न ये सा रे उदा हरण गुड बॉ ट्स हैं.हैं...जा नने ला यक बा त तो बैड बॉ ट्स की है.है.... बैड बॉ ड्स वो सा रे का म करते हैं जो गैरका नूनी है.है..अनैति क या नि इम्मो रल है.है...ऑनला इन शॉ पिं ग पो र्टल्स पर बॉ ट्स फेक रेटिंरेटिंग और रि व्यू करते हैं.हैं..आपके लॉ गि न क्रेडेन्शिडेन्शियल्स और पर्सनल डेटाडे टा चुरा ते हैं.हैं...आपको मैलवेयर भेजते हैं.हैं..स्पैम करते हैं.हैं..फेक न्यूज फैला ते हैं.हैं..आपकी सो शल मी डि या फी ड को खा स तरी के के लिं क्स से फ्लड करते हैं ता कि वो खा स टॉ पि क को ट्रेंड करा पा एं......वो असल में आपके दि मा ग को कंट्रो ल करना चा हते हैं.हैं....सो शल मी डि या पर करो ड़ों अका उंट्स हैं जि न्हें को ई आदमी नहीं बल्कि बॉ ट्स हैंडहैंल करते हैं.हैं..ये पॉ लि टि कल प्रो पेगंडा फैला ते हैं.हैं..ये आपको फंसा कर सा इबर फ्रॉ ड्स के जा ल तक ले जा ते हैं.हैं...आपको पता नहीं लेकि न आपके जो अनजा न सो शल मी डि या कॉ न्टैक्ट्स हैं.हैं..उनमें से कई बॉ ट्स हैं जो सि र्फ आपका डेटाडे टा उड़ा ने आए हैं.हैं...

  4. 12/06/2022

    White Noise, Your road to deep sleep

    White noise is one answer to many mental issues including insomnia, ADHD, Depression etc. Probably, that is the cause that White Noise is on top charts of audio and video streaming apps including Spotify and YouTube. हो सकता है कि आपने वा इट नॉ इस का ना म पहली बा र सुना हो और आप सो च रहे हों कि इस अजी ब से टर्म में आपकी दि लचस्पी क्यों होनी चा हि ए.....तो आपको बता दें कि इस वक्त दुनिदुनिया भर में म्युजि क स्ट्री मिं ग ऐप्स के पॉ पुलैरि टी चा र्ट में टॉ प पर को ई सॉ न्ग नहीं वा इट नॉ इस है.है...लो ग आठ आठ बा रह बा रह घंटे के वा इट नॉ इस क्लि प स्ट्री म प्ले कर रहे हैं.हैं.....लेकि न वा इट नॉ इस आज की बा त नहीं है.है... वा इट नॉ इस पर करी ब करी ब ती न सौ सा लों से रि सर्च चल रहा है.है...क्यों कि मा ना जा ता है कि इनकी मदद से स्ली प डि जॉ र्डरर्ड या नि नीं द की दि क्कतों को दूरदू कि या जा सकता है.है...तो अगर आपको अच्छी नीं द की कमी महसूस हो ती है तो सुनि ए और अगर आपको अच्छी नीं द आती है तो भी सुनि ए...क्यों कि तब आपको पता चलेगा कि आपकी नीं द कि तना बड़ा खजा ना है और अच्छी नीं द की दौ लत हासि ल करने के लि ए दुनिदुनिया कि तने पा पड़ बेल रही है.है... mail Manoj Srivastava at manojhazaribag@gmail.com, find him on social media with @manojhazaribag Take care.

  5. 12/06/2022

    NoMoPHOBIA featuring Master Sparsh Sonawane

    नो मो या नी नो मो बा इल और फो बि या मतलब डर....नो मो फो बि या या नि मो बा इल ना हो ने की कल्पना मा त्र से डर....हो सकता है कि आपके जी वन में नो मो फो बि या दस्तक दे रहा हो और इसका असर आपके कामकाज और बा की जी वन पर पड़ रहा हो.... लेकि न आप उसे इग्नो र कर रहे हैं.हैं.. फो न के बि ना अब जिं दगी की कल्पना नहीं की जा सकती .....फो न में सबकुछ है.है..लेकि न दो स्तों फो न में जिं दगी नहीं है.है.. मो बा इल और आपके बी च एक प्रैक्टि कल रि लेशनशि प है,हैजि समें आप जा ने अनजा ने एक ओवर डि पेंडेंसडें डेवडे लप कर रहे हैं.हैं...इससे आपके मो बा इल यूज का एक पैटर्न बन गया है.है..आपका दि मा ग इस पैटर्न का आदी हो चुका है.है...और ये पैटर्न टूटने पर आपको दि क्कत महसूस हो ती है.है.... कोई टो क दे कि मो बा इल में ही घुसे रहते हो तो बुरा लगता है.है...कहा-सुनी हो जा ती है.है...पा स में फो न ना हो तो टेंशन हो ता है.है..कभी कभी घबरा हट हो ती है.है..मन में चि ड़चि ड़ मचती है.है......मि त्रों ये परेशारे शानि यां अगर वक्त रहते दूरदू नहीं की गईं तो एक स्टेज के बा द नो मो फो बि या घर कर लेता है.है...नो मो फो बि या के कुछ सि म्पट्म्स हो ते हैं जि न्हें आप आसा नी से शुरुआत में ही पकड़ सकते हैं.हैं....मसलन....मो बा इल फो न छूट जा ए तो घबरा हट चा लू, धड़कनें तेज हो जा ए, कंपकपी और पसी ना आ जा ए, दि ल बैठने लगे, भ्रम और बेचैनी का एहसास हो ने लग

  6. 12/05/2022

    NOSTALGIA featuring Dr. Vinay Bharat

    आपके अती त का वो झरो खा जि समें आप झां कझां कर देख तो सकते हैं लेकि न उसमें जो दि खता है उसे हा सि ल नहीं कर सकते। कौ न है जि से कभी को ई नॉ स्टा ल्जि क फि लिं ग नहीं आई? बचपन का वो घर, वो गली , वो नुक्कड़, मां के हाथ का खा ना , को ई गाना , को ई बा त, अकेलपन की कोई रा त… ऐसे तमा म या दगा र लम्हे जि नसे हो कर आप गुजरे और अब उन लम्हों को आप दो बा रा कभी हा सि ल नहीं कर सकते। देखा जा ए तो अती त में दो बा रा ना लौ ट पा ना इंसाइं सान की सबसे बड़ी पी ड़ा है और नॉ स्टैल्जि या उस पी ड़ा को थो ड़ा सा और बढ़ा सकता है.है..और सा थ ही थो ड़ा उसपर मरहम भी लगा सकता है.है...है ना मजेदा र बा त...लेकि न उससे भी मजेदा र बा त ये है कि नॉ मस्टैजि या का मरहम इंसाइं सान खुद बना ता है और खुद लगाता है।है तो चलि ए आज खो लते हैं नॉ स्टैल्जि या की जन्मकुंडली .... नॉ स्टैल्जि या की ओरि जि नल मी निं ग है घर ना जा पा ने की पी ड़ा – हा लां किलां कि अब इसे हो म सि कनेस कहा जा ता है।है लेकि न तब जबकि इंसाइं सान की इस भा वना का कोई ना म नहीं था ....तब या नि 1729 में नॉ स्टा ल्जि या टर्म को सबसे पहले एक डॉ क्टर जो हानस होफर (Johannes Hofer) ने परि भा षि त कि या था … वो भी एक बी मा री के तौ र पर। डॉ क्टर होफर के मुता बि क ये एक तरह का मेनि या है जो उस वक्त भा ड़े के सैनि कों में हो म सि कनेस की वजह से पनप रहा था । कि सी दूसदू रे देश के लि ए लड़ रहे इन सैनि कों में घर जा ने की तड़प को उस वक्त दि मा गी बी मा री के तौ र पर देखा जा ता था । जि से ये बी मा री होती थी उसकी हा लत दि वा नों जैसी हो जा ती थी । खो या खो या सा रहना , ना खा ने की सुद, ना नीं द का ठि का ना । नती जा वो बहुत बी मा र हो सकता था और मर भी सकता था । जि स सैनि क में ये बी मा री दि खती बहुत उसे नी ची नजर से देखा जा ता था और उसका इला ज बेदर्दी के सा थ बड़े क्रूर तरी के से कि या जा ता था । इसी बी मा री को डॉ क्टर होफर ने नॉ स्टैल्जि या का ना म दि या था । ग्री क में नॉ स्तो स का मतलब होता है होम कमिं ग और लैटि न शब्द एल्जि या का मतलब है पी ड़ा । दो नों को मि ला कर बन गया नॉ स्टैल्जि या ... लेकि न समय के सा थ इसशब्द के मा यने बदल गए और अब हम नॉ स्टैजि या का मतलब समझते हैं प्या री प्या री या दें। अब चलि ए लगेहाथ आपके आगेइसकी एक बेहद खूबसूरत नी जर पेश करते हैं.हैं..हमा रे एक मि त्र हैं डॉ वि नय भरत, उन्हों ने अपने नॉ स्टैल्जि या को बड़ी शि द्दत और सदा कत के सा थ एक छंदमुक्त कवि ता का रूप दि या है.है..उसमें बड़े मनमो हक बिं ब गढ़े हैं.हैं...तो वो चंद पंक्ति यां आपको सुना ते हैं लेकि न उससे पहले आपको बता दें डॉ वि नय भरत डॉ श्या मा प्रसा द मुखर्जी यूनि वर्सि टी रां चीरां ची में अंग्रेअं ग्रेजी के प्रो फेसर हैं.हैं.. प्रो फेसर ये अंग्रेअं ग्रेजी के हैं लेकि न हिं दी सा हि त्य के क्षेत्र में वि शेष यो गदा न के लि ए ये दुबदु ई में सृजन श्री सम्मा न से नवा जे जा चुके हैं.हैं... इनका कवि ता और लघु कथा ओं का संग्रह कतरनें वि श्व हि न्दी सा हि त्य परि षद्,द् नयी दि ल्ली से छप चुका है.है... वैसे अंग्रेअं ग्रेजी में भी रि सर्च वर्क और यूनि वर्सि टी को र्स की कि ता बें लि ख चुके हैं.हैं.टी वी डि बेट्स और समा चा र पत्रों में इनके आर्टि कल छपते रहते हैं.हैं..खा सकर सा मा जि क और शैक्षणि क वि षयों की समझा इश के मकसद से.... ये था डॉ वि नय का परि चय और अब उनकी कवि ता को ई नहीं होगा ....

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