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Bindas awaaz - Bindas Andaaz

  1. 2021. 01. 10.

    badle badle se sarkar nazar aate hain..suniye kyon

    मधुर भाषी..शिव बाबू..जिनके शब्द मानो शहद से पगे हों । कभी कभी तो लगता कि मामा ने शहद की एजेंसी ले रखी है । महिला बच्चे तो इस कदर मुरीद की...मामा जैसा कोई नही । उफ्फ़...यह क्या हुआ । शिव बाबू सत्ता में लौटे तो लेकिन नए तेवर और कलेवर में । शब्दों तो हैं लेकिन उफ्फ़ मुई मिठास छू हो गई । लगता है कि इस बार शहद पतंजलि वाला ले मारा । शिव हटो बचो अंदाज से परे अब दफ़न से लेकर टाँगने तक पहुंच चुके हैं खैर..बदले शब्दों के पीछे शिव का वो अनुभव भी है जो सत्ता छिनने से लेकर हासिल करने के बीच अपनों ने दिया । जो कभी दाएं बाएं थे...उन्होंने ही चुका करार देने में कोई कोर कसर न छोड़ी । वो अफसर जो शिव के आंगन में खड़े होकर गपियाते थे उन्होंने भी पाला बदला और चुगलयाने लगे । वहां वक्त के साथ सियासत के भी नए समीकरण गढ़ने लगे हैं । अब सरल,सहज,मिलनसार के पीछे छोड़ते हुए दबंग नेताओं की पूछ अधिक है । मोदी चमके,शाह चमके,योगी चमके...। यह भी शायद वो अनुभव है..जिसने शिव को अपनी पुरानी छवि से बाहर निकलने पर मंज़बूर कर दिया । ऐसा महसूस होता हैंकि मामा अपनी सॉफ्ट इमेज का चोला उतार फेकने के लिए बेकरार हो । शायद उन नेताओं के लिए भी संदेश हो जो आज भी मामा की कुर्सी पर नज़रें गड़ाए बैठे हैं । शिव के पिछले कार्यकालों में अफसरशाही हावी होने का आरोप खूब लगा । इतना कि शिव की हार में यह भी एक बड़ी वजह शामिल की गई । खैर पुराने अनुभव से सीखना कुछ बुरा तो नही लेकिन अचानक इतना बदलाव सवाल तो खड़ा करेगा ही । चलिए शिव अपनी रणनीति में कितना सफल होते हैं साथ ही सॉफ्ट इमेज वाले शिव को स्वीकार करने वाली आम जनता...इस नए रूप को कितना स्वीकार करेगी ..यह तो साहब भविष्य ही तय करेगा ।

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