Panno se Parde tak , Popcorn / Pages by Prachi

Prachi

अलार्म सुने हैं, बस...ये वही है। लालटेन की तरह आप मेरे इस पॉडकास्ट को कभी भी जलाएं ,आपको यहां पर मिलेगा बहुत कुछ। यह कुछ भी हो सकता है। किस्सा,कहानी,किताब और सिनेमा के साथ कलाकार। सिर्फ 2 मिनट में सुनो.. थोड़ा सुन तो लो....😊

  1. Book Review- अनुराधा बेनीवाल अपनी किताब आजादी मेरा ब्रांड

    05/30/2024

    Book Review- अनुराधा बेनीवाल अपनी किताब आजादी मेरा ब्रांड

    क्यों नहीं चलने देते तुम मुझे? मैं चलते-चलते जैसे चीखने लगती हूं, क्यों इतना मुश्किल है एक लड़की का अकेले घर से निकल कर चल पाना? मैं ये आजादी लिए बिना नहीं जाऊंगी। ये सारे सवाल हर उस लड़की के जीवन का हिस्सा है, जो समाज की घुटन से आजाद होने का प्रयास कर रही है। उन सभी की आवाज को अपनी लेखनी के जरिए बयां किया है अनुराधा बेनीवाल अपनी किताब आजादी मेरा ब्रांड के जरिए। अनुराधा बेनीवाल ने अपनी इस किताब में सिर्फ अकेली लड़की के यूरोप के 13 देशों की घूमने की कहानी बयां नहीं की है, बल्कि वो ये बता रही हैं कि एक लड़की धरती पर नहीं रहती, बल्कि समाज में रहती हैं। ऐसा समाज जो शहर हो या गांव एक लड़की का अकेले सड़क पर चलना बर्दाश्त नहीं सकता। यूरोप घूमते हुए जिस तरह अनुराधा ने महिलाओं को आजादी और सम्मान का आईना दिखाया है, वह उनकी सरल लिखावट और सोच में साफ झलकता है। अपनी किताब के जरिए लेखिका समाज को बदलने की चिंगारी नहीं जला रही हैं, बल्कि हर महिला को घुमक्कड़ी करना सीखा रही हैं। वो बता रही हैं कि अगर तुम लड़की हो, तो अपने गांव में घूमो, गांव में घूम नहीं पा रही, तो शहर में घूमो, इस समाज में नहीं घूम पा रही हो, तो अपनी सोच की दुनिया में घूमो, लेकिन घूमो जरूर, क्योंकि यही असली आजादी है, विचारों की आजादी, खुद से मिलने की आजादी, बेपरवाह होने की आजादी। आजादी आजाद होने की। खुल कर चलने की। खुली हवा में सांस लेने की आजादी। अब आप इतना, तो समझ गए होंगे कि ये किताब सिर्फ एक ट्रैवल गाइड नहीं है, बल्कि ये किताब असल मायने में बताती है कि तू छोरी नहीं है, तू आजाद है और उड़ सकती है। फिलहाल, इस किताब को पढ़ने के लिए यही सबसे बड़ी वजह है कि ये किताब नहीं एक खत है, आजाद देश की आजाद लड़कियों के लिए।

    2 min
  2. Book Review -गीतांजलि श्री का पांचवां उपन्यास 'रेत समाधि'

    02/15/2024

    Book Review -गीतांजलि श्री का पांचवां उपन्यास 'रेत समाधि'

    गीतांजलि की किताब रेत समाधि हाथ में पकड़ी हुई रेत मुट्ठी बंद करने पर हाथ से फिसल जाती है, लेकिन गीतांजलि श्री का पांचवां उपन्यास 'रेत समाधि', केवल कुछ पन्ने पलटने के बाद से आपको अंदरूनी तौर पर जकड़ लेती है। 80 साल की चंद्रप्रभा के चंद्रा बनने के सफर की गाड़ी इस उपन्यास में न केवल बॉर्डर पार करती है, बल्कि आपके मन को भी एक ऐसे सफर पर ले जाती है, जहां हर पन्ने के साथ नई कहानी जन्म देती है, जहां पर दीवारें, पेड़, तितलियां, दरवाजा और यहां तक रेत और हवा भी जीवित होकर संवाद करने लगते हैं। आप इस उपन्यास की अहमियत इसी बात से समझ सकते हैं कि इसके अंग्रेजी ट्रांसलेशन ' टूम ऑफ सेंड को वर्ष 2022 में बुकर प्राइज से सम्मानित किया जा चुका है। इस उपन्यास का हर वाक्य शब्दों के भावों के साथ आपको विभाजन की त्रासदी, परिवार और अलगाव के साथ एक चंद्रप्रभा के जीवन के पथरीले रास्तों की चुभन महसूस कराता है। बड़ी खूबसूरती से इसमें बताया गया है कि प्यार अधूरा होता है, लेकिन पुराना नहीं। रेत समाधि यह बताती है कि बढ़ती उम्र फिर से जीने की ललक को छीन नहीं सकती है। कहते हैं कि कोई भी उपन्यास अपने अंत के साथ पाठक के लिए एक ऐसी दुनिया का भी अंत कर देता है, जहां पर वह प्रेम, विरोध और जीवन के सारे भावों से होते हुए खुद को पाने की उड़ान तक पहुंचता है और रेत समाधि इस यात्रा को सफल बनाती है।

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  3. Is azadi kyun na..jane diya jaye...

    08/12/2023

    Is azadi kyun na..jane diya jaye...

    हम महिलाओं की जिंदगी ऐसी ही होती है, जिसे हम सभी पकड़ कर रखना चाहते हैं। कभी अपनी चोटी की उलझनों में, तो कभी अपने बैग के कई खानों के बीच की जगह में ठुस कर। हम उड़ना चो चाहते हैं लेकिन हाथ में घड़ी बांधकर वक्त पर वक्त देखते रहते हैं और कहते हैं कि वक्त ही नहीं है हमारे पास। एक तरऱ हाथों की उगलियां लैपटॅाप पर टिप टिप करती हैं, तो दूसरे ही पल कलाई कढ़ाई में स्वाद की लड़ाई लढ़ती रहती है। क्या आपको नहीं लगता कि कुछ देर ठहर कर सोचा जाए, जीवन की घुटन, दर्द,मान-अपनान के साथ सारे सुख और दुखों को पलके झपका कर जाने दिया जाए। जब भी कोई उलझन हो या मन उदास हो, या फिर दिमाग में टेंशन का पारा परवान पर हो, तो आंख बंद करके लंबी सांस लेकर खुद से ये बोला जाए...ये वक्त गुजर गया, अब इसकी सिलवटों से माथे को आजाद किया जाए...जाने दिया जाए...

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  4. क्यों न खुद को ऐसे पैंपर किया जाए..एक बार कोशिश करके, तो देखिए..इसमें सुकून है..

    06/24/2023

    क्यों न खुद को ऐसे पैंपर किया जाए..एक बार कोशिश करके, तो देखिए..इसमें सुकून है..

    इसके बदले क्यों न खुद को खुश रखने के लिए किसी दूसरे शहर से बेहतर घर के पास वाले गार्डन में जाकर घास के बीच बैठा जाए। क्यों न बस पकड़ कर किसी बीच पर जाकर लहरों के शोर में सुकून खोजा जाए। जहां पर चटाई वाले भैया को 100 रुपए देकर बीच के पास चटाई पर बैठ मूंगफली की गर्माहट का मजा लिया जाए। क्यों न आंख बंद करके सुकून से रेत की गोद में सोया जाए।जब आंख खुले तो आसमान के खाली पन में खुद के सपनों को पिरोया जाए। वो कहते हैं न खुद को खुश रखने के लिए किसी योजना नहीं सुकून जरूर है, जो कि आपके भीतर मुफ्त में छिपी होती है। बस,इसकी खोज कीजिए और खुद को पैम्पर के लिए एक प्याली चाय के साथ पुराने गानों की महफिल सजा दीजिए।

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अलार्म सुने हैं, बस...ये वही है। लालटेन की तरह आप मेरे इस पॉडकास्ट को कभी भी जलाएं ,आपको यहां पर मिलेगा बहुत कुछ। यह कुछ भी हो सकता है। किस्सा,कहानी,किताब और सिनेमा के साथ कलाकार। सिर्फ 2 मिनट में सुनो.. थोड़ा सुन तो लो....😊