Gita Samjho | Man ki Shaanti Paao

Valmiki

A soulful Hindi spiritual podcast exploring the timeless wisdom of the Bhagavad Gita for modern life. Each episode brings a deep, emotional, and practical summary of one Gita chapter, connecting Shri Krishna’s teachings with today’s struggles: stress, fear, confusion, responsibility, relationships, self-doubt, and the search for inner peace. Through calm Hindi narration, these voiceovers help you slow down, reflect, and reconnect with your inner strength. Gita Suno. Man se judo. Jai Shri Krishna.

  1. Aug 3

    भगवद गीता के 18 अध्याय 18 मिनट में | Complete Gita Summary 18 chapters in 18 minutes in Hindi | Krishna Wisdom

    🙏 जय श्री कृष्ण।इस वीडियो में सुनिए भगवद गीता के 18 अध्यायों का सार सिर्फ 18 मिनट में।यह एक भावपूर्ण और सरल Hindi narration है, जिसमें कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि पर अर्जुन के विषाद से लेकर भगवान श्रीकृष्ण के अंतिम संदेश, समर्पण और मोक्ष, तक की पूरी आध्यात्मिक यात्रा को समझाया गया है।भगवद गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है।यह जीवन के हर कठिन समय में रास्ता दिखाने वाली दिव्य ज्ञान-धारा है। ✨जब मन भ्रमित हो,जब जिम्मेदारियाँ भारी लगें,जब डर, चिंता और असफलता भीतर से तोड़ने लगें,जब सही निर्णय लेना कठिन हो जाए,तब श्रीकृष्ण का संदेश मन को फिर से स्थिर करता है।इस 18 मिनट की यात्रा में आप सुनेंगे:🕉️ अध्याय 1: अर्जुन विषाद योग⚔️ अध्याय 2: सांख्य योग🙏 अध्याय 3: कर्म योग🔥 अध्याय 4: ज्ञान कर्म संन्यास योग🌿 अध्याय 5: कर्म संन्यास योग🧘 अध्याय 6: आत्म संयम / ध्यान योग🌌 अध्याय 7: ज्ञान विज्ञान योग♾️ अध्याय 8: अक्षर ब्रह्म योग💛 अध्याय 9: राजविद्या राजगुह्य योग☀️ अध्याय 10: विभूति योग🌍 अध्याय 11: विश्वरूप दर्शन योग❤️ अध्याय 12: भक्ति योग🌱 अध्याय 13: क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग⚖️ अध्याय 14: गुण त्रय विभाग योग🌳 अध्याय 15: पुरुषोत्तम योग🔥 अध्याय 16: दैवासुर संपद विभाग योग🪔 अध्याय 17: श्रद्धा त्रय विभाग योग🕊️ अध्याय 18: मोक्ष संन्यास योग00:00 परिचय00:13 अध्याय 1: अर्जुन विषाद योग01:07 अध्याय 2: सांख्य योग01:59 अध्याय 3: कर्म योग02:51 अध्याय 4: ज्ञान कर्म संन्यास योग03:46 अध्याय 5: कर्म संन्यास योग04:37 अध्याय 6: आत्म संयम / ध्यान योग05:32 अध्याय 7: ज्ञान विज्ञान योग06:25 अध्याय 8: अक्षर ब्रह्म योग07:19 अध्याय 9: राजविद्या राजगुह्य योग08:11 अध्याय 10: विभूति योग09:04 अध्याय 11: विश्वरूप दर्शन योग09:56 अध्याय 12: भक्ति योग10:47 अध्याय 13: क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग11:43 अध्याय 14: गुण त्रय विभाग योग12:44 अध्याय 15: पुरुषोत्तम योग13:37 अध्याय 16: दैवासुर संपद विभाग योग14:32 अध्याय 17: श्रद्धा त्रय विभाग योग15:31 अध्याय 18: मोक्ष संन्यास योग16:59 अंतिम चिंतनयह वीडियो उन सभी के लिए है जो Bhagavad Gita को सरल भाषा में समझना चाहते हैं, और श्रीकृष्ण की शिक्षाओं को आज के जीवन से जोड़कर महसूस करना चाहते हैं।🌸 गीता सुनो, मन से जुड़ो।🙏 जय श्री कृष्ण।#BhagavadGita #GitaSummary #GitaInHindi #ShriKrishna #KrishnaWisdom #GitaSaar #BhagavadGitaHindi #18Chapters #SanatanDharma #SpiritualMotivation #KarmaYoga #BhaktiYoga #JaiShriKrishnaBhagavad Gita, Bhagavad Gita in Hindi, Bhagavad Gita Summary, Gita Summary Hindi, Bhagavad Gita 18 Chapters, Gita 18 Chapters in 18 Minutes, Shri Krishna, Krishna Wisdom, Krishna Motivation, Gita Saar, Gita Saar Hindi, Complete Gita Summary, Gita Chapter Summary, Kurukshetra, Arjuna Krishna, Karma Yoga, Bhakti Yoga, Moksha Sannyasa Yoga, Vishwaroop Darshan, Sanatan Dharma, Hindu Spirituality, Spiritual Motivation Hindi, Hindi Devotional Video, Gita Voiceover, Indian Spirituality

  2. Aug 2

    अच्छे कर्म का फल देर से क्यों मिलता है? श्रीकृष्ण का गहरा उत्तर | गीता ज्ञान

    क्या आपने कभी पूरी ईमानदारी से कर्म किया, किसी का भला चाहा और वर्षों तक धैर्य रखा, फिर भी आपको उसका उचित फल नहीं मिला? क्या कभी आपको लगा कि गलत मार्ग अपनाने वाले लोग आगे बढ़ रहे हैं, जबकि सत्य और धर्म पर चलने वाले केवल प्रतीक्षा कर रहे हैं?तब मन पूछता है, “यदि मेरे कर्म अच्छे हैं, तो उनका फल इतनी देर से क्यों मिल रहा है? क्या श्रीकृष्ण मेरे प्रयास देख नहीं रहे?”इस वीडियो में भगवद्गीता के ज्ञान से इसी गहरे और मानवीय प्रश्न का उत्तर समझाया गया है। श्रीकृष्ण बताते हैं कि कर्म कोई तुरंत पूरा होने वाला सौदा नहीं है। कुछ परिणाम बाहर दिखाई देने से पहले हमारे भीतर धैर्य, चरित्र, विवेक और आत्मबल का निर्माण करते हैं। जैसे बीज पहले मिट्टी के भीतर अपनी जड़ें मजबूत करता है और उसके बाद वृक्ष बनकर फल देता है, वैसे ही कई सच्चे प्रयास लंबे समय तक अदृश्य रूप से विकसित होते रहते हैं। 🌱इस वीडियो में आप समझेंगे:✨ अच्छे कर्म का फल तुरंत क्यों नहीं मिलता✨ गलत कर्म करने वाले कभी-कभी आगे क्यों दिखाई देते हैं✨ “कर्मण्येवाधिकारस्ते” का वास्तविक अर्थ क्या है✨ फल की चिंता छोड़ने का अर्थ लापरवाह होना क्यों नहीं है✨ प्रतीक्षा और निष्क्रियता में क्या अंतर है✨ कब धैर्य रखना चाहिए और कब अपनी विधि बदलनी चाहिए✨ कर्म का पहला फल हमारे भीतर कैसे जन्म लेता है✨ परिणाम न मिलने पर भी अपने धर्म और आत्मसम्मान को कैसे बचाएँ श्रीकृष्ण हमें लक्ष्य छोड़ने के लिए नहीं कहते। वे हमें पूरी निष्ठा से कर्म करने, अपनी गलतियों को सुधारने और परिणाम को अपनी पहचान का स्वामी न बनने देने की शिक्षा देते हैं।हो सकता है आपका फल अभी दिखाई न दे रहा हो, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि आपका सच्चा प्रयास व्यर्थ चला गया। संभव है मिट्टी के भीतर अभी जड़ें बन रही हों। 🙏इस संदेश को अंत तक सुनिए। शायद आपकी परिस्थिति तुरंत न बदले, लेकिन प्रतीक्षा को देखने वाली आपकी दृष्टि अवश्य बदल जाए।वीडियो उपयोगी लगे तो इसे लाइक करें, अपने प्रियजनों के साथ साझा करें और चैनल को सब्सक्राइब करके हमारे आध्यात्मिक परिवार से जुड़ें। आइए, गीता को केवल सुनें नहीं, जीवन के प्रश्नों में समझना भी सीखें।गीता समझो। कर्म करते रहो, लेकिन अपने हृदय को परिणाम का बंदी मत बनाओ।जय श्री कृष्ण। 🙏🦚#अच्छेकर्मकाफल #श्रीकृष्ण #भगवद्गीता #गीताज्ञान #कर्मकाफल #कर्मयोग #कृष्णवाणी #आध्यात्मिकज्ञान #सनातनधर्म #हिंदीकहानी #जीवनकीसीख #krishna #bhagavadgita #gitagyan #karmayoga #spirituality #motivationinhindi

  3. Aug 1

    भगवद्गीता अध्याय 18 : मोक्ष संन्यास योग | सब कुछ कृष्ण को कैसे सौंपें? | Gita Chapter 18

    जब जीवन की जिम्मेदारियाँ भारी लगने लगती हैं, तब मन कहता है—सब कुछ छोड़ दो, तभी शांति मिलेगी। लेकिन क्या कर्म छोड़ देना ही संन्यास है? या कर्म करते हुए भी भीतर से स्वतंत्र हुआ जा सकता है? भगवद्गीता अध्याय 18—मोक्ष संन्यास योग पूरी गीता का दिव्य निष्कर्ष है। पहले अध्याय में अर्जुन के हाथ से गांडीव छूट गया था। अंतिम अध्याय में वही अर्जुन कहता है: “मेरा मोह नष्ट हो गया, मेरी स्मृति लौट आई और अब मैं अपना कर्तव्य करूँगा।” श्रीकृष्ण बताते हैं कि वास्तविक त्याग जिम्मेदारियों को छोड़ना नहीं, कर्मफल की पकड़ को छोड़ना है। अपना स्वधर्म निभाइए, कर्म को पूजा बनाइए और जो आपके नियंत्रण में नहीं है, उसे कृष्ण के चरणों में रख दीजिए। 🦚 इस अध्याय में जानिए: ✨ संन्यास और त्याग का वास्तविक अंतर✨ कर्म के पाँच कारण क्या हैं✨ अपना स्वधर्म कैसे पहचानें✨ दूसरे के जीवन से तुलना क्यों नहीं करनी चाहिए✨ साधारण कर्म भी कृष्ण की पूजा कैसे बन सकता है✨ अपराधबोध से निकलकर गलती कैसे सुधारें✨ शरणागति का वास्तविक अर्थ✨ “सर्वधर्मान्परित्यज्य” और “मा शुचः” का गहरा संदेश कृष्ण यह नहीं कहते कि पहले पूर्ण बनो, फिर मेरे पास आना। वे कहते हैं—जैसे हो, सच्चे मन से मेरी शरण में आओ। शोक मत करो। वीडियो को प्रेम से लाइक, किसी परेशान मन के साथ शेयर और पूरी गीता यात्रा से जुड़ने के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें। 🙏 गीता सुनो। अपना कर्म करो और अपना भार कृष्ण को सौंप दो। #भगवद्गीता #गीताअध्याय18 #मोक्षसंन्यासयोग #सर्वधर्मान्परित्यज्य #माशुचः #स्वधर्म #शरणागति #कर्मयोग #श्रीकृष्ण #कृष्णअर्जुन #कृष्णवाणी #गीताज्ञान #गीतासार #गीतासुनो #कृष्णभक्ति #सनातनधर्म #आत्मज्ञान #मोक्ष #जयश्रीकृष्ण #bhagavadgita #gitachapter18 #mokshasannyasayoga #lordkrishna #surrendertokrishna #gitagyan #sanatandharma #spirituality #vedicwisdom bhagavad gita chapter 18, gita chapter 18 in hindi, bhagavad gita adhyay 18, gita adhyay 18 summary, gita chapter 18 explanation, moksha sannyasa yoga, moksha sanyas yog in hindi, मोक्ष संन्यास योग, भगवद्गीता अध्याय 18, गीता अध्याय 18 हिंदी, sarva dharman parityajya, सर्वधर्मान्परित्यज्य, ma shuchah meaning, मा शुचः, surrender to krishna, krishna sharanagati, स्वधर्म क्या है, कर्मफल त्याग, arjuna final answer, nashto moha smritir labdha, अर्जुन का मोह नष्ट, krishna teachings, shri krishna updesh, कृष्ण वाणी, गीता ज्ञान, गीता सार, गीता सुनो, gita final chapter, complete bhagavad gita, life lessons from gita, spiritual motivation hindi, krishna motivation, sanatan dharma, krishna bhakti, hindu spirituality, vedic wisdom, inner peace, moksha, siddid

  4. Aug 1

    भगवद्गीता अध्याय 17 : श्रद्धात्रय विभाग योग | आपकी श्रद्धा आपको क्या बना रही है? | Gita Chapter 17

    हर मनुष्य किसी न किसी विश्वास के आधार पर जीवन जीता है। कोई उपलब्धि को अपना सहारा मानता है, कोई धन को, कोई लोगों की प्रशंसा को और कोई हर परिस्थिति में श्रीकृष्ण को। हमारी वास्तविक श्रद्धा वही है जिसे हम अपना समय, ध्यान और जीवन सौंपते हैं। 🙏 भगवद्गीता अध्याय 17—श्रद्धात्रय विभाग योग में भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि मनुष्य जैसा विश्वास रखता है, धीरे-धीरे वैसा ही बन जाता है: “श्रद्धामयोऽयं पुरुषो यो यच्छ्रद्धः स एव सः।” इस अध्याय में सात्त्विक, राजसिक और तामसिक श्रद्धा के साथ भोजन, यज्ञ, तप और दान के तीन प्रकार समझाए गए हैं। श्रीकृष्ण यह भी बताते हैं कि पूजा का बाहरी रूप ही पर्याप्त नहीं—उसके पीछे की भावना, नीयत और विनम्रता अधिक महत्त्वपूर्ण है। 🕉️ इस अध्याय में जानिए: ✨ श्रद्धा हमारे व्यक्तित्व को कैसे बनाती है✨ सात्त्विक, राजसिक और तामसिक विश्वास में अंतर✨ भोजन मन और शरीर को कैसे प्रभावित करता है✨ शरीर, वाणी और मन का वास्तविक तप✨ सत्य बोलते हुए किसी का हृदय कैसे न तोड़ें✨ सम्मान के साथ दान कैसे करें✨ “ॐ तत् सत्” का गहरा आध्यात्मिक अर्थ इस अध्याय को अंत तक सुनिए और स्वयं से पूछिए—जिस बात पर मैं विश्वास कर रहा हूँ, वह मुझे कैसा मनुष्य बना रही है? वीडियो को प्रेम से लाइक, किसी प्रियजन के साथ शेयर और चैनल को सब्सक्राइब करें। 💙 गीता सुनो। जैसी श्रद्धा, वैसा जीवन। #भगवद्गीता #गीताअध्याय17 #श्रद्धात्रयविभागयोग #श्रद्धा #ओमतत्सत #सात्त्विकजीवन #सात्त्विकभोजन #वाणीकेतप #दान #तप #यज्ञ #श्रीकृष्ण #कृष्णवाणी #गीताज्ञान #गीतासार #गीतासुनो #कृष्णभक्ति #सनातनधर्म #जयश्रीकृष्ण #bhagavadgita #gitachapter17 #shraddha #om तत्सत #lordkrishna #gitagyan #sanatandharma #spirituality #vedicwisdom bhagavad gita chapter 17, gita chapter 17 in hindi, bhagavad gita adhyay 17, gita adhyay 17 summary, gita chapter 17 explanation, shraddhatraya vibhaga yoga, shraddhatraya yoga, श्रद्धात्रय विभाग योग, भगवद्गीता अध्याय 17, गीता अध्याय 17 हिंदी, three types of faith, sattvic rajasic tamasic faith, सात्त्विक राजसिक तामसिक श्रद्धा, om tat sat meaning, ओम तत सत, sattvic food, सात्त्विक भोजन, speech discipline, वाणी का तप, daan tap yagya, दान तप यज्ञ, krishna teachings, shri krishna updesh, कृष्ण वाणी, गीता ज्ञान, गीता सार, गीता सुनो, spiritual discipline, faith and life, devotional video hindi, sanatan dharma, krishna bhakti, hindu spirituality, vedic wisdom, siddid

  5. Aug 1

    भगवद्गीता अध्याय 16 : दैवासुर संपद विभाग योग | आपके भीतर कौन जीत रहा है? | Gita Chapter 16

    कभी-कभी हमारा सबसे बड़ा शत्रु बाहर नहीं, हमारे भीतर छिपा होता है। एक छोटा असत्य, अनियंत्रित क्रोध, अभिमान या किसी से आगे निकलने की इच्छा धीरे-धीरे हमारे मन की शांति छीन सकती है। भगवद्गीता अध्याय 16—दैवासुर संपद विभाग योग में भगवान श्रीकृष्ण दैवी और आसुरी प्रवृत्तियों का अंतर समझाते हैं। यह अध्याय दूसरों को अच्छा या बुरा घोषित करने के लिए नहीं, स्वयं के भीतर झाँकने के लिए है। 🕉️ निर्भयता, सत्य, करुणा, संयम, क्षमा और विनम्रता दैवी संपदा हैं। वहीं दम्भ, अभिमान, कठोरता, क्रोध और अज्ञान मनुष्य को भीतर से कमजोर करते हैं। श्रीकृष्ण कामना, क्रोध और लोभ को आत्मविनाश के तीन द्वार बताते हैं। इस अध्याय में जानिए: ✨ दैवी और आसुरी संपदा का वास्तविक अर्थ✨ क्रोध में सही निर्णय कैसे लें✨ इच्छा और लोभ की पकड़ से कैसे बचें✨ सत्य बोलते हुए करुणा कैसे बनाए रखें✨ गलती स्वीकार करना कमजोरी नहीं, साहस क्यों है✨ अपने चरित्र को श्रीकृष्ण के योग्य कैसे बनाएँ इस अध्याय को अंत तक सुनिए और ईमानदारी से पूछिए—मेरे भीतर प्रकाश और अंधकार की लड़ाई में आज कौन जीत रहा है? वीडियो को प्रेम से लाइक, शेयर और चैनल को सब्सक्राइब करें। 🙏 गीता सुनो। अपने भीतर का युद्ध पहचानो और हर दिन प्रकाश को चुनो। #भगवद्गीता #गीताअध्याय16 #दैवासुरसंपदविभागयोग #दैवीसंपदा #आसुरीसंपदा #श्रीकृष्ण #कृष्णवाणी #गीताज्ञान #गीतासार #गीतासुनो #कामक्रोधलोभ #आत्मचिंतन #चरित्रनिर्माण #कृष्णभक्ति #सनातनधर्म #आध्यात्मिकज्ञान #जयश्रीकृष्ण #bhagavadgita #gitachapter16 #lordkrishna #krishna #gitagyan #sanatandharma #spirituality #selfimprovement #hinduspirituality bhagavad gita chapter 16, gita chapter 16 in hindi, bhagavad gita adhyay 16, gita adhyay 16 summary, gita chapter 16 explanation, daivasura sampad vibhaga yoga, daivasura sampad yoga, दैवासुर संपद विभाग योग, भगवद्गीता अध्याय 16, गीता अध्याय 16 हिंदी, दैवी संपदा, आसुरी संपदा, kam krodh lobh, काम क्रोध लोभ, three gates of hell gita, krishna teachings, shri krishna updesh, कृष्ण वाणी, गीता ज्ञान, गीता सार, गीता सुनो, character building, anger management gita, spiritual motivation hindi, self improvement hindi, sanatan dharma, krishna bhakti, hindu spirituality, vedic wisdom, inner transformation, life lessons from gita, devotional video hindi, siddid

  6. Aug 1

    भगवद्गीता अध्याय 15 : पुरुषोत्तम योग | सब कुछ होकर भी मन खाली क्यों है? | Gita Chapter 15

    जीवन में काम, परिवार, संबंध और उपलब्धियाँ होते हुए भी कभी-कभी मन भीतर से खाली क्यों लगता है? हम जिन वस्तुओं और संबंधों को पकड़कर स्थायी सुरक्षा खोजते हैं, उन्हीं के छूट जाने का भय हमें अशांत क्यों कर देता है? 🕉️ भगवद्गीता के अध्याय 15—पुरुषोत्तम योग में भगवान श्रीकृष्ण संसार की तुलना एक अद्भुत उल्टे पीपल के वृक्ष से करते हैं, जिसकी जड़ ऊपर और शाखाएँ नीचे हैं। इसकी शाखाएँ संसार में फैली हमारी इच्छाएँ, संबंध, कर्म और आसक्तियाँ हैं, जबकि इसकी वास्तविक जड़ परमात्मा में है। श्रीकृष्ण हमें संसार और जिम्मेदारियाँ छोड़ने के लिए नहीं कहते। वे सिखाते हैं कि प्रेम करें, कर्म करें और संबंध निभाएँ, लेकिन किसी बदलती हुई वस्तु को अपने जीवन का अंतिम आधार न बनाएँ। 🌳 इस अध्याय का सबसे हृदयस्पर्शी संदेश है: “ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः।” अर्थात प्रत्येक जीव भगवान श्रीकृष्ण का सनातन अंश है। संसार आपको स्वीकार करे या न करे, परिस्थितियाँ आपका साथ दें या न दें—कृष्ण के साथ आपका संबंध कभी समाप्त नहीं होता। 💙 इस अध्याय में जानिए: ✨ संसार को उल्टा अश्वत्थ वृक्ष क्यों कहा गया है ✨ प्रेम और आसक्ति में क्या अंतर है ✨ मोह की पकड़ से मुक्त होकर संबंध कैसे निभाएँ ✨ जीवात्मा को श्रीकृष्ण का सनातन अंश क्यों कहा गया है ✨ सूर्य, चंद्रमा, अग्नि और भोजन में कृष्ण की उपस्थिति कैसे पहचानें ✨ स्मृति, ज्ञान और विवेक का परम स्रोत कौन है ✨ क्षर, अक्षर और पुरुषोत्तम का वास्तविक अर्थ क्या है ✨ बदलते संसार के बीच भीतर स्थिर कैसे रहें भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि वे प्रत्येक हृदय में स्थित हैं। सूर्य में चमकता प्रकाश, चंद्रमा की शीतलता, शरीर में भोजन पचाने वाली अग्नि और भ्रम के बीच जागने वाला विवेक—इन सबके पीछे उनका ही दिव्य आधार है। 🙏 इस अध्याय को अंत तक सुनिए और अपने जीवन की बिखरी शाखाओं से लौटकर अपनी वास्तविक जड़ को पहचानिए। शाखाएँ बदलती रहेंगी, अपनी जड़ श्रीकृष्ण में रखिए। 🦚 वीडियो पसंद आए तो प्रेम से लाइक करें, इसे किसी थके हुए मन तक शेयर करें और गीता के सभी अध्यायों से जुड़ने के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें। जय श्री कृष्ण। 🙏 #भगवद्गीता #गीताअध्याय15 #पुरुषोत्तमयोग #श्रीमद्भगवद्गीता #श्रीकृष्ण #कृष्णवाणी #गीताज्ञान #गीतासार #गीतासुनो #आत्मज्ञान #कृष्णभक्ति #सनातनधर्म #आध्यात्मिकज्ञान #अश्वत्थवृक्ष #जयश्रीकृष्ण #bhagavadgita #gitachapter15 #purushottamyoga #lordkrishna #krishna #krishnabhakti #gitagyan #gitasaar #sanatandharma #spirituality #vedicwisdom #innerpeace #selfrealization #hinduspirituality #spiritualmotivation bhagavad gita chapter 15, gita chapter 15 in hindi, bhagavad gita adhyay 15, shrimad bhagavad gita chapter 15, chapter 15 gita summary, chapter 15 gita explanation, purushottam yoga, purushottam yog in hindi, पुरुषोत्तम योग, भगवद्गीता अध्याय 15, गीता अध्याय 15 हिंदी, श्रीमद्भगवद्गीता, श्री कृष्ण उपदेश, कृष्ण वाणी, गीता ज्ञान, गीता सार, गीता सुनो, संसार रूपी अश्वत्थ वृक्ष, उल्टा पीपल का वृक्ष, ममैवांशो जीवलोके, आत्मा परमात्मा का संबंध, आत्मज्ञान, कृष्ण भक्ति, सनातन धर्म, hindu spirituality, spiritual motivation hindi, krishna motivation, lord krishna teachings, gita life lessons, gita for daily life, life changing gita, devotional video hindi, hindi spiritual video, bhakti gyan, vedic wisdom, indian spirituality, krishna consciousness, self realization, inner peace, siddid

  7. Aug 1

    भगवद्गीता अध्याय 14 : गुणत्रय विभाग योग | आपका मन बार-बार क्यों बदलता है? | Gita Chapter 14

    कभी मन बहुत शांत और प्रसन्न होता है, कभी बिना कारण बेचैन हो जाता है, और कभी इतना भारी कि कोई काम करने की इच्छा ही नहीं होती। आखिर हमारे भीतर ये परिवर्तन क्यों आते हैं? 🕉️ भगवद्गीता के अध्याय 14—गुणत्रय विभाग योग में भगवान श्रीकृष्ण प्रकृति के तीन गुणों का गहरा रहस्य बताते हैं: 🌼 सत्त्व गुण—ज्ञान, शांति और स्पष्टता 🔥 रजोगुण—इच्छा, बेचैनी और फल की लालसा 🌑 तमोगुण—आलस्य, भ्रम और अज्ञान श्रीकृष्ण समझाते हैं कि ये तीनों गुण हमारे विचारों, भावनाओं, आदतों और कर्मों को प्रभावित करते हैं। कभी सत्त्व हमें प्रकाश की ओर ले जाता है, कभी रज हमें उपलब्धियों की अंतहीन दौड़ में लगा देता है, और कभी तम हमें निराशा तथा निष्क्रियता के नीचे दबा देता है। लेकिन गीता का सबसे सुंदर संदेश यह है कि आप अपनी बेचैनी, उदासी या बदलती मनोदशा नहीं हैं। ये प्रकृति के बदलते रंग हैं। आपका वास्तविक स्वरूप इनसे कहीं अधिक गहरा और शांत है। 🙏 इस अध्याय में जानिए: ✨ सत्त्व, रज और तम हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं ✨ मन की वर्तमान अवस्था को कैसे पहचानें ✨ रजोगुण की बेचैनी और तमोगुण के भारीपन से कैसे बाहर आएँ ✨ सात्त्विक जीवन जीते हुए अहंकार से कैसे बचें ✨ निंदा, प्रशंसा, सफलता और असफलता में स्थिर कैसे रहें ✨ भक्ति के माध्यम से तीनों गुणों से ऊपर कैसे उठें इस अध्याय को अंत तक सुनिए और अपने मन को दोष देने के स्थान पर उसे समझना सीखिए। मन के मौसम बदलते रहते हैं, लेकिन श्रीकृष्ण का आश्रय कभी नहीं बदलता। 💙 वीडियो पसंद आए तो प्रेम से लाइक करें, इसे किसी परेशान मन तक शेयर करें और गीता के सभी अध्यायों से जुड़ने के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें। गीता सुनो। मन के मौसम बदलते हैं, कृष्ण का आश्रय नहीं। जय श्री कृष्ण। 🙏🦚 #भगवद्गीता #गीताअध्याय14 #गुणत्रयविभागयोग #श्रीकृष्ण #गीताज्ञान #कृष्णवाणी #सत्त्वगुण #रजोगुण #तमोगुण #आध्यात्मिकज्ञान #सनातनधर्म #जयश्रीकृष्ण

  8. Jul 28

    भगवद गीता अध्याय 13: क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग | आप केवल शरीर नहीं हैं 🙏 | Gita Chapter 13

    क्या आप कभी अपनी समस्या को ही अपनी पहचान समझ बैठे हैं?संबंध टूटा तो लगा, “मैं ही अस्वीकार हूँ।” असफलता मिली तो लगा, “मैं ही असफल हूँ।” मन में चिंता उठी तो पूरी पहचान उसी चिंता के भीतर सिमट गई।भगवद्गीता का तेरहवाँ अध्याय, क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग, हमें एक अत्यंत गहरा सत्य समझाता है: परिस्थितियाँ हमारे जीवन में घटती हैं, लेकिन हम केवल अपनी परिस्थितियाँ नहीं हैं। विचार और भावनाएँ हमारे भीतर उठती हैं, लेकिन हम केवल वही विचार और भावनाएँ नहीं हैं।श्रीकृष्ण शरीर, मन, बुद्धि, इच्छाओं, स्मृतियों और अनुभवों को क्षेत्र कहते हैं। जो इस क्षेत्र को देखता और जानता है, वह क्षेत्रज्ञ है। सभी प्राणियों के भीतर परम साक्षी और परम क्षेत्रज्ञ के रूप में स्वयं श्रीकृष्ण उपस्थित हैं।इस वीडियो में जानिए:✨ क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का वास्तविक अर्थ✨ शरीर का सम्मान करते हुए उससे ऊपर अपनी पहचान कैसे जानें✨ चिंता, क्रोध और दुःख को साक्षीभाव से कैसे देखें✨ “मैं दुःखी हूँ” और “मेरे भीतर दुःख है” में क्या अंतर है✨ विनम्रता, सरलता और आत्मसंयम को ज्ञान क्यों कहा गया✨ प्रत्येक प्राणी में कृष्ण की उपस्थिति कैसे पहचानें✨ बदलती भूमिकाओं के बीच अपनी वास्तविक पहचान कैसे बचाएँ✨ प्रतिक्रिया से पहले रुककर धर्मपूर्ण निर्णय कैसे लें यह अध्याय हमें समस्याओं से भागना नहीं सिखाता। यह हमें समस्याओं को स्पष्टता से देखते हुए स्वयं को उनमें कैद होने से बचाना सिखाता है।आप नौकरी करते हैं, लेकिन केवल नौकरी नहीं हैं। आपके पास शरीर, विचार और स्मृतियाँ हैं, लेकिन आप केवल उन्हीं तक सीमित नहीं हैं। आपके भीतर एक देखने वाला प्रकाश है, और उस प्रकाश की गहराई में कृष्ण की उपस्थिति है। 🦚वीडियो को लाइक कीजिए, किसी चिंतित हृदय के साथ साझा कीजिए और संपूर्ण गीता यात्रा के लिए चैनल को सब्सक्राइब कीजिए। 🙏गीता सुनो। तुम केवल शरीर नहीं, भीतर के साक्षी हो।जय श्री कृष्ण।#गीतासुनो #क्षेत्रक्षेत्रज्ञ #भगवद्गीता #गीताअध्याय13 #श्रीकृष्ण #आत्मज्ञान #गीताज्ञान #सनातनधर्म #कृष्णवाणी #bhagavadgita #chapter13 #krishna #spirituality

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