Padhaku Nitin

Padhaku Nitin is a casual and long conversation-based podcast where Aaj Tak Radio host Nitin talks to experts and discuss a wide range of topics like history, war, politics, policy, ideologies, cinema, travelling, sports, nature and everything that is interesting. A single episode of the show can be as enriching as reading four books. As we say in the podcast,Chaar kitaabe padhne jitna gyaan milega Padhaku Nitin mein. कब कोई हक़ीक़त से मिथक बन जाता है? क्यों कोई कहानी सदियाँ पार करके हमारे सिरहाने आ बैठती है? कुछ नाम तो इंसानों की कलेक्टिव मेमोरी का हमेशा के लिए हिस्सा बन जाते हैं लेकिन पूरी की पूरी सभ्यता चुपचाप कैसे मिट जाती है? भाषा के ग्रामर से मिले कब, क्यों, कैसे, कहां, किसने ऐसे शब्द हैं जो सेंटेंस में जुड़ जाएँ तो सवाल पैदा करते हैं और सवालों के बारे में आइंस्टीन ने कहा था- The important thing is not to stop questioning. पढ़ाकू नितिन ऐसा ही पॉडकास्ट है जिसमें किसी टॉपिक का रेशा रेशा खुलने तक हम सवाल पूछने से थकते नहीं.

  1. आपकी ज़िंदगी से 8 साल खा रहे प्रदूषण को कौन रोक नहीं रहा? : पढ़ाकू नितिन

    5 HR AGO

    आपकी ज़िंदगी से 8 साल खा रहे प्रदूषण को कौन रोक नहीं रहा? : पढ़ाकू नितिन

    देश के कोने कोने से आवाज़ें आ रहीं हैं. AQI डबल से ट्रिपल डिजिट हुआ जा रहा है इसका ख़्याल कीजिए. हवा में जो ज़हर घुलता जा रहा है इसका ख़्याल कीजिए. क्योंकि WHO के आंकड़े ऐसा बताते हैं कि दुनिया की 99% जनता, Air Pollution के सीधे ख़तरों से प्रभावित है. न उनका दिल सुरक्षित है, न दिमाग और न फेंफड़े. अब जब बात इतनी गंभीर है, तो इस पर बात होना भी Urgent हो जाता है. तो याद रखिए, Padhaku Nitin का ये एपिसोड सिर्फ़ इंट्रेस्टिंग ही नहीं बेहद Urgent भी है. आज बात करेंगे की Air Pollution की समस्या को Solve करने में हम कहां पीछे रह रहे हैं? क्या Policy Making की कमी है? या क्या हम इस प्रॉबल्म को Misjudge कर रहे हैं? क्या Pollution के चलते सिर्फ़ हमारी Society ही नहीं, Economy भी धीमे धीमे नुकसान उठा रही है? फोकस दिल्ली पर भी करेंगे. पूछेंगे कि क्या AQI को टेंप्रेचर का स्केल बता देना या पानी छिड़क देना Monitoring Scales के आसपास. किसी भी तरह से Pollution को मिटाने के लिए कोई वैज्ञानिक तरीका है? यही पूछा है इस एपिसोड में जाने माने Environmentalist Chandra Bhushan जी से. पिछले दो दशकों से ये लगातार Environment से जुड़े मुद्दों पर गहरी रिसर्च करते हैं, करवाते हैं. Panels का हिस्सा होते हैं और उस चर्चा से और भी आगे बढ़कर चीज़ें समझाते हैं जहां Air Pollution की चर्चा दिल्ली की गाड़ियों से शुरू होती है. iForest (International Forum for Environment, Sustainability और Technology) नाम की प्रतिष्ठित संस्था के CEO भी हैं. एपिसोड पूरा सुनिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल

    1h 8m
  2. Dhurandhar, Kashmir Files और Kerala Story जैसी फिल्में नहीं बननी चाहिए? : पढ़ाकू नितिन

    12 FEB

    Dhurandhar, Kashmir Files और Kerala Story जैसी फिल्में नहीं बननी चाहिए? : पढ़ाकू नितिन

    सिनेमा सिर्फ़ मनोरंजन ही नहीं, किसी समाज को, उसकी जड़ों और उसके culture को समझने का एक रास्ता भी है. सिनेमा के अंदर वह ताकत है कि आप 2026 में किसी थिएटर में बैठकर The Godfather देखें, तो मुमकिन है आपको लगे कि World War II अभी-अभी खत्म हुआ है. उसी थिएटर में बैठकर Interstellar देखें, तो महसूस हो कि दुनिया खत्म होने के कगार पर है. और अगर ओए लक्की! लक्की ओए! देखें, तो समझ आए कि दिल्लीवालों की complexities क्या हैं. Cinema एक subjective माध्यम भी है. दो अलग-अलग लोग एक ही फिल्म को अलग नजरिए से देख सकते हैं और इस पर बहस कर सकते हैं कि क्या वह फिल्म किसी propaganda का हिस्सा है या सच्चाई दिखाती है. आपने धुरंधर, छावा और The Kashmir Files को लेकर हुए बवाल भी देखे होंगे. क्योंकि आजकल फिल्मों पर propaganda cinema होने के आरोप पहले से ज़्यादा लगने लगे हैं. Padhaku Nitin के इस एपिसोड में फिल्म journalist Mihir Pandya और documentary filmmaker Eshan Sharma के साथ इसी मुद्दे को टटोलेंगे. ये सिनेमा को पढ़ते भी हैं और पढ़ाते भी हैं, एक अलग नजरिए के साथ. इन्होंने हाल ही में propaganda cinema पर एक workshop भी की है. इसलिए आज हम इन्हीं से समझेंगे कि propaganda cinema आखिर होता क्या है. क्या propaganda-less cinema जैसी कोई चीज होती भी है. क्या सिनेमा सिर्फ एक छलावा है. क्या cinema की अपनी politics होती है, और क्या politics के बिना cinema संभव है. अंत तक बने रहिएगा. चैनल Subscribe करना भी न भूलिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल

    1h 39m
  3. भारत क्यों नहीं बन पा रहा विश्वगुरु? Economist ने किया पर्दाफाश : पढ़ाकू नितिन

    2 FEB

    भारत क्यों नहीं बन पा रहा विश्वगुरु? Economist ने किया पर्दाफाश : पढ़ाकू नितिन

    फरवरी 2026 आ चुका है. साथ ही आ चुका है इस साल का बजट भी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कल लोकसभा में Union Budget 2026 पेश किया. 83 मिनट का भाषण दिया. कई ऐलान किए. और अब हर साल की तरह बजट पर प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं. सरकार बजट के फायदे गिना रही है. विपक्ष नुकसान. प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि इस साल बजट हमारे युवाओं के सपनों का बिंब है और नेता प्रतिपक्ष कह रहे हैं कि युवा और किसान परेशान है और बजट ज़रूरी मुद्दों को एड्रेस नहीं कर रहा. Experts समझाने में जुटे हैं कि भारी Economic Terms में लबरेज़ बजट. आपके हमारे लिए क्या समेटे हुए है? तो चलिए हम भी एक ऐसे ही Expert की शरण लेते हैं जो हमको समझाएं कि क्या वाकई इस साल का बजट थोड़ा बोरिंग है, जैसा कि सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं हैं. या फिर कुछ ऐसे Undertones समेटे हुए है जो फिलहाल हमें समझ नहीं आ रहे लेकिन समझना ज़रूरी है. हमारे साथ है हमारे पुराने मेहमान Economist Arun Kumar जी. Yale, Columbia University जैसी Universities में Lectures दे चुके हैं. दुनियाभर में बुलाए जाते हैं. JNU में 30 साल इकॉनमिक्स पढ़ा चुके हैं. खासियत ये है इनकी कि आसान भाषा में सब समझाकर चौंका देते हैं. गुरुवार आने वाला पढ़ाकू नितिन का एपिसोड इस बार आपके लिए सोमवार ही ले आए हैं. पूरा देखिएगा और प्यार दीजिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: सूरज सिंह

    1h 24m
  4. Neeraj Chopra, Bajrang Punia, Rahgir जहां पढ़े उस LPU का ये सच नहीं जानते होंगे आप? : पढ़ाकू नितिन

    29 JAN

    Neeraj Chopra, Bajrang Punia, Rahgir जहां पढ़े उस LPU का ये सच नहीं जानते होंगे आप? : पढ़ाकू नितिन

    पढ़ाकू नितिन में ऐसा कम होता है जब हम स्टूडियो से बाहर निकलते हों. लेकिन इस बार हम सिर्फ़ स्टूडियो से ही नहीं शहर, यहां तक की राज्य से भी बाहर आ गए हैं. पढ़ाकू नितिन की टीम पहुंच गई है पंजाब के जालंधर. इस एपिसोड में हम घूमे जालंधर की मशहूर Lovely Professional University में. 150 से ज़्यादा कोर्सेज़, 35 हज़ार से ज़्यादा स्टूडेंट्स—Agriculture, Robotics, Management, Technology, Liberal Arts, Law और न जाने कितने ऐसे कोर्सेज़। दिमाग में सवाल आया कि आख़िर इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी चलती कैसे है? स्कूली शिक्षा की खामियों की बात तो हम अक्सर सुनते रहते हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी लेवल पर ये मामला कैसा है? यूनिवर्सिटीज़ करोड़ों के प्लेसमेंट्स कैसे करवाती हैं? एक वर्ल्ड-क्लास यूनिवर्सिटी कैसी होती है? क्या भारत में कोई वर्ल्ड-क्लास यूनिवर्सिटी है? और ये भी कि जब एक ही कैंपस में 40 से ज़्यादा देशों के स्टूडेंट्स पढ़ते हों, अलग-अलग राज्यों से, अलग-अलग पृष्ठभूमि से लोग आते हों—तो इतना सब कुछ मैनेज कैसे होता है? ये सारे सवाल हमने पूछे अपनी LPU की Pro-VC, Mrs. Rashmi Mittal से। प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: रोहन भारती

    1h 19m
  5. दिल्ली, मुंबई, नोएडा और गुरुग्राम जैसे महानगरों का भट्टा कैसे बैठ गया?: पढ़ाकू नितिन

    22 JAN

    दिल्ली, मुंबई, नोएडा और गुरुग्राम जैसे महानगरों का भट्टा कैसे बैठ गया?: पढ़ाकू नितिन

    जीने का हक़ सभी को है, ये तो हमारा संविधान भी कहता है. लेकिन बार-बार इसका उल्लंघन होना हमें सवाल पूछने मजबूर करता है. कुछ ही दिन पहले, नोएडा के सोफ़्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता एक हादसे का शिकार हो गए, ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में उनकी कार पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी. और ये सिर्फ़ एक घटना नहीं, रिकॉर्ड्स बताते हैं कि 2004 से 2015 के बीच क़रीब ऐसे 40 लाख मामले देखने को मिले हैं. ये आंकड़े हालात का अंदाज़ा तो देते हैं, लेकिन असलियत इससे कहीं ज़्यादा गहरी है. ‘पढ़ाकू नितिन’ के इस एपिसोड में हमारे मेहमान हैं केटी रवींद्रन, School of Planning and Architecture में Urban Design Department के डीन. उनसे हमने पूछा कि क्या हम अपने शहरों को अब तक Flawless क्यों नहीं बना पाए? क्यों Bangalore का Traffic अब भी बदनाम है? क्यों Monsoon आते ही बार बार ये डर सताता है कि पार्किंग में खड़ी गाड़ी डूब न जाए? पिछले साल Old Rajinder Nagar के Basement का मामला भी आपको याद होगा. तो सोचा क्यों न एक Expert से समझा जाए कि आखिर ये शहर बसाए कैसे जाते हैं? क्या इन्हें बसाते वक्त ऐसे Sustainable Methods के बारे में नहीं सोचा जाता कि Traffic न लगे. जानेंगे Noida, Gurugram, Delhi, Chandigarh, Bangalore, London, New York, Paris किस तरह से Urban Planning के लिहाज़ से शानदार या Flawed हैं. सुनिए पूरा पॉडकास्ट और हां, लाइक शेयर Subscribe करना न भूलिए प्रड्यूस: मानव और माज़ साउंड मिक्सिंग: अमन पाल

    1h 16m
  6. Rail neer के नाम पर scam, IRCTC का सच और Train में किन्नरों-TT ख़ौफ़! : पढ़ाकू नितिन

    15 JAN

    Rail neer के नाम पर scam, IRCTC का सच और Train में किन्नरों-TT ख़ौफ़! : पढ़ाकू नितिन

    न जाने कितनी ही बॉलीवुड फिल्मों के क्लाइमेक्स सीन और न जाने कितने ही भारतीयों के आम जीवन का हिस्सा रही है यह रेल. भारतीय मिडिल क्लास की यादों का एक बड़ा हिस्सा रेलवे से जुड़ा है. लेकिन रेलवे की यात्राओं को रोमांटिसाइज़ करना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी यह समझना भी है कि रेलवे, कई दूसरी सरकारी संस्थाओं की तरह, अव्यवस्था से अछूता नहीं रहा है. रेलवे के मुताबिक, पिछले पांच सालों में खाने से जुड़ी 19,000 से ज़्यादा शिकायतें दर्ज हुई हैं. 2021–22 में शिकायतें करीब 1,000 थीं, 2023–24 में यह संख्या 7,000 के पार पहुंच गई और 2024–25 में 6,000 से ज्यादा हो गई. ये आंकड़े हालात का अंदाज़ा तो देते हैं, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज़्यादा गहरी है. ‘पढ़ाकू नितिन’ के इस एपिसोड में हमारे साथ एक ऐसे व्लॉगर हैं, जो इसी हकीकत को लगातार सामने लाते रहते हैं. वे ट्रेनों में सफर करते हैं, छोटी हो या लंबी दूरी, हर यात्रा में. जहां 14 रुपये की पानी की बोतल 20 में बेची जाती है, वहां सवाल उठाते हैं. महंगा खाना बेचा जाता है, तो शिकायत दर्ज कराते हैं. इस दौरान होने वाली झड़पों को भी वे बेहद सहजता से संभालते हैं. इनका नाम है शाहनवाज़. सोशल मीडिया पर ये “पीटर क्लिप्स” के नाम से मशहूर हैं. आपने इनकी रील्स और वीडियो ज़रूर देखी होंगी. आज देखिए इनका पहला पॉडकास्ट, जहां हमने रेलवे में भ्रष्टाचार, यात्रियों की परेशानियों और उनकी आंखों देखी अव्यवस्थाओं पर खुलकर बातचीत की है. प्रड्यूसर : मानव देव रावत साउंड मिक्सिंग: अमन पाल

    1h 16m
  7. Mohit Chauhan Rockstar, Silk Route, Singer KK के कौन-से राज़ खोल गए? : पढ़ाकू नितिन

    8 JAN

    Mohit Chauhan Rockstar, Silk Route, Singer KK के कौन-से राज़ खोल गए? : पढ़ाकू नितिन

    Nostalgia किसी Time Machine की तरह होता है न? एक बार हिट किया नहीं कि आप पहुंच जाते हैं एक दूसरे Time-Space में. Music अक्सर इस तरह के Nostalgias के लिए Trigger साबित होता है. जो आपको 2026 में बैठे बैठे भी कई दशकों पहले की यात्रा मिनटों में करवा लाता है. तो चलिए आपको उस दौर में ले चलते हैं, Mid 1990s. जब Indie Pop किसी ठंडी हवा के झोंके की तरह Audience के कानों को कुछ शानदार Earworms दे रहा था. कुछ नए Bands, नए Sounds, नए Styles जो आज भी लोगों को याद हैं. आज हमारे साथ एक ऐसे ही Artist हैं जिन्होंने शुरूआत Popularity Indie Pop के दौर में पाई लेकिन फिर Bollywood में आकर भी खूब धूम मचाई. ये वही आर्टिस्ट हैं, जिन्होंने जो छुआ उसे सोना बना दिया. चाहे Silk Route के गाने हों, Rockstar की Album या Singles. इन्होंने कभी निराश नहीं किया. हमारे साथ हैं Playback Singer और Musician Mohit Chauhan. जिनका नया गाना सिर्फ़ सुरीला ही नहीं है, Social Cause के लिए Contributor भी है. पॉडकास्ट पूरा सुनिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल

    1h 23m
  8. Ram Mandir से जुड़े कौनसे राज़ खोल गए रामलला के वकील?

    1 JAN

    Ram Mandir से जुड़े कौनसे राज़ खोल गए रामलला के वकील?

    दिसंबर सुनते ही दिमाग में क्या आता है? साल का आखिरी महीना. मगर पिछले एक ऐसी किताब आई जिसे पढ़कर, दिसंबर एक और कारण से याद आएगा. कारण है राम जन्मभूमि विवाद का. जब आप इस विवाद की टाइमलाइन देखेंगे तो आपको पैटर्न नज़र आएगा कि इस विवाद से जुड़े लगभग सारे बड़े घटनाक्रम दिसंबर में ही घटे फिर चाहे इस मामले में पहला मुकदमा दर्ज होना हो… या बाबरी मस्जिद का गिरना. और इसी दिसंबर में हम बात करने जा रहे हैं रामजन्मभूमि विवाद पर. वो भी उनसे जो Literally ‘भगवान के वकील’ रहे हैं. हमारे साथ हैं आज दो वकील, अनिरुद्ध शर्मा और श्रीधर पोटराजू. आपको 2019 का रामजन्मभूमि केस याद है न? इस केस में राल लला विराजमान को रिप्रेज़ेंट करने वालों में ये दोनों शामिल थे. इन दोनों ने हाल ही में मिलकर एक किताब लिखी जिसका नाम है Case for Ram. ये किताब दरअसल उस मुकदमे के पीछे की कहानी है. ये किताब सुप्रीम कोर्ट में हुई बहसों को समेटे हुए है. ये किताब समेटे हुए है उन तैयारियों की तफसील जो सुप्रीम कोर्ट में एक केस लड़ने के लिए की जाती है. भयंकर डिटेलिंग के भरा हुई किताब है, उतना ही डीटेल्ड ये पॉडकास्ट भी है. पूरा सुनिएगा

    1h 46m

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Padhaku Nitin is a casual and long conversation-based podcast where Aaj Tak Radio host Nitin talks to experts and discuss a wide range of topics like history, war, politics, policy, ideologies, cinema, travelling, sports, nature and everything that is interesting. A single episode of the show can be as enriching as reading four books. As we say in the podcast,Chaar kitaabe padhne jitna gyaan milega Padhaku Nitin mein. कब कोई हक़ीक़त से मिथक बन जाता है? क्यों कोई कहानी सदियाँ पार करके हमारे सिरहाने आ बैठती है? कुछ नाम तो इंसानों की कलेक्टिव मेमोरी का हमेशा के लिए हिस्सा बन जाते हैं लेकिन पूरी की पूरी सभ्यता चुपचाप कैसे मिट जाती है? भाषा के ग्रामर से मिले कब, क्यों, कैसे, कहां, किसने ऐसे शब्द हैं जो सेंटेंस में जुड़ जाएँ तो सवाल पैदा करते हैं और सवालों के बारे में आइंस्टीन ने कहा था- The important thing is not to stop questioning. पढ़ाकू नितिन ऐसा ही पॉडकास्ट है जिसमें किसी टॉपिक का रेशा रेशा खुलने तक हम सवाल पूछने से थकते नहीं.

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