Panno se Parde tak , Popcorn / Pages by Prachi

Prachi

अलार्म सुने हैं, बस...ये वही है। लालटेन की तरह आप मेरे इस पॉडकास्ट को कभी भी जलाएं ,आपको यहां पर मिलेगा बहुत कुछ। यह कुछ भी हो सकता है। किस्सा,कहानी,किताब और सिनेमा के साथ कलाकार। सिर्फ 2 मिनट में सुनो.. थोड़ा सुन तो लो....😊

  1. Jul 30

    मुसाफिर कैफे, 2 minute review

    मुसाफिर हैं हम भी मुसाफिर हो तुम भी, किसी मोड़ पर फिर मुलाकात होगी। बशीर ब्रद का यह लोकप्रिय शेर मुसाफिर कैफे 2 की कहानी को आसानी से बयान करता है। मुसाफिर कैफे जहां पर चंदर है, सुधा है और साथ में है प्रीती। हालांकि प्रीती का साथ होना चंदर के जीवन को एक राह देता है। लेकिन चंदर के जीवन की चाह सुधा के साथ बंधी हुई है। विक्रांत मसी, वेदिका पिंटो और महिमा मकवाना मुसाफिर कैफे की खूबसूरत तस्वीरें हैं,यह कहानी शुरू होती है चंदर से, जो एक बार प्यार में धोखा खा चुका है और उसकी मुलाकात होती है सुधा से। सुधा आजाद महिला है। जिसका सपना अपने करियर को उड़ान देना है। शादी उसकी चेक लिस्ट में शामिल नहीं और चंदर शादी के साथ अपने सपने मुसाफिर कैफे की शुरुआत भी चाहता है। लेकिन प्यार और करियर के बीच फंसकर इन दोनों का सच्चा प्यार दब कर रह जाता है और फिर सात साल बाद दोनों की मुलाकात होती है। चंदर के पास मुसाफिर कैफे के साथ सच्चा प्यार करने वाली प्रीती भी है। सुधा के पास उनका पार्टनर वीनित है। लेकिन फिर से हुई मुलाकात इनके जीवन का क्या मोड़ देती है, इसी पर जाकर रूक जाती है मुसाफिर कैफे,लास्ट एपिसोड के आखिरी मिनट पर आकर आपको इस सवाल पर छोड़ देता है कि क्या चंदर सुधा के पास लौट जाएगा , या फिर वह प्रीति को चुनेगा, जिसने चंदर को फिर से प्यार करने की अपने सपनों को पूरा करने की हिम्मत दी है। फिलहाल मैं चलती हूं औऱ मेरी तरह आप भी इंतजार करें मुसाफिर कैफे 2 का ...

    मुसाफिर कैफे, 2 minute review
  2. Jul 30

    प्रीतम एंड पेड्रो 2 minute review

    प्रीतम और pedro का ट्रेलर देखने के साथ हमारे दिमाग में यह आता है कि राजकुमारी हिरानी का डायरेक्शन और अरशद वारसी और विक्रांत मैसी जैसे दो उम्दा कलाकार इस सीरीज को खास बनाते हैं। जब आप शुरू के दो एपिसोड देखते हैं, तो आपको अरशद वारसी लगातार दिखाई देते हैं अपने कामेडी अंदाज में लेकिन इसके साथ इंताजर रहता है, विक्रांत की एंट्री का। लेकिन जरा रूक जाइए, जी हां, विक्रात और अरशद के बीच एक नया कलाकार फिल्म के पहले सीन से दिखाई देता है और साहब, दिखाई क्या देता है बल्कि छा जाता है, हर सीन में फिर चाहे वो कामेडी हो , इमोशन हो या फिर थिलर हो, वीर हिरानी प्रीतम के किरदार में कब आपके आंखें में जगह बना लेते हैं, पता ही नहीं चलता। लगता ही नहीं कि कोई न्यू कमर एक्टर इस सीरीज की टाइटल भूमिका का भार बखूबी निभा रहा है। यह सीरीज गोवा लेकर जाता है। जहां पर पुलिस पेड्रो और कम्प्यूटर जीनियस प्रीतम की एक मुलाकात कैसे उनके जीवन को बदलती है। इसे दिखाया गया है। 2 एपिसोड बाद विक्रात की एंट्री सीरीज के कामेडी लहजे को काइम और संस्पेंस से भर देती है। 6 एपिसोड की यह सीरीज आपको क्राइम, क्रामेडी और थ्रिलर का पूरा स्वाद दे जाती है। इस वीकेंड अगर आप कुछ बढ़िया देखना चाहते हैं और राजकुमार हिरानी की फिल्म का स्वाद फिर से चखना चाहते हैं, तो आपको जरूर इस सीरीज को अपनी मस्ट वाट लिस्ट में शामिल करना चाहिए।

    प्रीतम एंड पेड्रो 2 minute review
  3. Jul 9

    2 minute Review- gram chikitsalay season2

    ग्राम चिकित्सालय सीजन 2 एक गांव और गांव में सरकारी अस्पताल की उठा-पटक के बीच एक ईमानदार डॅाक्टर की दिलचस्प सटायर कहानी के साथ ग्राम चिकित्सालय का सीजन 2 फिर से हाजिर हो गया है। आप शहर में रहते हैं या फिर गांव में सरकारी अस्पताल हमेशा से अपनी व्यवस्था के उम्दा न होने की कहानी ब खुद अपने हाल से बयान करता है। अस्पताल के बिस्तर से लेकर दवाईयों की किल्लत खुद पर खुद इस बात को जाहिर करते हैं कि हमारे पास पीड़ित को देने के लिए कुछ भी नहीं है, सिवाय हौसले के। शायद यही वजह है कि सरकारी अस्पताल को हमेशा सरकारी काम की तरह लंबे कतार में खड़े रहना होता है। जहां पर सरकारी अस्पताल मरीज के आने का इंतजार करता है और मरीज आ भी जाए, तो दवाई के साथ सुविधा का इंतजार भी करता है। ग्राम चिकित्सालय का दूसरा सीजन भी इसी के ईद-गिर्द घूमता हुआ आपको एक हल्की-फुल्की कॅामेडी के साथ 5 एपिसोड की सवारी पर लेकर चलता है। जहां पर गांव के कई सारे गंभीर मुद्दों को भावनात्मक तरीके से छूने की कवायद भी करता है। सरकारी नौकरी के लिए रिश्वत और पकडुवा विवाह से लेकर एक बामारी से पीड़ित लड़की से की जाने वाली शादी के महत्व को भी समझाता है। अमोल पराशर, विनय पाठक और दिनेश लाल यादव की भूमिका 5 एपिसोड की सीरीज की पकड़ को मजबूत करती है। वहीं भूषण और विनोद की सरपाइज एंट्री पंचायत सीरीज के  मस्तमौला अंदाज को भी जोड़ते हुए देसी स्वाद को मजबूत करती है। हालांकि अगर इस सीरीज को  5 एपिसोड से अधिक बढ़ाया जाता, तो यह ऊबाउ हो सकती थी। इस तरह की कहानी के लिए 5 एपिसोड का बंधन पाठकों के लिए देहाती एंटरटेनमेंट लेकर जरूर आता है। हल्की-फुल्की कॅामेडी के साथ गांव का जीवन देखना चाहते हैं, तो आपके एक दफा इस सीरीज को जरूर देखना चाहिए।

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अलार्म सुने हैं, बस...ये वही है। लालटेन की तरह आप मेरे इस पॉडकास्ट को कभी भी जलाएं ,आपको यहां पर मिलेगा बहुत कुछ। यह कुछ भी हो सकता है। किस्सा,कहानी,किताब और सिनेमा के साथ कलाकार। सिर्फ 2 मिनट में सुनो.. थोड़ा सुन तो लो....😊