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Eidgaah

मुंशी प्रेमचंद हिंदी भाषा के बहुत जाने-माने लेखक थे, जो अपनी कहानियों से लोगों के दिलों को छू लेते थे। उनकी कहानियाँ आम जीवन की सच्ची घटनाओं पर आधारित होती थीं, और सदैव अपने पाठकों को कुछ सिखाती थीं। ईदगाह उनकी एक ऐसी ही खूबसूरत कहानी है, जिसमें एक छोटे बच्चे, हामिद, का अपनी दादी के लिए प्यार और समर्पण दिखाया गया है। ईद के मेले में जहाँ बाकी बच्चे खिलौने और मिठाइयाँ खरीदते हैं, हामिद अपनी छोटी सी ईदी की रकम से अपनी दादी के लिए कोई तोहफा लेने का मन बनाता है।  तो आइये सुनते हैं ईदगाह की कहानी और जानते हैं कि आखिर नन्हें से हामिद ने अपनी ईदी को कैसे खर्च किया।  अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ:  https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

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    ईद की तैयारी

    ईद का दिन आ गया था! रमज़ान के पूरे 30 रोज़ों के बाद गाँव में हर जगह हलचल है। बच्चे अपने-अपने अब्बाजान के साथ ईदगाह जाने के लिए तैयार हो रहे हैं। लेकिन हामिद के अब्बा और अम्मी नहीं हैं, फिर भी वह खुश है। हामिद अपनी दादी अमीना के साथ रहता है, और उसकी मासूम दुनिया उम्मीदों से भरी हुई है। हामिद की दादी परेशान हैं कि वो हामिद को अकेले ईदगाह कैसे जाने दें और हामिद उन्हें यह यकीन दिला रहा है कि वो सबसे पहले वापस लौट आएगा और दादी को फिक्र करने की बिलकुल ज़रूरत नहीं है। तो आइये सुनते हैं मुंशी प्रेमचंद की इस खूबसूरत कहानी का पहला भाग! अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ: https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

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    बच्चों का काफिला

    हामिद और उसके दोस्त ईद के मेले के लिए गाँव से शहर की ओर निकलते हैं। रास्ते में वह बहुत से नए नज़ारे देखते हैं जिन्हें देखकर वह उत्साह से भर जाते हैं, शहर की नई-नई चीज़ों के प्रति उनकी जिज्ञासा उमड़ने लगती है, और उनकी मज़ेदार बातचीत का सिलसिला तो ख़त्म ही नहीं होता है। शहर की बड़ी इमारतें, हलवाई की दुकानों पर सजी मिठाइयाँ, और जिन्नात के किस्से—और ना जाने क्या क्या देखते सुनते सभी बच्चे ईदगाह पहुँचते हैं। तो आइये सुनते हैं मुंशी प्रेमचंद की इस खूबसूरत कहानी का दूसरा भाग! अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ: https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

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    ईद का मेला

    हामिद और उसके दोस्त ईदगाह पहुँचने के बाद वहाँ का मंज़र देखकर गद्गद हो जाते हैं। लोगों की भीड़, उनके सजदे में झुकते सर और ईद के त्योहार का वो पूरा माहौल, उनके मन को छू लेता है। सभी पीछे की कतार में खड़े होकर अपनी अपनी ईद की नमाज़ अदा करते हैं और फिर उनकी मंडली चल देती है - मेला घूमने और अपनी अपनी ईदी खर्च करने। बच्चों के लिए हिंडोले, चर्खी, खिलौने, झूले और मिठाइयाँ—हर जगह रौनक और उत्साह है! पर क्योंकि हामिद के पास केवल तीन पैसे हैं, वो कुछ भी लेने से पहले दस बार सोचता है और फिर बिना कुछ लिए आगे बढ़ जाता है। जबकि उसके दोस्त रंग-बिरंगे खिलौने और मिठाइयाँ लेकर उसे चिढ़ाने लगते हैं। तो आइये सुनते हैं मुंशी प्रेमचंद की इस खूबसूरत कहानी का तीसरा भाग! अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ: https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

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    तीन पैसे का चिमटा

    हामिद का मन तो बहुत करता है उन खिलौनों और मिठाइयों को खरीदने का जो बकियों के हाथ में हैं। लेकिन उन सारी चीजों पर पैसा बर्बाद करने के बजाए जो उसे सिर्फ 2 पल की खुशी देंगी, वो फैसला करता है अपनी दादी के लिए कुछ खास खरीदने का। जहाँ उसके दोस्त सिपाही, वकील, और मिठाइयाँ लेकर खुश हैं, वहीं हामिद अपने तीन पैसों से लोहे की चिमटा खरीदता है। दोस्तों की हंसी-मजाक के बावजूद, हामिद जानता है कि यह चिमटा उसकी दादी के कितना काम आएगा और सालों तक उसे कुछ नहीं होगा। तो आइये सुनते हैं मुंशी प्रेमचंद की इस खूबसूरत कहानी का चौथा भाग! अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ: https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

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    हामिद की जीत

    हामिद के दोस्त जब उसे इतने अच्छे अच्छे खिलौनों के बजाए लोहे का चिमटा खरीदते देखते हैं तो उसके मज़ाक उड़ाने लगते हैं। उनके जवाब में हामिद अपने चिमटे की ताकत और उपयोगिता को साबित करने में सफल हो जाता है, जबकि उसके दोस्त अपने महंगे खिलौनों के बावजूद भी उससे जीत नहीं पाते। हामिद अपनी समझदारी और तर्कशक्ति से साबित कर देता है कि उसका चिमटा कितनी बहुमूल्य वस्तु है, जो हर खिलौने से बेहतर है। यहाँ तक कि हामिद के तर्कों के बाद उसके सारे दोस्तों का मन भी एक लोहे का चिमटा खरीदने के लिए ललचाने लगता है। तो आइये सुनते हैं मुंशी प्रेमचंद की इस खूबसूरत कहानी का पाँचवाँ भाग! अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ: https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

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    दादी का अनमोल तोहफा

    सभी बच्चे मेले से गाँव वापस लौटते हैं और अपने अपने घरवालों को अपने खरीदे नए नए खिलौने दिखाते हैं। खिलोनों को घर में सजाने की जगह बनाते हैं और उन्हें निहारकर खुश हुए जाते हैं। जब हामिद अपने घर वापस पहुंचता है तो उसकी दादी उससे पूछती हैं कि उसने अपने तीन पैसों से क्या लिया। इस पर हामिद दादी के हाथ में वह लोहे का चिमटा रख देता है जो उसने मेले से खरीदा था। दादी की वो चिमटा देखकर आँखें भर आती हैं और वो हामिद को डाँटने लगती हैं कि सुबह से भूखे प्यासे घूमते हुए भी उसने मेले से अपने लिए कोई अच्छा सा खिलौना या मिठाई न लेकर उनके लिए वो चिमटा आखिर क्यों लिया। तो आइये सुनते हैं मुंशी प्रेमचंद की इस खूबसूरत कहानी का आखिरी भाग! अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ: https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

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मुंशी प्रेमचंद हिंदी भाषा के बहुत जाने-माने लेखक थे, जो अपनी कहानियों से लोगों के दिलों को छू लेते थे। उनकी कहानियाँ आम जीवन की सच्ची घटनाओं पर आधारित होती थीं, और सदैव अपने पाठकों को कुछ सिखाती थीं। ईदगाह उनकी एक ऐसी ही खूबसूरत कहानी है, जिसमें एक छोटे बच्चे, हामिद, का अपनी दादी के लिए प्यार और समर्पण दिखाया गया है। ईद के मेले में जहाँ बाकी बच्चे खिलौने और मिठाइयाँ खरीदते हैं, हामिद अपनी छोटी सी ईदी की रकम से अपनी दादी के लिए कोई तोहफा लेने का मन बनाता है।  तो आइये सुनते हैं ईदगाह की कहानी और जानते हैं कि आखिर नन्हें से हामिद ने अपनी ईदी को कैसे खर्च किया।  अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ:  https://chimesradio.com हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें: https://www.instagram.com/vrchimesradio/ https://www.facebook.com/chimesradio/

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