Mindless Wanderings

Mindless Wanderer

Collection of musings of the great and the greatest and also of this humble soul. Pic credits - fatimarbaig ( follow her on instagram, she goes by the same handle, amazing art pieces)

  1. ٢٠‏/٠٥‏/٢٠٢١

    Mujhse pehli si mohabbat - Faiz Ahmed Faiz

    मुझसे पहली सी मोहब्बत मिरी महबूब न मांग मैने समझा था कि तू है तो दरख़्शां है हयात तेरा ग़म है तो गम-ए-दहर का झगड़ा क्या है तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया मे रक्खा क्या है तू जो मिल जाये तो तक़दीर निगूँ हो जाये यूँ न था, मैने फ़क़त चाहा था यूँ हो जाये और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा राहते और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा अनगिनत सदियों से तारीक़ बहीमाना तिलिस्म रेशम-ओ-अतलस-ओ-कमख़्वाब में बुनवाए हुए जा-ब-जा बिकते हुए कूचा-ए-बाज़ार में जिस्म ख़ाक में लिथड़े हुए, ख़ून मे नहलाये हुए जिस्म निकले हुए अमराज़ के तन्नूरों से पीप बहती हुई गलते हुए नासूरों से लौट जाती है उधर को भी नज़र क्या कीजे अब भी दिलकश है तेरा हुस्न मगर क्या कीजे और भी दुख हैं ज़माने मे मोहब्बत के सिवा राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा मुझसे पहली सी मोहब्बत मिरी महबूब न मांग-फैज़ अहमद फैज़ मायने दरख़्शां है हयात = जीवन सुखमय है, गम-ए-दहर=सांसारिक दुःख, आलम = दुनिया, सबात=ठहराव, निगूँ=बदल जाना, वस्ल =मिलन, तारीक़ बहीमाना तिलिस्म=क्रूरता का अंधकारमय जाल, रेशम-ओ-अतलस-ओ-कमख़्वाब=रेशम के कीमती वस्त्र, जा-ब-जा=जगह-जगह, कूचा-ए-बाज़ार = बाज़ार की गलियां, अमराज़ के तन्नूरों=बीमारियों की भट्टी, दिलकश=आकर्षक

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