Father's Day

GreyMatters Communications

पिता ये शब्द सुनते ही हमारे मन में कई भाव आते हैं, प्रेम, सम्मान, डर, ताकत, उम्मीद, हिम्मत और न जाने क्या क्या। पिता होते ही ऐसे हैं। आज का एपिसोड बेहद खास है क्योंकि हम बात करने जा रहे हैं हमारे जीवन के उन नायकों की, जिन्हें हम अपने पिता के नाम से जानते हैं। जी हां, आज फादर्स डे है और हमारा आज का यह खास पॉडकास्ट सभी पिताओं को समर्पित है। पिता का हमारे जीवन में एक अनमोल स्थान होता है। वे हमारे पहले शिक्षक, हमारे सबसे बड़े समर्थक और हमारे आदर्श होते हैं। आज हम उनकी जीवनभर की मेहनत, त्याग और अटूट प्रेम को सेलिब्रेट कर रहे हैं। क्या आप जानते हैं कि फादर्स डे की शुरुआत कैसे हुई? फादर्स डे का इतिहास काफी दिलचस्प है। सबसे पहले इसे 1910 में अमेरिका के वॉशिंगटन में मनाया गया था। इसकी शुरुआत एक महिला, सोनारा स्मार्ट डॉड ने की थी, जिन्होंने अपनी मां के निधन के बाद अपने पिता को सिंगल पैरेंट के रूप में पाकर इस दिन को समर्पित किया। पिता, मान, स्वाभिमान और अभिमान है। पिता एक उम्मी

  1. 05/12/2024

    Happy Mother's Day!

    Life doesn't come with a manual, it comes with a mother. And how true it is! Today we celebrate the incredible journey of motherhood, today we celebrate mothers. मां ~ ये एक अक्षर संपूर्ण सृष्टि के बराबर माना गया है। वाल्मीकि रामायण में भगवान राम ने कहा है “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरियसि।” यानी मां और मातृभूमि स्वर्ग से भी श्रेष्ठ है। इस एक अक्षर का संबोधन पूरी सृष्टि का श्रेष्ठ संबोधन है, इस एक संबोधन में मानव जीवन के लिए जरूरी सारे भाव हैं ~ प्रेम, अपनापन, करुणा। मां एक सुखद अनुभूति है, एक शीतल आवरण की तरह जो हमें हर परेशानी, दुख, चिंता से बचाने को कोशिश करती है। मांओं का होना, हमें जीवन के हर लड़ाई से लड़ने की ताकत देता है। मां जिंदगी का विश्वास होती है, मां जीवन का संबल होती है, सराहा होती है, मां जीवन की आस होती है, मां ही तो जीवन का सार होती है। मुन्नवर राणा की एक शेर है ~ चलती फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी है मैंने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है और सच में उपमाओं से परे है मां, शब्दों में उसकी व्याख्यान करना संभव नहीं। मां होने का अर्थ ख़ुद मां बनने के बाद पता चलता है, देखने से मातृत्व आसान जरूर लगता है, पर सच में ऐसा नहीं होता है। जब छोटे थे तो लगता था कि क्यों मां छोटी छोटी चीजों पे बोलती है, मां को अक्सर कहते थे कि अब हम बच्चे नहीं हैं, बड़े हो गए हैं, अपना ध्यान रख सकते हैं। कई सवाल और शिकायत थे मां के लिए, अब जब खुद मां बन गए हैं तो सारे शिकायत और सवाल खत्म होंगे। खुद मां बनने के बाद आप अपनी मां को ज्यादा बेहतर समझते हैं। याद कीजिए, आपके जन्मदिन या त्योहारों में मां की बनाई वो मिठाई या छोले ~ आप किसी भी फाइव स्टार में चले जाएं, मां के हाथ का स्वाद नहीं मिल पाएगा। मां के हाथों की बनी हुई स्वेटर में हम कितने सुंदर लगते थे, और याद है कहीं जाने से पहले मां का हम सबको काला टीका लगाना ताकि नजर न लगे। ये माएं भी न कमाल होती हैं। अगर आप इनके लिए कुछ छोटी सी चीज भी कर देंगे न तो ये ऐसे खुश होती जैसे पता नहीं क्या हो गया। आप जब घर से दूर होते हैं तो ये आपके एक कॉल का इंतजार पूरे दिन करती हैं, आपके सलामती के लिए हर रोज मन्नते मांगती हैं, प्रार्थना करती हैं। मां अनमोल है। जब तक जीवन में मां का साथ है, उनके साथ समय बिताए, बातें करें, हंसे। और हां मां को सेलिब्रेट करने के लिए सिर्फ एक दिन नहीं है, हार्बडिन मां का है क्योंकि हम भी तो उनसे ही हैं। और अंत में मेरी लिखी एक छोटी सी कविता ~ जिंदगी की तेज़ धूप में मेरी छांव मां बारिश में छाता सी मां गर्मी में हाथ वाली पंखा मां मेरा पहली बोली मां मेरी हंसी ठिठोली मां मेरा आंगन मां मेरा बचपन मां मेरी पहली गुरु मां परियों और जादू वाली दुनिया मां आंखों में सपने संजोने वाली मां उपमाओं से परे मां शब्दों की माला में न बंधने वाली मां मेरी लंबी उम्र के लिए मंत्रों का जाप मां पानी सी निश्छल मां सबसे प्यारी मेरी मां Happy Mother's Day! THANK YOU

    6 min

About

पिता ये शब्द सुनते ही हमारे मन में कई भाव आते हैं, प्रेम, सम्मान, डर, ताकत, उम्मीद, हिम्मत और न जाने क्या क्या। पिता होते ही ऐसे हैं। आज का एपिसोड बेहद खास है क्योंकि हम बात करने जा रहे हैं हमारे जीवन के उन नायकों की, जिन्हें हम अपने पिता के नाम से जानते हैं। जी हां, आज फादर्स डे है और हमारा आज का यह खास पॉडकास्ट सभी पिताओं को समर्पित है। पिता का हमारे जीवन में एक अनमोल स्थान होता है। वे हमारे पहले शिक्षक, हमारे सबसे बड़े समर्थक और हमारे आदर्श होते हैं। आज हम उनकी जीवनभर की मेहनत, त्याग और अटूट प्रेम को सेलिब्रेट कर रहे हैं। क्या आप जानते हैं कि फादर्स डे की शुरुआत कैसे हुई? फादर्स डे का इतिहास काफी दिलचस्प है। सबसे पहले इसे 1910 में अमेरिका के वॉशिंगटन में मनाया गया था। इसकी शुरुआत एक महिला, सोनारा स्मार्ट डॉड ने की थी, जिन्होंने अपनी मां के निधन के बाद अपने पिता को सिंगल पैरेंट के रूप में पाकर इस दिन को समर्पित किया। पिता, मान, स्वाभिमान और अभिमान है। पिता एक उम्मी

You Might Also Like